बॉडी वॉश vs बॉडी स्क्रब- दोनों में क्या अंतर है और ग्लोइंग स्किन के लिए कब-कैसे करें इस्तेमाल?
त्वचा की देखभाल में बॉडी वॉश और बॉडी स्क्रब दोनों जरूरी हैं, लेकिन इनके काम और इस्तेमाल का तरीका अलग-अलग है। बॉडी वॉश एक साधारण
त्वचा की देखभाल में बॉडी वॉश और बॉडी स्क्रब दोनों जरूरी हैं, लेकिन इनके काम और इस्तेमाल का तरीका अलग-अलग है। बॉडी वॉश एक साधारण साबुन या शावर जेल होता है, जो रोजाना इस्तेमाल किया जाता है और त्वचा से गंदगी, पसीना, तेल और बैक्टीरिया हटाता है। यह त्वचा को साफ और ताजा रखता है, लेकिन डेड स्किन सेल्स को नहीं निकालता। वहीं बॉडी स्क्रब एक एक्सफोलिएटिंग प्रोडक्ट है, जिसमें छोटे-छोटे ग्रेन्यूल्स या केमिकल एक्सफोलिएंट्स होते हैं, जो डेड स्किन सेल्स को हटाकर त्वचा को चिकना और चमकदार बनाते हैं। स्क्रब करने से त्वचा की ऊपरी परत निकलती है, जिससे पोर्स खुलते हैं, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और बाद में लगाए जाने वाले मॉइश्चराइजर या बॉडी लोशन बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं। दोनों प्रोडक्ट्स का सही समय पर इस्तेमाल करने से त्वचा हेल्दी, सॉफ्ट और ग्लोइंग रहती है।
बॉडी वॉश का मुख्य काम त्वचा को साफ करना है। यह हल्के सरफेक्टेंट्स से बना होता है, जो गंदगी और तेल को घोलकर पानी के साथ बहा देता है। रोजाना नहाते समय बॉडी वॉश या शावर जेल का इस्तेमाल करना चाहिए, खासकर सुबह और शाम दोनों समय। यह त्वचा को ड्राई नहीं करता, बल्कि उसकी नमी बनाए रखने में मदद करता है। हाइड्रेटिंग बॉडी वॉश में ग्लिसरीन, एलोवेरा या हयालुरोनिक एसिड जैसे तत्व होते हैं, जो नहाने के बाद भी त्वचा को नरम रखते हैं। अगर त्वचा बहुत ऑयली है तो क्लींजिंग बॉडी वॉश में सैलिसिलिक एसिड या टी ट्री ऑयल हो सकता है, जो एक्ने को कम करता है। सामान्य से ड्राई स्किन वाले लोगों को क्रीमी या ऑयल बेस्ड बॉडी वॉश चुनना चाहिए। बॉडी वॉश को लूफा, वॉशक्लॉथ या हाथों से लगाया जा सकता है, लेकिन रोजाना इस्तेमाल के लिए हल्के दबाव के साथ मसाज करना काफी है।
बॉडी स्क्रब का काम एक्सफोलिएशन करना है। इसमें फिजिकल ग्रेन्यूल्स जैसे शुगर, सॉल्ट, कॉफी, ओटमील या जोजोबा बीड्स होते हैं, या फिर केमिकल एक्सफोलिएंट्स जैसे लैक्टिक एसिड, ग्लाइकोलिक एसिड या एंजाइम्स। फिजिकल स्क्रब त्वचा पर हल्की रगड़ से डेड सेल्स हटाते हैं, जबकि केमिकल स्क्रब बिना रगड़े ही डेड सेल्स को घोल देते हैं। स्क्रब करने से त्वचा की टेक्सचर सुधरती है, इनग्रोन हेयर की समस्या कम होती है और सेल टर्नओवर तेज होता है। हफ्ते में 2 से 3 बार स्क्रब करना पर्याप्त है। ज्यादा बार करने से त्वचा पतली या इरिटेट हो सकती है। सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को केमिकल स्क्रब या बहुत फाइन ग्रेन्यूल्स वाला स्क्रब चुनना चाहिए। स्क्रब हमेशा गीली त्वचा पर लगाएं, हल्के गोलाकार मोशन में 1-2 मिनट मसाज करें और फिर अच्छे से धो लें।
दोनों प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल एक ही रूटीन में किया जा सकता है, लेकिन सही क्रम जरूरी है। पहले बॉडी वॉश से त्वचा को साफ करें, फिर बॉडी स्क्रब लगाएं। स्क्रब करने के बाद फिर से हल्के बॉडी वॉश से धो लें ताकि ग्रेन्यूल्स की रगड़ पूरी तरह निकल जाए। इसके बाद मॉइश्चराइजर या बॉडी लोशन लगाएं, क्योंकि एक्सफोलिएशन के बाद त्वचा नमी को बेहतर तरीके से सोखती है। अगर स्क्रब करने के दिन त्वचा बहुत ड्राई लग रही है तो हाइड्रेटिंग बॉडी वॉश चुनें। गर्मियों में ऑयल कंट्रोलिंग या कूलिंग स्क्रब अच्छा रहता है, जबकि सर्दियों में क्रीमी या शुगर बेस्ड स्क्रब जो त्वचा को ड्राई न करे। बहुत गर्म पानी से नहाने से बचें, क्योंकि यह त्वचा की नमी छीन लेता है।
त्वचा के प्रकार के अनुसार चुनाव करें। ऑयली स्किन वालों को सैल्ट बेस्ड या सैलिसिलिक एसिड वाला स्क्रब हफ्ते में 3 बार सूट करता है। ड्राई स्किन वालों को शुगर या क्रीम बेस्ड स्क्रब हफ्ते में 1-2 बार ही इस्तेमाल करना चाहिए। सेंसिटिव स्किन वालों को एंजाइम बेस्ड या बहुत फाइन ग्रेन्यूल्स वाला स्क्रब चुनना चाहिए और पैच टेस्ट जरूर करें। कॉम्बिनेशन स्किन वालों को टी ज़ोन पर ज्यादा और गालों पर हल्का स्क्रब करना चाहिए। प्रेग्नेंसी में केमिकल एक्सफोलिएंट्स से बचें और केवल फिजिकल माइल्ड स्क्रब यूज करें। बच्चों की त्वचा पर स्क्रब बिल्कुल न करें। अगर त्वचा पर घाव, सनबर्न या रैशेज हैं तो स्क्रब न करें।
स्क्रब करने के बाद त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगाना बहुत जरूरी है, क्योंकि एक्सफोलिएशन के बाद त्वचा थोड़ी संवेदनशील हो जाती है। बॉडी ऑयल, शिया बटर या सेरामाइड युक्त लोशन सबसे अच्छे रहते हैं। स्क्रब के बाद 24 घंटे तक डियोडरेंट या परफ्यूम सीधे अंडरआर्म्स पर न लगाएं। सनस्क्रीन भी जरूर लगाएं, क्योंकि नई त्वचा सूरज के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती है। घर पर भी स्क्रब बनाया जा सकता है, जैसे शुगर + ऑलिव ऑयल, कॉफी + नारियल तेल या ओटमील + शहद। लेकिन तैयार प्रोडक्ट्स में पीएच बैलेंस और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जो लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
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