होर्मुज के मुहाने पर अमेरिकी प्रहार; 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से ईरान के मिसाइल केंद्र तबाह, तेल संकट के बीच ट्रंप का बड़ा एक्शन।

अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन में अपनी वायुसेना के सबसे शक्तिशाली हथियारों में से एक, GBU-72 एडवांस्ड पेनिट्रेटर का इस्तेमाल किया

Mar 18, 2026 - 11:51
 0  6
होर्मुज के मुहाने पर अमेरिकी प्रहार; 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से ईरान के मिसाइल केंद्र तबाह, तेल संकट के बीच ट्रंप का बड़ा एक्शन।
होर्मुज के मुहाने पर अमेरिकी प्रहार; 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से ईरान के मिसाइल केंद्र तबाह, तेल संकट के बीच ट्रंप का बड़ा एक्शन।
  • ट्रंप का नाटो पर फूटा गुस्सा: 'अकेले लड़ेंगे जंग', होर्मुज को मुक्त कराने के लिए अमेरिका ने तैनात किए विनाशकारी हथियार, ईरानी रक्षा तंत्र में भारी सेंध।
  • ईरानी मिसाइलों के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी'; अभेद्य बंकरों को भेदने वाले बमों से थर्राया फारस की खाड़ी का तट, वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने की चुनौती।

अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन में अपनी वायुसेना के सबसे शक्तिशाली हथियारों में से एक, GBU-72 एडवांस्ड पेनिट्रेटर का इस्तेमाल किया है। यह बम विशेष रूप से कंक्रीट की कई फीट मोटी परतों और जमीन के नीचे गहराई में बने सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। मंगलवार तड़के हुए इस हमले में ईरान के तटवर्ती इलाकों में स्थित उन 'हार्डन्ड' (मजबूत) मिसाइल साइटों को निशाना बनाया गया, जहाँ से ईरानी सेना अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें दागने की तैयारी में थी। CENTCOM के अनुसार, ये ठिकाने इतने मजबूत थे कि साधारण बमों से इन्हें भेदना असंभव था, इसलिए 2200 किलो के इन विनाशकारी बमों का चयन किया गया ताकि ईरानी मिसाइल क्षमता को जड़ से खत्म किया जा सके। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। हाल के हफ्तों में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण इस रास्ते पर लगभग 'चोकहोल्ड' जैसी स्थिति बन गई थी। ईरान ने धमकी दी थी कि यदि उसके हितों पर हमला हुआ, तो वह इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को निशाना बनाएगा। इस डर के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने टैंकरों के रास्ते बदल दिए थे, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। अमेरिका की इस ताजा कार्रवाई का प्राथमिक उद्देश्य इसी समुद्री रास्ते को फिर से सुरक्षित करना और वैश्विक अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाना है।

  • युद्ध का नया चरण: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए इस साझा अमेरिका-इजरायल अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया है। इसके तहत अब तक ईरान के परमाणु केंद्रों से लेकर उसके शीर्ष नेतृत्व और मिसाइल डिपो को निशाना बनाया जा चुका है।

इस भीषण हमले के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने अपने 'नाटो' (NATO) सहयोगियों और अन्य मित्र देशों की भूमिका पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि जब दुनिया की तेल सप्लाई बाधित हो रही है, तो अन्य देश केवल तमाशबीन बने हुए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि कई देशों ने इस अभियान में अपने युद्धपोत या माइनस्वीपर्स भेजने से इनकार कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका यह लड़ाई अकेले लड़ने में सक्षम है और उसे किसी की मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्होंने उन देशों की आलोचना की जो अमेरिकी सुरक्षा का लाभ तो उठाते हैं, लेकिन जरूरत के वक्त पीछे हट जाते हैं।

  • ईरानी प्रतिक्रिया और जवाबी हमले की आशंका

अमेरिका के इस घातक प्रहार के बाद ईरान में भारी हड़कंप मचा हुआ है। ईरान के सर्वोच्च सुरक्षा अधिकारियों ने इस हमले को उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है और 'कड़ी प्रतिक्रिया' की चेतावनी दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर इजरायल के तेल अवीव और क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला करने की कोशिश की है। खाड़ी के अन्य देशों जैसे सऊदी अरब और कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में संदिग्ध ड्रोनों को मार गिराने की सूचना दी है। ईरान का दावा है कि वह अपने मिसाइल ठिकानों की रक्षा करने में सक्षम है और अमेरिकी बमबारी के बावजूद उसकी प्रतिरोधक क्षमता खत्म नहीं हुई है।

  • वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर होगा असर?

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर देखा जा रहा है। जैसे ही बंकर बस्टर बमों के हमले की खबर फैली, कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है या ईरान वास्तव में होर्मुज को पूरी तरह बंद करने में सफल रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट बेकाबू हो सकता है। फिलहाल अमेरिका ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह तेल मार्गों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। हालांकि, बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि निवेशक यह देख रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई तेल की सप्लाई को सुचारू कर पाएगी या यह तनाव को और अधिक भड़का देगी।

  • ईरानी नेतृत्व को बड़ा झटका

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान अपने नेतृत्व के संकट से भी जूझ रहा है। हाल ही में हुए इजरायली और अमेरिकी हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और सुरक्षा प्रमुख मारे गए हैं। सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद से ईरान में सत्ता के केंद्रों में खींचतान की खबरें भी आ रही हैं। ऐसे में मिसाइल केंद्रों का तबाह होना ईरानी सेना के मनोबल के लिए एक बड़ी चोट है। अमेरिका इस स्थिति का लाभ उठाकर ईरान के 'रिमोट' मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम को पंगु बना देना चाहता है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अब अपने बाकी बचे मिसाइल जखीरे को सुरक्षित करने के लिए उन्हें पहाड़ों के अंदर बने गुप्त ठिकानों में स्थानांतरित कर रहा है।

Also Read- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की: यूएस ने ईरान के खर्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह किया।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow