रायपुर के अस्पताल में बड़ा हादसा: सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे तीन मजदूरों की जहरीली गैस से मौत, अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप।

रायपुर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में सोमवार को सामान्य कामकाज चल रहा था, तभी अस्पताल प्रशासन द्वारा सेप्टिक टैंक की सफाई

Mar 18, 2026 - 11:46
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रायपुर के अस्पताल में बड़ा हादसा: सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे तीन मजदूरों की जहरीली गैस से मौत, अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप।
  • दम घुटने से थमी तीन जिंदगियां; रायपुर में टैंक की सफाई के दौरान सुरक्षा उपकरणों का अभाव बना काल, पुलिस ने दर्ज किया मामला।
  • अस्पताल परिसर बना श्मशान; सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस ने ली तीन सफाईकर्मियों की जान, राजधानी रायपुर में मचा कोहराम।

रायपुर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में सोमवार को सामान्य कामकाज चल रहा था, तभी अस्पताल प्रशासन द्वारा सेप्टिक टैंक की सफाई का जिम्मा कुछ मजदूरों को सौंपा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक मजदूर टैंक का ढक्कन खोलकर भीतर उतरा था। जैसे ही वह कुछ नीचे पहुंचा, वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे बचाने के लिए दूसरा साथी तुरंत नीचे उतरा, लेकिन वह भी गैस के प्रभाव से बेसुध हो गया। इसके बाद तीसरे साथी ने अपने दोस्तों को निकालने की कोशिश की, लेकिन वह भी उसी जहरीले चक्रव्यूह में फंस गया। कुछ ही मिनटों में चीख-पुकार मच गई और अस्पताल के कर्मचारी मौके पर जमा हो गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

  • दम घुटने की घटना में जहरीली गैस का प्रभाव

शुरुआती चिकित्सकीय जांच और फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि टैंक के भीतर मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी घातक गैसों का भारी जमाव था। काफी समय से बंद रहने के कारण इन गैसों की सांद्रता इतनी अधिक हो गई थी कि ऑक्सीजन का स्तर शून्य के करीब पहुंच गया। जैसे ही मजदूरों ने टैंक में प्रवेश किया, इन गैसों ने उनके फेफड़ों पर सीधा हमला किया, जिससे उन्हें सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हुई और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण वे तुरंत अचेत हो गए। डॉक्टरों ने बताया कि दम घुटना ही मौत का प्राथमिक कारण है, क्योंकि टैंक की गहराई और गैस के दबाव ने उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिया।

  • सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी

नियमों के अनुसार, किसी भी सेप्टिक टैंक या सीवर लाइन में उतरने से पहले गैस डिटेक्टर का उपयोग करना और ऑक्सीजन मास्क व हार्नेस बेल्ट पहनना अनिवार्य है। रायपुर की इस घटना में प्राथमिक रूप से यह पाया गया है कि मजदूरों के पास कोई भी सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं था। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और गोताखोरों व क्रेन की मदद से तीनों शवों को बाहर निकाला गया। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही बरतने का मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या इन मजदूरों को काम पर रखने से पहले उचित प्रशिक्षण दिया गया था और क्या उन्हें खतरे के बारे में आगाह किया गया था। पुलिस ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और सफाई के अनुबंध से संबंधित दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।

  • अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल

अस्पताल, जो स्वयं जीवन बचाने का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की असुरक्षित कार्यप्रणाली ने जनता के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि अस्पताल प्रशासन ने बिना किसी विशेषज्ञता या सुरक्षा गियर के मजदूरों को इतने गहरे और खतरनाक टैंक में क्यों उतारा। क्या लागत कम करने के चक्कर में मशीनी सफाई के बजाय मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से सफाई) का सहारा लिया गया? कानून के मुताबिक हाथ से मैला ढोना और असुरक्षित तरीके से टैंक में उतरना प्रतिबंधित है, ऐसे में अस्पताल की जवाबदेही काफी बढ़ जाती है। प्रबंधन फिलहाल इस विषय पर चुप्पी साधे हुए है, जिससे संदेह और बढ़ रहा है।

  • मृतक मजदूरों के परिवारों में मातम

इस हादसे में जान गंवाने वाले तीनों मजदूर अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। घटना की खबर मिलते ही उनके परिजन अस्पताल पहुंचे और वहां का मंजर देखकर बदहवास हो गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मजदूरों को जबरन और बिना किसी तैयारी के टैंक में उतारा गया था। स्थानीय नागरिक समाज और श्रमिक संगठनों ने मृतकों के परिजनों के लिए उचित मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। सरकार ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुग्रह राशि देने का आश्वासन दिया है। भारत में 'मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013' लागू है, जो स्पष्ट रूप से खतरनाक सफाई कार्यों को प्रतिबंधित करता है। इसके बावजूद, रायपुर जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर इन कानूनों का क्रियान्वयन कितना कमजोर है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ठेकेदारों और संस्थानों पर भारी जुर्माना और सख्त जेल की सजा का प्रावधान कड़ाई से लागू नहीं होगा, तब तक मजदूरों की जान दांव पर लगती रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि वह शहर के सभी निजी और सरकारी संस्थानों के सीवरेज सिस्टम की सफाई के लिए केवल प्रमाणित एजेंसियों को ही अनुमति दे।

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