इंदौर में बदबूदार पानी का संकट- उबालकर पीने के बावजूद 12 से अधिक मौतें, भागीरथपुरा में फैला दूषित पानी का कहर।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर, जो लगातार कई वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित होता रहा है, 2026 की शुरुआत में एक गंभीर जल संकट
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर, जो लगातार कई वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित होता रहा है, 2026 की शुरुआत में एक गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम की सप्लाई लाइन से आने वाला पानी बदबूदार, कड़वा स्वाद वाला तथा रंग में बदलाव लिए हुए पाया गया। निवासियों ने बताया कि दिसंबर के अंत से पानी में गंदगी तथा सीवर जैसी दुर्गंध आ रही थी, जिसके कारण उन्होंने पानी उबालकर पीना शुरू कर दिया। कई परिवारों ने दूध तथा अन्य उपयोग के लिए भी पानी उबालने की सलाह का पालन किया, लेकिन फिर भी दूषित पानी से फैले बैक्टीरिया संक्रमण के कारण दस्त, उल्टी तथा डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियां फैल गईं। लैब रिपोर्ट्स में पुष्टि हुई कि मुख्य पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का पानी पीने के पानी में मिल गया, जिससे बैक्टीरिया जैसे ई. कोलाई तथा अन्य सीवर बैक्टीरिया मौजूद पाए गए।
भागीरथपुरा, जो लगभग 15,000 लोगों का घनी आबादी वाला इलाका है, में यह संकट दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुआ। निवासियों ने कई दिनों से पानी की शिकायत की, जिसमें बदबू, रंग बदलना तथा कड़वाहट शामिल थी। एक परिवार ने बताया कि छह महीने के शिशु को दूध में मिलाकर उबाला पानी दिया गया, लेकिन फिर भी बच्चे की तबीयत बिगड़ गई तथा मौत हो गई। इसी तरह बुजुर्ग तथा अन्य उम्र के लोग भी प्रभावित हुए। अधिकारियों ने पुष्टि की कि लीकेज पुलिस चौकी के पास बने टॉयलेट के नीचे पाइपलाइन में हुआ, जहां सीवर का पानी बिना सुरक्षा टैंक के सीधे मिल गया। निवासियों का कहना है कि वे मजबूरी में उबालकर पानी पी रहे थे, लेकिन बैक्टीरिया इतने मजबूत थे कि उबालने से भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हुआ।
मौतों की संख्या पर आधिकारिक तथा स्थानीय रिपोर्ट्स में अंतर है। स्वास्थ्य विभाग तथा नगर निगम ने प्रारंभ में 4 मौतों की पुष्टि की, जो बाद में बढ़कर 9-10 तक पहुंच गई। स्थानीय निवासी तथा परिवारों के अनुसार 12 से अधिक मौतें हुई हैं, जिसमें 5 महीने का शिशु तथा 75 वर्ष तक के बुजुर्ग शामिल हैं। अस्पतालों में 1,400 से अधिक लोग भर्ती हुए, जिनमें 200 से ज्यादा गंभीर स्थिति में थे तथा कई आईसीयू में हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटनास्थल का दौरा किया तथा मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजा तथा मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया। जांच समिति गठित की गई तथा कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया।
कारण की जांच में पाया गया कि मुख्य नर्मदा पानी सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज था, जिसके ऊपर पुलिस चौकी का टॉयलेट बना हुआ था। टॉयलेट से निकलने वाला सीवर पानी पिट में जाकर पाइपलाइन में मिल गया। निवासियों ने दिसंबर से शिकायतें की थीं, लेकिन पाइपलाइन बदलने का टेंडर अगस्त 2025 में निकाला गया तथा काम रुका रहा। लैब रिपोर्ट्स में 26 सैंपल्स में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने लोगों को पानी उबालकर पीने, क्लोरीन टैबलेट इस्तेमाल करने तथा बोतलबंद पानी का उपयोग करने की सलाह दी।
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