RBI की एमपीसी बैठक में रेपो दर कटौती का फैसला- जीडीपी की मजबूत वृद्धि और रिकॉर्ड निम्न मुद्रास्फीति के बीच संतुलन की चुनौती।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है, जो देश की आर्थिक स्थिति के बीच
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है, जो देश की आर्थिक स्थिति के बीच एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है। यह बैठक 3 दिसंबर से 5 दिसंबर तक चलेगी, और इसका परिणाम 5 दिसंबर को सुबह 10 बजे घोषित किया जाएगा। समिति के समक्ष मुख्य रूप से सकल घरेलू उत्पाद की मजबूत वृद्धि और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के अभूतपूर्व निम्न स्तर जैसे कारक मौजूद हैं, जो नीतिगत निर्णय को जटिल बना रहे हैं। वर्तमान में रेपो दर 5.5 प्रतिशत पर स्थिर है, और विशेषज्ञों का मानना है कि समिति इस बार इसे अपरिवर्तित रखने या 25 आधार अंकों की कटौती करने पर विचार कर सकती है। यह निर्णय न केवल बैंकों के उधार दरों को प्रभावित करेगा, बल्कि समग्र आर्थिक गतिविधियों, निवेश और उपभोग पर भी असर डालेगा।
देश की अर्थव्यवस्था ने हाल ही में जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 5.6 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह वृद्धि छह तिमाहियों में सबसे तेज है और अपेक्षाओं से कहीं बेहतर साबित हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8 प्रतिशत रही, जो पूर्ववर्ती वर्ष की समान अवधि के 6.1 प्रतिशत से बेहतर है। इस मजबूत प्रदर्शन का श्रेय शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपभोग की मजबूती, निजी निवेश में सुधार तथा सरकारी व्यय को दिया जा रहा है। इसके अलावा, अच्छे मानसून, वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में हालिया समायोजन तथा ऋण प्रवाह में वृद्धि ने भी इस गति को बल प्रदान किया है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान पहले 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें दूसरी तिमाही के लिए 7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.4 प्रतिशत तथा चौथी तिमाही के लिए 6.2 प्रतिशत की प्रक्षेपण शामिल हैं। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए अनुमान 6.4 प्रतिशत रखा गया है, जिसमें जोखिम समान रूप से वितरित हैं।
इसके विपरीत, मुद्रास्फीति की स्थिति चिंताजनक रूप से निम्न है। अक्टूबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 0.25 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो वर्तमान श्रृंखला में सबसे निम्न स्तर है। यह पिछले महीने के 1.4 प्रतिशत से काफी कम है और पिछले नौ महीनों से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। जुलाई 2025 में यह आठ वर्षों के निम्नतम स्तर 1.6 प्रतिशत पर थी, जो अगस्त में 2.1 प्रतिशत हो गई। इस गिरावट का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं, विशेष रूप से फल और सब्जियों के मूल्यों में तेज कमी, अनुकूल आधार प्रभाव तथा वस्तु एवं सेवा कर दरों में हालिया कटौती है। कोर मुद्रास्फीति 4.4 प्रतिशत के आसपास स्थिर रही है, लेकिन कुल मिलाकर मूल्य दबावों में कमी ने नीतिनिर्माताओं को राहत प्रदान की है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान पहले 3.1 प्रतिशत से घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए 1.8 प्रतिशत तथा चौथी तिमाही के लिए 4 प्रतिशत का प्रक्षेपण है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए अनुमान 4.5 प्रतिशत रखा गया है। यह अनुमान सरकारी लक्ष्य 4 प्रतिशत के आसपास रखने के उद्देश्य को दर्शाता है, जिसमें 2 प्रतिशत की सहनशीलता सीमा है।
मौद्रिक नीति समिति के निर्णय की प्रक्रिया में जीडीपी की मजबूती और मुद्रास्फीति की नरमी के बीच संतुलन बनाना एक प्रमुख चुनौती है। मजबूत आर्थिक वृद्धि सामान्यतः ब्याज दरों में कटौती की संभावना को कम करती है, क्योंकि यह अतिरिक्त प्रोत्साहन की आवश्यकता को इंगित नहीं करती। दूसरी ओर, निम्न मुद्रास्फीति वास्तविक नीति दर को ऊंचा बनाती है, जो विकास को बाधित कर सकती है। वर्तमान में वास्तविक नीति दर मुद्रास्फीति से ऊपर है, जिससे समिति को इसे समायोजित करने के लिए कटौती पर विचार करने का आधार मिलता है। वर्ष 2025 की शुरुआत से समिति ने रेपो दर में कुल 100 आधार अंकों की कटौती की है—फरवरी में 25, अप्रैल में 25 तथा जून में 50 आधार अंक—जिससे इसे 6.5 प्रतिशत से घटाकर 5.5 प्रतिशत किया गया। अगस्त से यह दर अपरिवर्तित है, और नीति रुख को तटस्थ रखा गया है। अक्टूबर की बैठक में भी समिति ने सर्वसम्मति से दर को स्थिर रखा था, लेकिन मुद्रास्फीति में तेज कमी ने विश्वास बढ़ाया।
बैठक के संदर्भ में वैश्विक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका में आयात शुल्क पर 50 प्रतिशत की वृद्धि तथा एच-1बी वीजा संबंधी तनाव ने व्यापारिक अनिश्चितताओं को जन्म दिया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने वर्ष 2025 में 1.47 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ा है। वर्तमान खाता घाटा पहली तिमाही में 0.2 प्रतिशत जीडीपी के बराबर रहा, जो पिछले वर्ष के 0.9 प्रतिशत से कम है। विदेशी मुद्रा भंडार 630.6 अरब डॉलर पर मजबूत है, जो 10 महीनों के आयात को कवर करता है। इन कारकों के बीच समिति वैश्विक व्यापारिक जोखिमों तथा घरेलू सुधारों, जैसे जीएसटी 2.0 तथा ऋण प्रवाह में सुधार, का मूल्यांकन करेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि समिति मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 1.8-2 प्रतिशत तक घटा सकती है तथा जीडीपी अनुमान को 7 प्रतिशत से ऊपर संशोधित कर सकती है।
मौद्रिक नीति समिति की संरचना में छह सदस्य शामिल हैं, जिनमें तीन केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधि तथा तीन बाहरी विशेषज्ञ हैं। यह समिति द्विमासिक रूप से मिलती है तथा ब्याज दरें, तरलता प्रवृत्तियां तथा मुद्रास्फीति पूर्वानुमान पर निर्णय लेती है। वर्तमान बैठक में तरलता की स्थिति स्थिर है, और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। समिति के निर्णय का प्रभाव बैंकों की उधार दरों पर सीधा पड़ेगा, जो घरेलू, वाहन तथा व्यक्तिगत ऋणों की मासिक किस्तों को प्रभावित करेंगे। यदि कटौती होती है, तो यह उधारकर्ताओं को राहत देगी, लेकिन बचतकर्ताओं की जमा दरों पर दबाव बढ़ा सकती है। इसके अलावा, समिति भारतीय रुपये तथा स्थानीय मुद्राओं के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उपयोग को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार करेगी।
आर्थिक सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़े भी नीतिगत निर्णयों को निर्देशित करेंगे। शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण तथा ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण में रोजगार, आय, व्यय तथा मूल्य प्रवृत्तियों पर घरेलुओं के दृष्टिकोण शामिल हैं। ये 19 शहरों तथा 31 राज्यों में आयोजित होते हैं तथा मुद्रास्फीति अपेक्षाओं को मापते हैं। नवंबर 2025 के दौर में ये सर्वेक्षण समिति के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करेंगे। इसके अतिरिक्त, थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर 2025 में 1.8 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर में 2.36 प्रतिशत हुई, जो आपूर्ति श्रृंखला की प्रवृत्तियों को दर्शाती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिजर्व बैंक के पूर्वानुमान सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को 6.8 प्रतिशत पर स्थिर रखते हैं, लेकिन हालिया आंकड़ों के आधार पर इसे ऊपर संशोधित किया जा सकता है। मुद्रास्फीति के लिए 2.6 प्रतिशत का अनुमान पहले से ही संशोधित है, और आगे कमी की संभावना है। समिति खाद्य मुद्रास्फीति में अस्थिरता, जलवायु संबंधी जोखिमों तथा वैश्विक वस्तु मूल्यों पर नजर रखेगी। कोर मुद्रास्फीति में स्थिरता विकास को समर्थन प्रदान करती है, लेकिन समग्र मूल्य दबावों में कमी ने नीति को अधिक लचीला बनाया है।
बैठक के परिणामों की घोषणा RBI की आधिकारिक वेबसाइट, यूट्यूब चैनल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव प्रसारित होगी। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी तथा जनता को तत्काल पहुंच प्रदान करेगी। निर्णय न केवल घरेलू बाजारों को प्रभावित करेगा, बल्कि सेंसेक्स तथा निफ्टी जैसे सूचकांकों, रुपये की विनिमय दर तथा विदेशी प्रवाह पर भी असर डालेगा। निवेशक तथा उधारकर्ता इस घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह 2026 की आर्थिक दिशा को आकार देगी।
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