ज्ञानवापी विवाद पर पूर्व ASI अधिकारी का ने कहा- मुस्लिम समुदाय मस्जिद पर दावा करना छोड़ें, हिंदू पक्ष को नई मांग न करने की सलाह दी। 

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक केके मुहम्मद ने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर एक विवादास्पद बयान

Dec 2, 2025 - 12:42
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ज्ञानवापी विवाद पर पूर्व ASI अधिकारी का ने कहा- मुस्लिम समुदाय मस्जिद पर दावा करना छोड़ें, हिंदू पक्ष को नई मांग न करने की सलाह दी। 
ज्ञानवापी विवाद पर पूर्व ASI अधिकारी का ने कहा- मुस्लिम समुदाय मस्जिद पर दावा करना छोड़ें, हिंदू पक्ष को नई मांग न करने की सलाह दी। 

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक केके मुहम्मद ने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर एक विवादास्पद बयान देते हुए मुस्लिम समुदाय से दावा छोड़ने की अपील की है, साथ ही हिंदू पक्ष को नई मांगें न उठाने की सलाह दी है। मुहम्मद ने कहा कि अयोध्या विवाद एक कम्युनिस्ट इतिहासकार के प्रभाव के कारण बढ़ा, जहां कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने मुस्लिम समुदाय को मस्जिद के नीचे मंदिर होने के पुरातात्विक सबूतों को खारिज करने के लिए उकसाया। यह बयान 1 दिसंबर 2025 को एक साक्षात्कार में आया, जहां मुहम्मद ने अयोध्या, ज्ञानवापी और मथुरा को हिंदुओं के लिए मक्का-मदीना के समान महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मुस्लिम नेतृत्व से इन स्थलों को हिंदू पक्ष को सौंपने का आग्रह किया, ताकि सांप्रदायिक सद्भाव बना रहे। मुहम्मद का यह दृष्टिकोण अयोध्या फैसले के बाद से चला आ रहा है, जहां उन्होंने हमेशा पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर समझौते की वकालत की है। ज्ञानवापी मस्जिद, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के निकट स्थित है, लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है, और मुहम्मद के बयान ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया।

केके मुहम्मद, जो 1976-77 में बाबरी मस्जिद स्थल की खुदाई टीम का हिस्सा थे, ने अयोध्या में राम जन्मभूमि के नीचे मंदिर के अवशेषों की खोज का दावा किया है। उन्होंने बताया कि खुदाई के दौरान 12 खंभे मिले, जिन पर हिंदू प्रतीक चिह्न जैसे अष्टमंगल अंकित थे, साथ ही मिट्टी की मानव और पशु मूर्तियां भी प्राप्त हुईं। मुहम्मद ने कहा कि ये साक्ष्य 11वीं शताब्दी के मंदिर का संकेत देते हैं, जो 16वीं शताब्दी में मस्जिद के निर्माण के लिए ध्वस्त किया गया। 1990 में उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखकर इन निष्कर्षों को सार्वजनिक किया, जो उस समय विवादास्पद साबित हुआ। मुहम्मद ने स्वीकार किया कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस से वे स्तब्ध रह गए, लेकिन पुरातात्विक दृष्टि से राम मंदिर का निर्माण सही दिशा में कदम है। उन्होंने जोर दिया कि पुरातत्वविद् न तो हिंदू होते हैं न मुस्लिम, बल्कि वे वैज्ञानिक साक्ष्यों पर काम करते हैं। मुहम्मद की यह भूमिका उन्हें एक उदारवादी मुस्लिम पुरातत्वविद् के रूप में स्थापित करती है, जो धार्मिक स्थलों पर समझौते की पक्षधर रही हैं।

ज्ञानवापी मस्जिद पर मुहम्मद का बयान स्पष्ट है कि मुस्लिम समुदाय को इसे हिंदुओं को सौंप देना चाहिए, क्योंकि यह 18वीं शताब्दी की संरचना है और इसके नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय के लिए अयोध्या, काशी और मथुरा भगवान राम, शिव और कृष्ण के जन्मस्थलों के रूप में पवित्र हैं, जबकि मुस्लिमों के लिए ये केवल मस्जिदें हैं। मुहम्मद ने तुलना की कि ये स्थल हिंदुओं के लिए मक्का-मदीना के बराबर हैं, इसलिए मुस्लिम नेतृत्व को स्वेच्छा से इन्हें लौटाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो अयोध्या जैसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं, जो सांप्रदायिक तनाव बढ़ाएंगी। मुहम्मद ने हिंदू पक्ष को भी सलाह दी कि तीन स्थलों के बाद कोई नई मांग न उठाएं, ताकि अनंत विवादों का सिलसिला न बने। उन्होंने कहा कि यदि हम ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने लगें, तो यह प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होगी, जैसे केरल में बौद्ध और जैन मंदिरों का बाद में हिंदू मंदिरों में परिवर्तन।

अयोध्या विवाद पर मुहम्मद ने कम्युनिस्ट इतिहासकारों की भूमिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर बीबी लाल की खुदाई टीम ने मंदिर के अवशेष पाए, लेकिन कम्युनिस्ट इतिहासकारों जैसे इरफान हबीब ने प्रेस बयानों से मुस्लिम समुदाय को भ्रमित किया। हबीब, जो खुद पुरातत्वविद् नहीं थे, ने दावा किया कि खुदाई में कुछ नहीं मिला, जिससे मुस्लिम मॉडरेट्स का रुख कठोर हो गया। मुहम्मद ने बताया कि 1990 के दशक में मुस्लिम संगठन अयोध्या को हिंदुओं को सौंपने के पक्ष में थे, लेकिन कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने उन्हें उकसाकर मस्जिद के नीचे मंदिर के सबूतों को नकारने के लिए प्रेरित किया। इससे समझौते की संभावना खत्म हो गई, और विवाद बढ़ा। मुहम्मद ने कहा कि कम्युनिस्टों का हस्तक्षेप न केवल हिंदू-मुस्लिम कट्टरता को बढ़ावा देता है, बल्कि राष्ट्र के लिए खतरनाक साबित होता है। उन्होंने 1990 के अपने बयान का जिक्र किया, जहां उन्होंने कहा था कि अयोध्या स्थल हिंदुओं को सौंपा जाना चाहिए।

मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद पर भी मुहम्मद ने समान राय जताई, जहां उन्होंने कहा कि यह औरंगजेब द्वारा निर्मित है और इसके नीचे कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के अवशेष हो सकते हैं। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि ये दो स्थल हिंदू भावनाओं का सम्मान करते हुए लौटाए जाएं। मुहम्मद ने स्वीकार किया कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस पुरातत्वविद् के रूप में उन्हें झकझोर गया, लेकिन अयोध्या फैसले से वे पेशेवर रूप से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण वैज्ञानिक खुदाई के निष्कर्षों पर आधारित है, और इससे पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। मुहम्मद ने जोर दिया कि हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए सत्य और सुलह आवश्यक है, न कि इनकार। उन्होंने कहा कि भारत की धर्मनिरपेक्षता हिंदू बहुमत के कारण बनी हुई है, जो मुस्लिम समुदाय को सराहना चाहिए।

ज्ञानवापी विवाद की पृष्ठभूमि 1991 से जुड़ी है, जब एक याचिका में मस्जिद के सर्वे की मांग की गई थी। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद औरंगजेब द्वारा 1669 में आदि विश्वेश्वर मंदिर को ध्वस्त कर बनाई गई। सर्वे में शिवलिंग जैसी संरचना मिलने के बाद विवाद तेज हुआ। मुहम्मद ने कहा कि स्थानों की पूजा (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के बावजूद, अयोध्या अपवाद था, लेकिन ज्ञानवापी और मथुरा पर समझौता ही समाधान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुस्लिम पक्ष दावा न छोड़े, तो तनाव बढ़ेगा, और हिंदू पक्ष को नई मांगें न उठानी चाहिए। मुहम्मद ने कहा कि हिंदू विश्वास को वैज्ञानिक प्रमाणों से नहीं मापा जा सकता, क्योंकि औसत हिंदू सरल है और दर्द सहता है।

मुहम्मद ने अपनी आत्मकथा नजन एनना भारतियन में भी इन मुद्दों पर लिखा, जहां उन्होंने कम्युनिस्ट इतिहासकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने मुस्लिम चरमपंथियों का साथ दिया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी सरकार समझौते की ओर बढ़ रही थी, लेकिन कम्युनिस्टों ने इसे विफल कर दिया। मुहम्मद ने मुस्लिम मॉडरेट्स से अपील की कि वे अयोध्या विवाद को सबक मानें। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम स्वेच्छा से स्थल लौटाते, तो हिंदू-मुस्लिम एकता मजबूत होती। मुहम्मद ने वर्तमान सरकार की सांस्कृतिक नीतियों पर भी टिप्पणी की, लेकिन मुख्य फोकस पुरातात्विक साक्ष्यों पर रहा।

अयोध्या खुदाई के दौरान मुहम्मद की टीम ने मकर प्रणाली जैसे अवशेष पाए, जो मंदिर का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि 1992 के विध्वंस के बाद साक्ष्य स्पष्ट हुए। मुहम्मद ने मुस्लिम समुदाय से कहा कि वे औरंगजेब काल की संरचनाओं को छोड़ दें, क्योंकि हिंदू इन्हें स्थानांतरित नहीं कर सकते। उन्होंने केरल के उदाहरण दिए, जहां प्राचीन मंदिरों का परिवर्तन हुआ। मुहम्मद का मानना है कि तीन स्थलों तक सीमित रहना चाहिए, ताकि अनंत दावों का चक्र न बने।

यह बयान सांप्रदायिक सद्भाव की दिशा में एक प्रयास है, लेकिन विवादास्पद बना हुआ है। मुहम्मद ने कहा कि पुरातत्व सत्य को उजागर करता है, और समझौता ही स्थायी समाधान है। ज्ञानवापी सर्वे में ASI की भूमिका पर सवाल उठे हैं, लेकिन मुहम्मद ने इसे निष्पक्ष बताया। उन्होंने मुस्लिम नेतृत्व से एकजुट होकर निर्णय लेने का आग्रह किया। अयोध्या फैसले के बाद राम मंदिर पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, और मुहम्मद ने कहा कि इसी तरह ज्ञानवापी और मथुरा से लाभ होगा।

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