माघ मेले में स्नान विवाद के बीच केशव मौर्य की अपील, पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम कर विवाद समाप्त करने की गुहार।

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद जारी

Jan 23, 2026 - 12:05
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माघ मेले में स्नान विवाद के बीच केशव मौर्य की अपील, पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम कर विवाद समाप्त करने की गुहार।
माघ मेले में स्नान विवाद के बीच केशव मौर्य की अपील, पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम कर विवाद समाप्त करने की गुहार।
  • उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद पर डिप्टी सीएम का नरम रुख, केशव प्रसाद मौर्य ने अविमुक्तेश्वरानंद को कहा पूज्य शंकराचार्य जी
  • शंकराचार्य पद विवाद में यूपी डिप्टी सीएम का संतुलित बयान, अविमुक्तेश्वरानंद से स्नान कर मामले को खत्म करने का आग्रह

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद जारी है। इस विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में सवार होकर संगम स्नान करने जा रहे थे। प्रशासन ने उन्हें रोका और बैरिकेड तोड़ने का आरोप लगाया। स्वामी के समर्थकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मारपीट की और 15 लोग घायल हुए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना और अनशन शुरू किया तथा दोषी अधिकारियों से माफी की मांग की। प्रशासन ने कहा कि भगदड़ से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 22 जनवरी 2026 को इस मामले पर बयान दिया।

केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पूज्य शंकराचार्य जी कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है। वह अच्छे से स्नान करें। उनसे प्रार्थना है कि इस विषय का यहीं समापन करें। ऐसा आग्रह है। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि संतों, आचार्यों या शंकराचार्य का अपमान या अनादर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन्होंने ऐसा किया है उनके खिलाफ जांच कराई जाएगी और कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में किसी संत या शंकराचार्य का अपमान स्वीकार्य नहीं है। बयान ऐसे समय आया जब प्रशासन ने स्वामी को नोटिस जारी किया था।

प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कई नोटिस जारी किए। एक नोटिस में मौनी अमावस्या पर बैरिकेड तोड़ने, बिना अनुमति पालकी उपयोग और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया गया। दूसरे नोटिस में शिविर में शंकराचार्य पद का बोर्ड लगाने पर आपत्ति जताई गई और कहा गया कि यह अदालती आदेशों का उल्लंघन है। प्रशासन ने भूमि आवंटन रद्द करने और मेले में भागीदारी रोकने की चेतावनी दी। स्वामी के पक्ष ने नोटिस को भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि आरोप निराधार हैं। विवाद में स्वामी ने वसंत पंचमी पर स्नान नहीं करने की बात कही जब तक माफी नहीं मिलती।

यह विवाद शंकराचार्य पद की वैधता से भी जुड़ा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में जाने जाते हैं लेकिन पद को लेकर विवाद है। प्रशासन ने बोर्ड पर शंकराचार्य लिखने पर आपत्ति जताई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। डिप्टी सीएम के बयान को नरम रुख माना जा रहा है। उन्होंने अपील की कि विरोध समाप्त कर संगम स्नान किया जाए। बयान वसंत पंचमी से पहले आया जब मेले में स्नान का महत्व बढ़ जाता है।

माघ मेले में यह घटना सनातन परंपरा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच तनाव पैदा कर रही है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने माइक से गलत जानकारी फैलाई। प्रशासन ने कहा कि नियमों का पालन नहीं हुआ। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी लेकिन पहले विवाद समाप्त होना चाहिए। उन्होंने संतों की आस्था का सम्मान करने पर जोर दिया।

डिप्टी सीएम का बयान राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। विवाद में विभिन्न दल सक्रिय हुए हैं। केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि अपमान करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्वामी से प्रार्थना की कि स्नान कर विषय समाप्त करें। यह बयान प्रयागराज में जारी मेले के दौरान आया।

शंकराचार्य विवाद में केशव प्रसाद मौर्य का बयान नरम रुख दर्शाता है। उन्होंने पूज्य शंकराचार्य जी कहकर संबोधित किया और स्नान की अपील की। प्रशासनिक नोटिस और स्वामी की मांग के बीच यह बयान मामले को शांत करने की कोशिश लगता है। जांच जारी है और विवाद थमने की प्रतीक्षा है।

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