इथियोपिया का डैलोल: पानी तेजाब, हवा जहर, धरती का 'दूसरा ग्रह' जैसा सबसे खतरनाक इलाका

डैलोल में हाइड्रोथर्मल स्प्रिंग्स से निकलने वाला पानी अत्यधिक अम्लीय है। औसत pH स्तर 0.2 है, जो प्राकृतिक वातावरण में लगभग असंभव है। यह बैटरी एसिड (pH 1.0) से भी अ

Feb 15, 2026 - 11:02
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इथियोपिया का डैलोल: पानी तेजाब, हवा जहर, धरती का 'दूसरा ग्रह' जैसा सबसे खतरनाक इलाका
इथियोपिया का डैलोल: पानी तेजाब, हवा जहर, धरती का 'दूसरा ग्रह' जैसा सबसे खतरनाक इलाका

  • डैनाकिल डिप्रेशन का डैलोल: अम्लीय पानी, जहरीली गैसें और मंगल जैसा एलियन लैंडस्केप
  • धरती पर मंगल जैसा वातावरण: डैलोल में तेजाबी पानी और जहरीली हवा का खौफनाक मंजर

इथियोपिया के डैनाकिल डिप्रेशन में स्थित डैलोल क्षेत्र धरती पर एक ऐसी जगह है जो अन्य ग्रहों जैसी दिखाई देती है। यहां पानी अत्यधिक अम्लीय हो जाता है, हवा में जहरीली गैसें घुली रहती हैं और जमीन के नीचे उबलते रासायनिक पदार्थ कभी भी बाहर निकल सकते हैं। वैज्ञानिक इसे धरती का सबसे चरम और खतरनाक इलाका मानते हैं, जहां का वातावरण मंगल ग्रह जैसा लगता है।

इथियोपिया के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित डैनाकिल डिप्रेशन अफ्रीका का सबसे निचला और सबसे गर्म इलाका है। यह क्षेत्र समुद्र तल से 125 मीटर से अधिक नीचे है और डैनाकिल डिप्रेशन के उत्तरी भाग में डैलोल हाइड्रोथर्मल सिस्टम स्थित है। डैलोल एक प्रोटोवॉल्केनो या सिंडर कोन वॉल्केनो के आसपास का हाइड्रोथर्मल क्षेत्र है, जो एर्टा एले रेंज के उत्तर-पूर्व में है।

यह क्षेत्र धरती पर सबसे गर्म स्थानों में से एक है। औसत दैनिक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है, जबकि गर्मियों में यह 45 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाता है। कुछ रिपोर्टों में 55 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान दर्ज किया गया है। वार्षिक वर्षा बहुत कम है, मात्र 100-200 मिलीमीटर या उससे भी कम, जो इसे हाइपरएरिड जलवायु क्षेत्र बनाता है।

डैलोल में हाइड्रोथर्मल स्प्रिंग्स से निकलने वाला पानी अत्यधिक अम्लीय है। औसत pH स्तर 0.2 है, जो प्राकृतिक वातावरण में लगभग असंभव है। यह बैटरी एसिड (pH 1.0) से भी अधिक अम्लीय है और नींबू के रस (pH 2.4) से कहीं ज्यादा। पानी का तापमान 108 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होता है। यह हाइपरसलाइन है, समुद्र की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक नमकीन, और इसमें 26 ग्राम प्रति लीटर से अधिक आयरन घुला होता है।

यहां के स्प्रिंग्स एनॉक्सिक (ऑक्सीजन रहित), हाइपरएसिडिक और हाइपरसलाइन ब्राइन छोड़ते हैं। रंगीन पूल्स हरे, पीले, नारंगी और अन्य चटकीले रंगों से भरे होते हैं, जो आयरन, सल्फर और अन्य खनिजों के कारण बनते हैं। ये रंग आयरन के ऑक्सीडेशन और अन्य रासायनिक प्रक्रियाओं से आते हैं। हवा में जहरीली गैसें घुली रहती हैं। मुख्य गैसों में क्लोरीन, सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन डाइऑक्साइड शामिल हैं। ये गैसें हवा में विषाक्त वाष्प बनाती हैं, जो सांस लेने में जलन पैदा करती हैं और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। क्षेत्र में सल्फर और क्लोरीन की गंध बहुत तेज होती है, जो सड़ते अंडे और जंग जैसी लगती है।

जमीन के नीचे मैग्मा निकट सतह पर है, जिससे उबलते रासायनिक पदार्थ और गैसें निकलती हैं। क्षेत्र में सक्रिय ज्वालामुखी हैं, जैसे एर्टा एले, जिसमें लावा लेक है। डैलोल में गीजर, एसिड पूल्स और फ्यूमरोल्स हैं। कभी-कभी जमीन से गैसें फूटती हैं और खतरनाक स्थिति पैदा करती हैं। यह क्षेत्र जीवन के लिए अत्यंत प्रतिकूल है। अधिकांश जगहों पर कोई जीवन नहीं पाया जाता, विशेषकर सबसे चरम पूल्स में जहां pH नकारात्मक स्तर तक पहुंचता है और मैग्नीशियम साल्ट्स अधिक होते हैं। हालांकि कुछ अध्ययनों में एक्स्ट्रीमोफाइल माइक्रोब्स पाए गए हैं, लेकिन सबसे जहरीले और अम्लीय पूल्स में कोई डीएनए या जीवन के निशान नहीं मिले।

डैनाकिल डिप्रेशन में नमक खनन होता है और कुछ स्थानीय लोग काम करते हैं। वैज्ञानिक यहां जीवन की सीमाओं का अध्ययन करते हैं, क्योंकि यह मंगल और टाइटन जैसे ग्रहों के वातावरण से मिलता-जुलता है। क्षेत्र को 'गेटवे टू हेल' कहा जाता है। डैलोल का लैंडस्केप एलियन जैसा है - रंग-बिरंगे पूल्स, नमक की संरचनाएं, स्टीमिंग फिशर्स और क्रैक्ड अर्थ। यह धरती पर सबसे खतरनाक और चरम स्थानों में से एक है, जहां मानव बिना सुरक्षा के ज्यादा समय नहीं टिक सकता।

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