छत्तीसगढ़ में 'मेडिकल सिंडिकेट' पर ED का बड़ा प्रहार; टेंडर घोटाले में 80.36 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क, शेल कंपनियों के जरिए काली कमाई का खेल।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ के चर्चित चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में निर्णायक कदम
- सरकारी खजाने पर डाका: रू.8.50 का सामान रू.2,352 में खरीदा; मेडिकल उपकरण घोटाले में ED की कार्रवाई से हड़कंप, मोक्षित कॉर्पोरेशन की संपत्तियां अटैच।
- भ्रष्टाचार की 'बीमारी' ने निगला स्वास्थ्य बजट; छत्तीसगढ़ मेडिकल कॉर्पोरेशन में हुए घोटाले की 80 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त, रसूखदारों की गर्दन पर ED का शिकंजा।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ के चर्चित चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में निर्णायक कदम उठाया है। एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत 80.36 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इन संपत्तियों में आवासीय प्लॉट, फ्लैट और औद्योगिक कारखाने शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं। यह कार्रवाई इस मामले में पहले से जब्त की गई 43 करोड़ रुपये की संपत्ति के अतिरिक्त है। अब तक इस घोटाले में कुल कुर्क और फ्रीज की गई संपत्ति का आंकड़ा लगभग 123 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो इस भ्रष्टाचार के विशाल पैमाने को दर्शाता है।
- घोटाले का तरीका: टेंडर में हेरफेर और फर्जी मांग
जांच में यह बात सामने आई है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों और अभिकर्मकों (Reagents) की खरीद में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। आरोप है कि 'मोक्षित कॉर्पोरेशन' के पार्टनर शशांक चोपड़ा ने स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी टेंडर प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया था। चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को इस तरह बदला गया कि अन्य वास्तविक कंपनियां तकनीकी आधार पर बाहर हो जाएं। इतना ही नहीं, जिन उपकरणों की अस्पतालों में जरूरत नहीं थी, उनकी भी फर्जी मांग पैदा की गई ताकि सरकारी फंड को निकाला जा सके और निजी कंपनियों को भारी-भरकम भुगतान किया जा सके।
- मुनाफे का चौंकाने वाला गणित
जांच के दौरान एक ऐसा तथ्य सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। जिस EDTA ट्यूब (रक्त संग्रह के लिए प्रयुक्त) की बाजार में कीमत महज 8.50 रुपये थी, उसे सरकार ने मोक्षित कॉर्पोरेशन से 2,352 रुपये प्रति पीस की दर से खरीदा। इसी तरह 5 लाख रुपये की सीबीसी मशीनें 17 लाख रुपये में सप्लाई की गईं।
- शेल कंपनियों और फर्जी अनुबंधों का मकड़जाल
घोटाले की कमाई को सफेद करने के लिए शशांक चोपड़ा और उसके सहयोगियों ने कई फर्जी और 'शेल' कंपनियों का सहारा लिया। ED की जांच में पाया गया कि अपराध की इस कमाई को कई स्तरों (Layering) पर घुमाया गया। इसके लिए इन शेल कंपनियों के बीच फर्जी सेवा अनुबंध (Service Agreements) तैयार किए गए, जिनमें ट्रेनिंग और मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाया गया। वास्तव में, ऐसी कोई सेवा कभी दी ही नहीं गई थी। इन फर्जी बिलों के माध्यम से कंपनियों से मोटी रकम नकद निकाली गई, जिसका उपयोग बाद में रसूखदारों को 'कमीशन' देने और बेनामी संपत्तियां खरीदने में किया गया।
- अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं की मिलीभगत
यह घोटाला केवल कुछ निजी व्यापारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी मशीनरी का एक बड़ा हिस्सा शामिल था। छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ED ने अपनी जांच शुरू की थी। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन उच्च अधिकारियों और CGMSCL के प्रबंधकों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रख दिया। टेंडर कमेटी के सदस्यों ने जानबूझकर अन्य कंपनियों को अयोग्य घोषित किया ताकि मोक्षित कॉर्पोरेशन और उसकी सहयोगी फर्मों का एकाधिकार बना रहे। इस साठगांठ के चलते राज्य के खजाने को लगभग 500 से 600 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
- जमीनी हकीकत
इस घोटाले का सबसे दुखद पहलू यह है कि करोड़ों रुपये के जो उपकरण और रसायन खरीदे गए, वे प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचे ही नहीं या फिर बिना उपयोग के ही खराब हो गए। जांच रिपोर्ट बताती है कि 411 करोड़ रुपये के परचेज ऑर्डर महज 26-27 दिनों के भीतर जारी कर दिए गए, बिना यह सोचे कि क्या इन उपकरणों को रखने के लिए पर्याप्त भंडारण क्षमता है। कई अस्पतालों में ये महंगी मशीनें धूल फांकती पाई गईं क्योंकि उन्हें चलाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा या प्रशिक्षित स्टाफ ही मौजूद नहीं था। यह स्पष्ट करता है कि खरीद का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के जरिए धन उगाही करना था।
- शशांक चोपड़ा की गिरफ्तारी
घोटाले के मुख्य सूत्रधार माने जाने वाले शशांक चोपड़ा को ED ने जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है और उससे मिली जानकारी के आधार पर ही संपत्तियों की कुर्की की जा रही है। विशेष अदालत (PMLA) में पेश किए गए दस्तावेजों में ED ने बताया है कि चोपड़ा ने किस तरह से अपराध की कमाई को अचल संपत्तियों में निवेश किया था। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई अन्य व्यवसायियों और आपूर्तिकर्ताओं के नाम भी इस मामले में जुड़ रहे हैं, जिनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं हाल ही में उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई हैं। जांच एजेंसी अब उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जो इस सिंडिकेट के शीर्ष तक जाती हैं।
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