'सही नहीं किया ओझा जी', अवध ओझा के राजनीति छोड़ने पर सोमनाथ भारती ने कहा, अवध ओझा जाते जाते कर गये केजरीवाल की तारीफ़।

मशहूर यूपीएससी शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है, जो दिल्ली विधानसभा

Dec 3, 2025 - 11:38
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'सही नहीं किया ओझा जी', अवध ओझा के राजनीति छोड़ने पर सोमनाथ भारती ने कहा, अवध ओझा जाते जाते कर गये केजरीवाल की तारीफ़।
'सही नहीं किया ओझा जी', अवध ओझा के राजनीति छोड़ने पर सोमनाथ भारती ने कहा, अवध ओझा जाते जाते कर गये केजरीवाल की तारीफ़।

मशहूर यूपीएससी शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है, जो दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनकी हार के लगभग दस महीने बाद आया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें आम आदमी पार्टी के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया तथा इसे अपना व्यक्तिगत निर्णय बताया। इस घोषणा पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने राजनीति को कोई शॉर्ट टर्म प्रोजेक्ट न बताते हुए ओझा के फैसले पर सवाल उठाए। ओझा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह सहित सभी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं का दिल से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जो प्रेम और सम्मान उन्हें मिला, उसके लिए वे हमेशा ऋणी रहेंगे। संन्यास का यह कदम ओझा के राजनीतिक सफर का अंत दर्शाता है, जो मात्र एक वर्ष से भी कम समय का रहा।

अवध ओझा का राजनीतिक प्रवेश दिसंबर 2024 में हुआ था, जब उन्होंने आम आदमी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में यह समारोह आयोजित हुआ था। ओझा ने तब कहा था कि उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाना है, जो पार्टी के एजेंडे से मेल खाता है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा सुधार से ही राष्ट्र मजबूत होगा। पार्टी ने उन्हें पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया, जो पहले मनीष सिसोदिया का गढ़ रहा था। सिसोदिया ने इस सीट से स्थानांतरित होकर जंगपुरा से चुनाव लड़ा था। ओझा का चयन पार्टी की रणनीति का हिस्सा था, क्योंकि उनकी लोकप्रियता युवाओं और अप्रवासी समुदायों में अधिक थी। पटपड़गंज क्षेत्र पूर्वांचल से आए लोगों की अच्छी संख्या वाला इलाका है, जहां ओझा की छवि एक प्रेरक शिक्षक के रूप में स्थापित थी।

फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में ओझा को भाजपा के रविंदर सिंह नेगी से करारी हार का सामना करना पड़ा। नेगी ने 28,072 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। ओझा ने चुनाव परिणामों के तुरंत बाद अपनी हार को व्यक्तिगत विफलता बताया और कहा कि वे जनता से जुड़ने में असफल रहे। उन्होंने वादा किया कि वे पटपड़गंज की जनता से मिलेंगे और अगले चुनाव में इसी सीट से प्रयास करेंगे। यह हार आम आदमी पार्टी के लिए पटपड़गंज में दस वर्ष पुरानी सत्ता का अंत था, जो 2013 से पार्टी के नियंत्रण में रही। चुनाव के दौरान ओझा ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर जोर दिया, लेकिन एंटी-इनकंबेंसी और अन्य कारकों के कारण पार्टी को झटका लगा। ओझा ने चुनाव प्रचार में अपनी प्रेरक शैली का उपयोग किया, लेकिन परिणाम अपेक्षित न रहे।

संन्यास की घोषणा से कुछ दिन पहले ओझा ने एक साक्षात्कार में अपनी इच्छा जताई थी कि वे राजनीति से दूर होकर शिक्षण के पेशे में लौटना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं होंगे। इस साक्षात्कार के दौरान एक प्रसारण को बीच में ही रोक दिया गया था, जब ओझा कुछ सवालों पर बोल रहे थे। इस घटना ने पार्टी के मीडिया प्रबंधन पर सवाल उठाए थे। ओझा ने एक पॉडकास्ट में कहा कि राजनीति में रहते हुए वे अपनी बात खुलकर नहीं कह पा रहे थे, जो उनके स्वभाव के विपरीत था। संन्यास के बाद वे अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं, क्योंकि अब वे मन की बात बिना किसी बाधा के व्यक्त कर सकते हैं। उन्होंने बचपन से राजनीति का सपना देखा था, लेकिन चुनाव लड़ने के अनुभव ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि यह क्षेत्र उनके लिए उपयुक्त नहीं है। ओझा ने कहा कि वे अब युवाओं को शैक्षिक और व्यावसायिक मार्गदर्शन देंगे, जो उनके लिए अधिक सार्थक है।

सोमनाथ भारती की प्रतिक्रिया ओझा की पोस्ट का उद्धरण करते हुए आई। भारती ने लिखा कि उनके प्रति व्यक्तिगत सम्मान है, लेकिन राजनीति कोई शॉर्ट टर्म प्रोजेक्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि ओझा जैसे परिपक्व और प्रमुख व्यक्ति को राजनीति में प्रवेश करने से पहले विकल्पों पर गहन विचार करना चाहिए था, विशेषकर आम आदमी पार्टी के साथ। भारती ने जोर दिया कि पार्टी ने ओझा को टिकट देते समय यह अपेक्षा की थी कि वे चुनाव परिणामों की परवाह किए बिना कार्य जारी रखेंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि कई कार्यकर्ता शुरू से ही कड़ी मेहनत कर रहे थे, जिन्हें पटपड़गंज का टिकट मिल सकता था, लेकिन पार्टी ने ओझा पर भरोसा जताया। भारती ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी भारत का भविष्य है और इसे सभी राज्यों में सफल बनाने के लिए कठोर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कौन सी पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और आम लोगों की बुनियादी जरूरतों जैसे सुधारों पर बात करती है, जो देश की 90 प्रतिशत आबादी से जुड़े हैं। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के भाषणों का हवाला देते हुए कहा कि वे आम चिंताओं को संबोधित नहीं करते। भारती ने ओझा के फैसले को नॉट डन करार दिया।

ओझा का संन्यास राजनीतिक दलों में बाहरी उम्मीदवारों की भूमिका पर बहस छेड़ता है। ऐसे उम्मीदवारों को अक्सर लोकप्रियता के आधार पर चुना जाता है, लेकिन लंबे समय तक प्रतिबद्धता की अपेक्षा की जाती है। ओझा का मामला दर्शाता है कि शिक्षा जैसे क्षेत्र से आने वाले व्यक्ति को राजनीतिक गतिशीलता में ढलने में चुनौतियां आ सकती हैं। पार्टी के अंदरूनी स्रोतों के अनुसार, ओझा को चुनाव के बाद भी सक्रिय रखने की कोशिशें की गई थीं, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से दूरी बनाई। ओझा की लोकप्रियता यूपीएससी अभ्यर्थियों के बीच बनी हुई है, जहां वे इतिहास और प्रेरणा पर व्याख्यान देते हैं। उन्होंने 2019 में पुणे में आईक्यूआरए आईएएस अकादमी की स्थापना की और एक मोबाइल ऐप के माध्यम से शिक्षा को सुलभ बनाया। उनकी डिग्रियां एमए, एलएलबी, एमफिल और पीएचडी तक फैली हुई हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी को कुल 27 वर्ष बाद भाजपा ने हरा दिया था। पार्टी के कई प्रमुख नेता हार गए थे, जिनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सोमनाथ भारती शामिल थे। भारती मालवीय नगर से भाजपा के सतीश उपाध्याय से 2,131 वोटों से हारे थे। सिसोदिया जंगपुरा से 600 से अधिक वोटों से पराजित हुए। ओझा की हार ने पटपड़गंज में पार्टी की लंबी साख को तोड़ा। चुनाव के बाद पार्टी ने पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें नए चेहरों को शामिल करने पर जोर दिया गया। ओझा का संन्यास इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यह बाहरी सदस्यों की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है।

ओझा ने संन्यास के बाद कहा कि वे अब पूरी तरह शिक्षण पर लौटेंगे। उन्होंने युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए अपनी क्षमता का उपयोग करने की बात कही। राजनीति में उनका प्रवेश शिक्षा सुधार के उद्देश्य से था, लेकिन अनुभव ने उन्हें वापस मूल पेशे की ओर मोड़ दिया। सोमनाथ भारती की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि पार्टी ओझा से लंबी अवधि की भागीदारी की अपेक्षा कर रही थी। भारती ने पार्टी के मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने वाली केवल यही पार्टी है। ओझा के संदेश में अरविंद केजरीवाल को महान नेता बताते हुए उन्होंने पार्टी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

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