Trending: मुंबई की मस्जिदों में अब लाउडस्पीकर से नहीं, मोबाइल ऐप से होगी अजान। 

मुंबई, भारत की आर्थिक राजधानी, हमेशा से अपनी विविधता और तेजी से बदलते जीवनशैली के लिए जानी जाती है। लेकिन हाल के दिनों में, यहां की मस्जिदों में अज़ान ...

Jul 1, 2025 - 11:43
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Trending: मुंबई की मस्जिदों में अब लाउडस्पीकर से नहीं, मोबाइल ऐप से होगी अजान। 

मुंबई, भारत की आर्थिक राजधानी, हमेशा से अपनी विविधता और तेजी से बदलते जीवनशैली के लिए जानी जाती है। लेकिन हाल के दिनों में, यहां की मस्जिदों में अज़ान को लेकर एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय से लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर चल रहा विवाद अब एक डिजिटल समाधान की ओर बढ़ रहा है। मुंबई की कई मस्जिदों ने लाउडस्पीकर की जगह मोबाइल ऐप का सहारा लिया है, जिसके जरिए नमाज़ियों तक अज़ान की आवाज़ पहुंचाई जा रही है। यह कदम न केवल तकनीक के उपयोग का शानदार उदाहरण है, बल्कि यह सामाजिक शांति और धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है। मुंबई में लाउडस्पीकर के उपयोग पर कुछ समय से विवाद चल रहा था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने जनवरी 2025 में एक फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि किसी भी धर्म के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने शोर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू करने का निर्देश दिया। इसके बाद, मुंबई पुलिस ने धार्मिक स्थलों, खासकर मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस आयुक्त ने बताया कि शहर में करीब 1500 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं, जिससे मुंबई को "लाउडस्पीकर-मुक्त" बनाने का दावा किया गया। इस कदम से मुस्लिम समुदाय में कुछ असंतोष देखा गया, क्योंकि अज़ान नमाज़ के लिए एक महत्वपूर्ण आह्वान है। लेकिन इसके जवाब में, मुस्लिम समुदाय ने तकनीक का सहारा लेकर एक नया रास्ता चुना।

इस नए रास्ते का नाम है "ऑनलाइन अज़ान" ऐप। यह मोबाइल ऐप तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में आईटी प्रोफेशनल्स की एक टीम द्वारा विकसित किया गया है। इस ऐप के जरिए मस्जिदें अज़ान को सीधे नमाज़ियों के मोबाइल फोन पर लाइव स्ट्रीम कर सकती हैं। मुंबई की छह मस्जिदों, जिनमें माहिम जामा मस्जिद भी शामिल है, ने इस ऐप पर रजिस्टर कराया है। यह ऐप न केवल अज़ान की टाइमिंग बताता है, बल्कि मस्जिद से होने वाली अज़ान को रियल-टाइम में यूजर्स के फोन पर पहुंचाता है। यूजर्स अपने आसपास की मस्जिद को चुन सकते हैं और अज़ान की आवाज़ अपने फोन पर सुन सकते हैं। यह ऐप मुफ्त है और इसे एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर डाउनलोड किया जा सकता है।

इस ऐप को अपनाने का सबसे बड़ा कारण लाउडस्पीकर पर लगे प्रतिबंध हैं। कई मस्जिदों ने स्वेच्छा से अपने लाउडस्पीकर बंद कर दिए और कम आवाज़ वाले साउंड बॉक्स का उपयोग शुरू किया। उदाहरण के लिए, गोवंदी की मदीना मस्जिद ने लाउडस्पीकर की जगह कम आवाज़ वाले साउंड बॉक्स लगाए, जो सिर्फ मस्जिद के अंदर सुनाई देते हैं। लेकिन यह समाधान पूरी तरह से प्रभावी नहीं था, क्योंकि आसपास रहने वाले लोग अज़ान की आवाज़ सुनने में असमर्थ थे। ऐसे में "ऑनलाइन अज़ान" ऐप एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आया। माहिम जामा मस्जिद के प्रबंध ट्रस्टी फहद खलील पठान ने कहा, "हमने टकराव के बजाय नवाचार को चुना। अब नमाज़ी लाउडस्पीकर के बिना भी अज़ान की टाइमिंग से जुड़े रह सकते हैं।" पिछले कुछ दिनों में ही इस ऐप पर 500 से ज्यादा लोग रजिस्टर कर चुके हैं।

इस ऐप की खासियत यह है कि यह न केवल अज़ान की लाइव स्ट्रीमिंग करता है, बल्कि नमाज़ की टाइमिंग के लिए नोटिफिकेशन भी भेजता है। यह एक स्मार्टवॉच की तरह काम करता है, जो स्वचालित रूप से यूजर्स को नमाज़ के समय की याद दिलाता है। ऐप को इस्तेमाल करना भी आसान है। मस्जिद को रजिस्टर करने के लिए एक आवेदन पत्र, मस्जिद का पता और अज़ान देने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड जमा करना होता है। इसके बाद मस्जिद ऐप के सर्वर से जुड़ जाती है। तमिलनाडु में पहले से ही 250 मस्जिदें इस ऐप से जुड़ी हैं, और अब मुंबई में भी इसका विस्तार हो रहा है।

इस पहल को मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य लोगों ने भी सराहा है। मुंबई कांग्रेस के महासचिव आसिफ फारूकी ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा, "लाउडस्पीकर पर अज़ान देना धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, लेकिन नमाज़ अनिवार्य है। इस ऐप के जरिए हम तकनीक का उपयोग करके अपनी धार्मिक प्रथाओं को बनाए रख सकते हैं।" कई नमाज़ियों ने भी इस बदलाव की तारीफ की है। यूसुफ अंसारी, जो गोवंदी में रहते हैं, ने बताया कि मदीना मस्जिद से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर होने के बावजूद वे अज़ान की आवाज़ नहीं सुन पाते थे। अब इस ऐप की मदद से वे समय पर नमाज़ अदा कर पा रहे हैं।

यह बदलाव न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने इसे शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। एक यूजर ने लिखा, "यह तकनीक का सही इस्तेमाल है, जो विवादों को खत्म करके समाज को एकजुट करता है।" हालांकि, कुछ लोग अभी भी लाउडस्पीकर हटाने के फैसले से नाखुश हैं और इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं। फिर भी, इस डिजिटल समाधान ने बहस को एक नई दिशा दी है।

इस पूरे मामले में महाराष्ट्र सरकार और पुलिस ने भी संवेदनशीलता के साथ काम किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने धार्मिक नेताओं के साथ कई बैठकें कीं, ताकि इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल किया जा सके। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि किसी खास समुदाय को निशाना नहीं बनाया गया है, और यह नियम सभी धार्मिक स्थलों पर लागू होता है। विशेष रूप से रमज़ान जैसे पवित्र महीनों में, यह ऐप नमाज़ियों के लिए और भी उपयोगी साबित होगा, क्योंकि यह उन्हें घर बैठे अज़ान सुनने की सुविधा देता है।

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