'करियर लंबा चले तो लोग बहुत कुछ कहेंगे...', जीत के बाद इस युवा बल्लेबाज ने बयान से जीता सबका दिल।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी सबसे कम उम्र में अपनी छाप छोड़ने वाले खिलाड़ियों का जिक्र होगा, उसमें वैभव सूर्यवंशी

May 20, 2026 - 11:51
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'करियर लंबा चले तो लोग बहुत कुछ कहेंगे...', जीत के बाद इस युवा बल्लेबाज ने बयान से जीता सबका दिल।
'करियर लंबा चले तो लोग बहुत कुछ कहेंगे...', जीत के बाद इस युवा बल्लेबाज ने बयान से जीता सबका दिल।
  • 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का जयपुर में ऐतिहासिक धमाका, लखनऊ के खिलाफ खेली 93 रनों की विस्फोटक पारी
  • रिकॉर्ड तोड़ पारी और अनोखे जश्न पर बोले राजस्थान के युवा सनसनी, अखबारों और तारीफों से बनाई दूरी

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी सबसे कम उम्र में अपनी छाप छोड़ने वाले खिलाड़ियों का जिक्र होगा, उसमें वैभव सूर्यवंशी का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले गए एक बेहद रोमांचक मुकाबले में लखनऊ के खिलाफ राजस्थान की टीम ने 221 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े सूत्रधार रहे महज 15 साल के युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने अपनी आतिशी बल्लेबाजी से विरोधी टीम के गेंदबाजों को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया। मैच के बाद अपनी इस अविश्वसनीय पारी और चारों तरफ हो रही तारीफों पर बात करते हुए इस युवा खिलाड़ी ने एक ऐसा परिपक्व बयान दिया, जिसने उनकी बल्लेबाजी की तरह ही सबको प्रभावित किया। वैभव ने कहा कि करियर लंबा चले तो लोग बहुत कुछ कहेंगे, इसलिए उनका पूरा ध्यान बाहरी बातों पर न होकर केवल अपने खेल पर केंद्रित है।

लखनऊ के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में राजस्थान की टीम के सामने प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए इस बड़े लक्ष्य को हासिल करना बेहद जरूरी था। मैच की शुरुआत में वैभव सूर्यवंशी ने थोड़ा समय लिया और पहली 10 गेंदों पर केवल 5 रन ही बना सके थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने जो गियर बदला, उसने स्टेडियम में मौजूद हर दर्शक को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने इसके बाद की सिर्फ 28 गेंदों में 88 रन कूट डाले और कुल 38 गेंदों में 93 रनों की एक ऐसी तूफानी पारी खेली जिसने मैच का रुख पूरी तरह से राजस्थान की तरफ मोड़ दिया। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने मैदान के हर कोने में चौके और छक्के लगाए, जिसमें कुल 7 चौके और 10 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। जब वे आउट होकर पवेलियन लौट रहे थे, तब पूरा स्टेडियम खड़े होकर इस युवा खिलाड़ी के सम्मान में तालियां बजा रहा था।

मैच खत्म होने के बाद जब पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान वैभव सूर्यवंशी से उनकी इस ताबड़तोड़ बल्लेबाजी और उनके भविष्य को लेकर पूछे गए सवालों पर बात की गई, तो उनका जवाब बेहद जमीन से जुड़ा हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह के अखबार, मीडिया रिपोर्ट्स या सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं को बिल्कुल नहीं पढ़ते हैं और न ही उन पर ध्यान देते हैं। उनका मानना है कि यह तो सिर्फ उनके सफर की शुरुआत है और आगे एक बहुत लंबा करियर पड़ा हुआ है। जब कोई खिलाड़ी एक लंबा सफर तय करता है, तो उसके बारे में अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातें की जाती हैं, इसलिए इन सब चीजों से प्रभावित हुए बिना लगातार अपने खेल में सुधार करना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। एक 15 साल के खिलाड़ी के मुंह से इतनी बड़ी और गंभीर बात सुनकर हर कोई उनकी सोच का मुरीद हो गया।

मैच का टर्निंग पॉइंट

पारी के नौवें ओवर में जब लखनऊ के गेंदबाज के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए एक ही ओवर में 26 रन बटोरे, तो वहां से रनों की गति इतनी तेज हो गई कि विरोधी कप्तान के पास फील्डिंग बदलने या रणनीति बनाने का कोई मौका नहीं बचा। इसके बाद दसवें ओवर में उन्होंने महज 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जो इस सीजन का उनका सबसे धीमा अर्धशतक भी था।

इस मैच के दौरान जब वैभव सूर्यवंशी ने अपना अर्धशतक पूरा किया, तो उन्होंने एक बेहद अनोखा और अलग तरह का जश्न मनाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया। उन्होंने अपनी उंगलियों से अंग्रेजी के 'A' अक्षर जैसा एक संकेत बनाया और उसे अपनी टीम के डगआउट की तरफ दिखाया। जब उनसे इस खास तरह के जश्न के पीछे की वजह पूछी गई, तो उन्होंने बड़े ही मासूमियत से बताया कि वे हर मैच में कुछ न कुछ नया करने की कोशिश करते हैं और इसका कोई पहले से तय प्लान नहीं होता है। हालांकि, बाद में यह बात सामने आई कि उन्होंने यह खास अर्धशतक अपनी मां को समर्पित किया था, जिनका नाम 'A' अक्षर से शुरू होता है। वे इस जश्न को गुप्त रखना चाहते थे ताकि इसे किसी की नजर न लगे, लेकिन आखिरकार उन्होंने अपनी मां के प्रति इस विशेष प्रेम को सबके सामने साझा कर ही दिया।

इस पारी के साथ ही वैभव सूर्यवंशी ने इस प्रतिष्ठित टी20 लीग में कई बड़े और ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं, जो उनकी अद्भुत क्षमता को दर्शाते हैं। वे इस लीग के किसी एक सीजन में 500 रनों का आंकड़ा पार करने वाले इतिहास के सबसे युवा बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड 20 साल की उम्र में बनाने वाले एक अन्य विकेटकीपर बल्लेबाज के नाम दर्ज था, जिसे वैभव ने महज 15 साल की उम्र में ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही, वैभव सूर्यवंशी ने इस सीजन में एक भारतीय बल्लेबाज के रूप में 50 से अधिक छक्के लगाने का एक अनोखा कीर्तिमान भी स्थापित किया है। उनका स्ट्राइक रेट इस समय इस सीजन में सबसे बेहतरीन चल रहा है, जो यह साबित करता है कि वे सिर्फ रन नहीं बना रहे हैं बल्कि विरोधी टीमों के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह तहस-नहस कर रहे हैं।

राजस्थान की टीम के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास थी क्योंकि उनकी गेंदबाजी इकाई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ को 220 रनों के विशाल स्कोर तक पहुंचने दिया था। लखनऊ की ओर से सलामी बल्लेबाजों ने पावरप्ले का भरपूर फायदा उठाया और पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर टीम को एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया था। इस सीजन में यह आठवां मौका था जब राजस्थान की टीम ने अपनी गेंदबाजी के दौरान 200 से अधिक रन लुटाए थे, जो उनकी टीम के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ था। ऐसे में इतने बड़े मानसिक दबाव के बीच आकर इस 15 साल के युवा ने जिस निडरता के साथ बल्लेबाजी की, उसने टीम के बाकी अनुभवी बल्लेबाजों जैसे जितेश शर्मा को भी प्रेरित किया, जिन्होंने अंत तक टिककर टीम को 7 विकेट से जीत दिला दी।

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