दिल्ली रेड फोर्ट कार ब्लास्ट: एनआईए ने डॉक्टरों के 'व्हाइट कॉलर' आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया, सात गिरफ्तारियां। 

10 नवंबर 2025 को दिल्ली के रेड फोर्ट के पास एक ह्युंडई आई20 कार में विस्फोट होने से 13 लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक

Nov 28, 2025 - 12:00
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दिल्ली रेड फोर्ट कार ब्लास्ट: एनआईए ने डॉक्टरों के 'व्हाइट कॉलर' आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया, सात गिरफ्तारियां। 
दिल्ली रेड फोर्ट कार ब्लास्ट: एनआईए ने डॉक्टरों के 'व्हाइट कॉलर' आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया, सात गिरफ्तारियां। 

नई दिल्ली। 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के रेड फोर्ट के पास एक ह्युंडई आई20 कार में विस्फोट होने से 13 लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक घायल हुए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस धमाके की जांच को तेज कर दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह एक वाहन आधारित सुसाइड बॉम्बिंग थी, जिसका मास्टरमाइंड डॉक्टर उमर उल नबी था। एनआईए ने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से अधिकांश उच्च शिक्षित डॉक्टर हैं। यह 'व्हाइट कॉलर' आतंकी मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़ा हुआ था, जो कई राज्यों में फैला हुआ था। एजेंसी इन गिरफ्तार आरोपियों को लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर ले जा रही है, जहां जांच के कोर जोन बनाए गए हैं। फोकस उच्च शिक्षित डॉक्टरों के नेटवर्क पर है, जो अपने पेशे को कवर बनाकर आतंकियों को शरण, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सुरक्षा प्रदान कर रहे थे।

धमाका दिल्ली के चंदनी चौक इलाके में शाम करीब सात बजे हुआ। आई20 कार में भारी मात्रा में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) भरी हुई थी, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट, ज्वलनशील रसायन और रिमोट ट्रिगर डिवाइस शामिल थे। फॉरेंसिक जांच से पुष्टि हुई कि कार के ड्राइवर डॉक्टर उमर उल नबी थे, जिनकी डीएनए रिपोर्ट उनकी मां के सैंपल से मैच कर गई। उमर का एक पैर कार के स्टीयरिंग और एक्सीलरेटर के बीच फंस गया था, जो बताता है कि वे धमाके के समय गाड़ी चला रहे थे। एनआईए के अनुसार, यह सुसाइड अटैक था, जो फरीदाबाद में 9-10 नवंबर को एनआईए की छापेमारी के तुरंत बाद किया गया। उस छापेमारी में 26 क्विंटल एनपीके फर्टिलाइजर, ग्राइंडिंग मशीनें और धातु पिघलाने वाली मशीनें बरामद हुईं। जांच से पता चला कि मॉड्यूल दो साल से विस्फोटकों का स्टॉक जमा कर रहा था।

एनआईए ने 11 नवंबर को केस अपने हाथ में लिया और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत जांच शुरू की। एजेंसी ने दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर काम किया। गिरफ्तार सातों आरोपी जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से जुड़े हैं। पहली गिरफ्तारी 30 अक्टूबर को हुई, जब पुलवामा के डॉक्टर मुजम्मिल शकील गनई को फरीदाबाद से पकड़ा गया। गनई अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में काम करता था। पूछताछ में उसने बताया कि उसने गुरुग्राम और नूह से 26 क्विंटल फर्टिलाइजर खरीदा था। दूसरे आरोपी अमीर राशिद अली का नाम कार के रजिस्ट्रेशन पर था, जिसे उन्होंने कई बार ट्रांसफर कराया ताकि ट्रेल छिप जाए। तीसरा आरोपी जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश है, जो टेक्निकल सपोर्ट देता था। उसने ड्रोन को मोडिफाई करने और रॉकेट बनाने की कोशिश की थी।

चौथा आरोपी डॉक्टर शाहीन सईद लखनऊ की रहने वाली हैं, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सर्जन के रूप में काम करती थीं। उन्हें फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया। एनआईए ने उन्हें यूनिवर्सिटी कैंपस ले जाकर ऑन-साइट पूछताछ की। पांचवें आरोपी डॉक्टर आदील अहमद राथर को सहारनपुर से पकड़ा गया। वे अनंतनाग के रहने वाले हैं और एनएच-44 पर एक अस्पताल में काम करते थे। छठा आरोपी मुफ्ती इरफान अहमद वागय शोपियां से है, जो धार्मिक प्रचारक हैं। उन्होंने उमर को सुसाइड बॉम्बिंग के लिए उकसाया, लेकिन वानी ने मना कर दिया। सातवीं गिरफ्तारी 26 नवंबर को हुई, जब फरीदाबाद से शोएब को पकड़ा गया। शोएब उमर नबी का करीबी था, जिसने धमाके से ठीक पहले उसे शरण दी और लॉजिस्टिक मदद की। एनआईए ने कहा कि शोएब ने नूह में उमर को कमरा दिलवाया था।

यह मॉड्यूल उच्च शिक्षित लोगों पर आधारित था, इसलिए इसे 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' कहा जा रहा है। डॉक्टर अपने पेशे का फायदा उठाकर शक से बचते थे। वे मरीजों के रूप में आतंकियों को शेल्टर देते, दवाओं के बहाने रसायन जुटाते और अस्पतालों को सेफ हाउस बनाते। जांच में पता चला कि विदेशी हैंडलरों ने एक डॉक्टर को एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर 42 बॉम्ब-मेकिंग वीडियो भेजे थे। हैंडलरों में 'उकासा' नाम का शख्स तुर्की से संचालित हो रहा था। एक अन्य हैंडलर फैसल सीरिया-तुर्की बॉर्डर पर है, जो कर्नाटक और तमिलनाडु के हमलों से भी जुड़ा। एनआईए ने जेईएम के 'बी-टीम' को भी चिह्नित किया, जो डायरेक्ट हमलों में शामिल नहीं लेकिन सपोर्ट देते थे। मॉड्यूल ने अमोनियम नाइट्रेट निकालने के लिए यूरिया फर्टिलाइजर का इस्तेमाल किया।

एनआईए की फील्ड कार्रवाई तेज हो गई है। 28 नवंबर को शाहीन समेत आरोपियों को फरीदाबाद ले जाया गया, जहां अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पूछताछ हुई। इसके बाद लखनऊ और कानपुर ले जाया जाएगा, जहां किराए के फ्लैट्स और सेफ हाउस पर छापे मार रहे हैं। सहारनपुर में इस्तेमाल वाहनों की फॉरेंसिक जांच पूरी हो चुकी है। एनआईए ने 73 गवाहों से पूछताछ की है, जिसमें घायल लोग शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर में उमर के साथी मुजफ्फर राथर अफगानिस्तान भाग गया है, जिसकी तलाश जारी है। एजेंसी ने मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखकर चार डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द करने को कहा।

जांच का सबसे बड़ा फोकस डॉक्टरों का हाई-एंड नेटवर्क है। ये डॉक्टर ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन के शिकार हुए थे। उमर नबी ने खुद एक वीडियो बनाया, जिसमें सुसाइड बॉम्बिंग को शहादत बताया। मॉड्यूल ने हमास स्टाइल हमले प्लान किए थे, जिसमें ड्रोन और रॉकेट से भीड़भाड़ वाले इलाकों पर हमला करना था। ड्रोन में कैमरा, बैटरी और छोटे बम फिट करने की योजना थी। यह 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले से प्रेरित लगता है। एनआईए ने कहा कि मॉड्यूल चार शहरों में समन्वित विस्फोट प्लान कर रहा था, लेकिन फरीदाबाद छापे ने इसे विफल कर दिया। धमाका पैनिक रिएक्शन था।

इस मॉड्यूल के अन्य लिंक भी सामने आ रहे हैं। हरियाणा के धौज गांव में एक टैक्सी ड्राइवर को हिरासत में लिया गया, जिसके घर मशीनें छिपाई गईं। नूंह में मस्जिद इमाम हाफिज मोहम्मद इश्तियाक को गिरफ्तार किया, जिसके घर 2563 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ। एनआईए ने कश्मीर, तमिलनाडु और कर्नाटक के पुराने मॉड्यूलों से कनेक्शन ढूंढा। एक आरोपी ने क्रिप्टोकरेंसी से फंडिंग की बात कबूली। जांच में 9 एमएम कारतूस भी मिले, जो नागरिकों के लिए प्रतिबंधित हैं।

सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया। गृह मंत्री अमित शाह ने एनआईए को सख्त निर्देश दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा एजेंसियों की सराहना की। दिल्ली पुलिस ने रेड फोर्ट साइट पर भारी सुरक्षा तैनात की। मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिया गया। विपक्ष ने जांच की सराहना की, लेकिन और पारदर्शिता की मांग की। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉड्यूल शिक्षित युवाओं के रेडिकलाइजेशन को दिखाता है। एनआईए ने चेतावनी दी कि ऐसे नेटवर्क ऑनलाइन प्रोपगैंडा से फैलते हैं। एजेंसी अब बड़े कांस्पिरेसी को उजागर करने पर जुटी है।

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