प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ बना सुपरहिट, 34.13 करोड़ रुपये की कमाई के साथ जनता से जुड़ा अनूठा मंच।

UP News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ न केवल भारत के कोने-कोने में लोगों से सीधा संवाद करने का एक प्रभावी माध्यम...

Aug 9, 2025 - 11:44
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प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ बना सुपरहिट, 34.13 करोड़ रुपये की कमाई के साथ जनता से जुड़ा अनूठा मंच।
प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ बना सुपरहिट, 34.13 करोड़ रुपये की कमाई के साथ जनता से जुड़ा अनूठा मंच।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ न केवल भारत के कोने-कोने में लोगों से सीधा संवाद करने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है, बल्कि यह एक आर्थिक रूप से सफल पहल भी साबित हुआ है। 8 अगस्त 2025 को सरकार ने राज्यसभा में बताया कि इस कार्यक्रम ने अपनी शुरुआत से अब तक 34.13 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम को आकाशवाणी द्वारा बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मौजूदा संसाधनों का उपयोग करके तैयार किया जाता है और यह रेडियो, टेलीविजन, डिजिटल और सोशल मीडिया जैसे कई मंचों के माध्यम से देश और विदेश में लाखों लोगों तक पहुंचता है।

‘मन की बात’ की शुरुआत 3 अक्टूबर 2014 को हुई थी। तब से यह हर महीने के आखिरी रविवार को सुबह 11 बजे प्रसारित होता है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी देश के विभिन्न हिस्सों से प्रेरक कहानियां, सामाजिक पहल, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, नवाचार और सामुदायिक प्रयासों को उजागर करते हैं। यह कार्यक्रम देश के युवाओं, किसानों, महिलाओं, कारीगरों, उद्यमियों और खिलाड़ियों द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों को सामने लाता है। साथ ही, यह इतिहास के अनसुने नायकों को भी सम्मान देता है। इसकी सादगी और सीधा संवाद लोगों के दिलों को छूता है, जिसके कारण यह देश का सबसे लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम बन गया है। एक अध्ययन के अनुसार, 100 करोड़ से अधिक लोग कम से कम एक बार ‘मन की बात’ सुन चुके हैं।

सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने राज्यसभा में बताया कि ‘मन की बात’ को आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) अपने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेटवर्क के माध्यम से लाइव प्रसारित करता है। क्षेत्रीय भाषाओं में इसका अनुवाद भी किया जाता है, ताकि देश के विभिन्न भाषाई समुदायों तक यह पहुंच सके। इसके अलावा, यह कार्यक्रम दूरदर्शन के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनलों पर भी प्रसारित होता है। डीडी फ्री डिश पर 48 आकाशवाणी रेडियो चैनल और 92 निजी टेलीविजन चैनल उपलब्ध हैं, जो इसे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद करते हैं। इसकी वीडियो प्रारूप वाली प्रस्तुति दर्शकों को सामूहिक रूप से देखने और चर्चा करने का अवसर देती है, जिससे सामुदायिक जुड़ाव बढ़ता है।

डिजिटल युग में ‘मन की बात’ की पहुंच और भी व्यापक हो गई है। यह कार्यक्रम यूट्यूब पर पीएमओ इंडिया, आकाशवाणी और प्रसार भारती के चैनलों पर लाइव-स्ट्रीम और आर्काइव किया जाता है। प्रसार भारती की ओटीटी प्लेटफॉर्म वेव्स (WAVES) और न्यूजऑनएयर (NewsOnAIR) मोबाइल ऐप, जो 260 से अधिक आकाशवाणी चैनलों को उपलब्ध कराता है, के माध्यम से भी इसे देखा और सुना जा सकता है। इसके अलावा, प्रसार भारती की न्यूज फीड सेवा पीबी शब्द (PB SHABD) के जरिए यह संबद्ध मंचों और चैनलों पर साझा किया जाता है। सोशल मीडिया मंच जैसे फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पर भी यह कार्यक्रम भारत और विदेशों में व्यापक रूप से देखा जाता है। इन डिजिटल माध्यमों ने ‘मन की बात’ को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है।

‘मन की बात’ की सफलता का एक बड़ा कारण इसका जनता से सीधा जुड़ाव है। यह कार्यक्रम न केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों को लोगों तक पहुंचाता है, बल्कि सामान्य नागरिकों की कहानियों को भी राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के एपिसोड्स में स्वच्छ भारत मिशन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं के प्रभाव को उजागर किया है। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक कचरे को कम करने जैसे विषयों पर जनता को प्रेरित किया है। कार्यक्रम में अक्सर उन लोगों की कहानियां शामिल की जाती हैं, जिन्होंने छोटे स्तर पर बड़े बदलाव किए, जैसे ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए स्वयं सहायता समूह या युवा उद्यमियों द्वारा शुरू किए गए नवाचार।

इस कार्यक्रम की आर्थिक सफलता भी उल्लेखनीय है। 34.13 करोड़ रुपये की आय ने यह साबित किया है कि यह न केवल सामाजिक रूप से प्रभावी है, बल्कि वित्तीय रूप से भी लाभकारी है। यह आय मुख्य रूप से विज्ञापनों, प्रायोजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारण से प्राप्त होती है। खास बात यह है कि यह आय आकाशवाणी के मौजूदा संसाधनों का उपयोग करके अर्जित की गई है, जिसमें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं किया गया। इससे आकाशवाणी जैसे पारंपरिक प्रसारण माध्यमों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिली है, जो हाल के वर्षों में घाटे से जूझ रहा था। 2017-18 में इस कार्यक्रम ने सबसे अधिक 10.64 करोड़ रुपये की आय अर्जित की थी, जो इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है।

‘मन की बात’ का प्रभाव केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा सामूहिक रूप से इस कार्यक्रम को सुना और देखा जाता है। यह सामुदायिक जागरूकता और चर्चा को बढ़ावा देता है। उदाहरण के लिए, कई गांवों में ग्राम पंचायत भवनों में ‘मन की बात’ के प्रसारण के लिए विशेष सभाएं आयोजित की जाती हैं, जहां लोग एक साथ बैठकर इसे सुनते हैं और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं। यह कार्यक्रम सामाजिक एकता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने में भी योगदान देता है।

सोशल मीडिया पर ‘मन की बात’ की चर्चा हमेशा जोरों पर रहती है। हर एपिसोड के बाद लोग अपने विचार और अनुभव साझा करते हैं। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, “मन की बात सिर्फ एक रेडियो शो नहीं है, यह देश की आत्मा से जुड़ा एक मंच है, जो हमें प्रेरित करता है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “मोदी जी की सादगी और उनकी बातों का असर लाखों लोगों को एकजुट करता है।” हालांकि, कुछ लोगों ने इसकी आलोचना भी की है, उनका कहना है कि यह कार्यक्रम सरकारी योजनाओं का प्रचार करने का एक जरिया है। फिर भी, इसकी व्यापक लोकप्रियता और प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।

‘मन की बात’ ने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को भी सामने लाया है। यह कार्यक्रम विभिन्न राज्यों और समुदायों की कहानियों को राष्ट्रीय मंच पर लाता है। उदाहरण के लिए, एक एपिसोड में असम के चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं की कहानी, तो दूसरे में राजस्थान के रेगिस्तान में जल संरक्षण के प्रयासों को उजागर किया गया। यह कार्यक्रम भारत की एकता में अनेकता को दर्शाता है और लोगों को अपने देश पर गर्व करने के लिए प्रेरित करता है।

इस कार्यक्रम ने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी अपनी छाप छोड़ी है। प्रवासी भारतीय इसे यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से सुनते हैं और अपने देश से जुड़ाव महसूस करते हैं। कई देशों में भारतीय दूतावासों ने ‘मन की बात’ के सामूहिक प्रसारण की व्यवस्था की है, जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय में एकजुटता बढ़ी है।

‘मन की बात’ की सफलता का एक और पहलू यह है कि यह जनता की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। लोग अपने सुझाव और कहानियां पीएमओ इंडिया की वेबसाइट, मायगव पोर्टल या टोल-फ्री नंबर के जरिए भेज सकते हैं। कई बार प्रधानमंत्री इनमें से कुछ सुझावों और कहानियों को अपने कार्यक्रम में शामिल करते हैं, जिससे लोगों को लगता है कि उनकी आवाज सुनी जा रही है।

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