14 अप्रैल 2026: दिल्ली-मुंबई से लखनऊ-कोलकाता तक पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव, आम आदमी पर क्या असर?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कई दिनों से लगातार स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
आज 14 अप्रैल 2026 को पूरे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कई दिनों से लगातार स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, कानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, आगरा, हरदोई, कोलकाता, पुणे, मुंबई, असम, चेन्नई, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख शहरों और राज्यों में आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतें पहले की तरह ही हैं। यह स्थिरता आम आदमी, व्यापारियों, किसानों और परिवहन क्षेत्र के लिए राहत की बात है क्योंकि ईंधन की कीमतों में किसी भी छोटे उतार-चढ़ाव का सीधा असर दैनिक जीवन पर पड़ता है।
नीचे दी गई तालिका में सभी उल्लिखित जगहों के पेट्रोल और डीजल के भाव स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। ये भाव भरोसेमंद स्रोतों से सत्यापित हैं और आज सुबह 6 बजे तक के नवीनतम अपडेट पर आधारित हैं। कीमतें प्रति लीटर रुपये में हैं और इसमें सभी कर शामिल हैं।
| जगह | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| नोएडा | 94.77 | 88.01 |
| लखनऊ | 94.73 | 87.81 |
| कानपुर | 94.72 | 87.83 |
| बरेली | 94.80 | 88.21 |
| शाहजहांपुर | 94.65 | 87.76 |
| बाराबंकी | 94.81 | 88.13 |
| मुरादाबाद | 95.20 | 88.36 |
| आगरा | 94.53 | 87.60 |
| हरदोई | 94.85 | 87.99 |
| कोलकाता | 105.41 | 92.02 |
| पुणे | 104.39 | 90.50 |
| मुंबई | 103.54 | 90.03 |
| असम (गुवाहाटी) | 98.93 | 89.46 |
| चेन्नई | 100.80 | 92.61 |
| तमिलनाडु | 102.09 | 92.39 |
| मध्य प्रदेश | 107.45 | 91.80 |
| राजस्थान | 105.92 | 90.21 |
उत्तर प्रदेश के शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, आगरा, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, हरदोई में पेट्रोल औसतन 94.70 रुपये और डीजल 87.80 रुपये के आसपास है। इन शहरों में किसान ट्रैक्टर चलाते हैं, छोटे व्यापारी सामान लाते-ले जाते हैं और दैनिक मजदूर बस या ऑटो से यात्रा करते हैं। अगर कीमतें 1-2 रुपये भी बढ़ जातीं तो सब्जी, दूध और किराने की कीमतें आसमान छू जातीं। लेकिन स्थिरता ने बाजार को संतुलित रखा है। नोएडा दिल्ली के करीब होने से कीमतें लगभग समान हैं लेकिन थोड़ा अंतर टैक्स के कारण है। दिल्ली में कम टैक्स होने से यहां कीमतें थोड़ी सस्ती हैं जो NCR क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए फायदेमंद है। कोलकाता में पेट्रोल 105.41 रुपये और डीजल 92.02 रुपये पर पहुंच गया है। यहां की उच्च कीमतें मुख्य रूप से राज्य सरकार के कर और बंदरगाह से दूर होने के कारण हैं। कोलकाता के व्यापारिक इलाकों, हावड़ा ब्रिज के आसपास और पूर्वी भारत के परिवहन में इसका सीधा असर दिखता है। पुणे और मुंबई महाराष्ट्र के आर्थिक केंद्र हैं जहां उद्योग, आईटी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र सक्रिय हैं। मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये है जो देश के सबसे महंगे शहरों में से एक है। पुणे में भी लगभग समान स्थिति है। इन शहरों में ऑफिस जाने वाले लोग, डिलीवरी बॉय और फैक्ट्री वर्कर्स रोजाना सैकड़ों रुपये ईंधन पर खर्च करते हैं।
असम में गुवाहाटी क्षेत्र में पेट्रोल 98.93 रुपये और डीजल 89.46 रुपये है। पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद कीमतें नियंत्रित हैं। चेन्नई और तमिलनाडु में पेट्रोल 100.80 से 102.09 रुपये और डीजल 92.39 से 92.61 रुपये के बीच है। दक्षिण भारत में औद्योगिक गतिविधि अधिक होने से ईंधन की मांग ज्यादा है लेकिन कीमतें अभी भी संतुलित हैं। मध्य प्रदेश में पेट्रोल 107.45 रुपये और डीजल 91.80 रुपये है। यहां कृषि प्रधान क्षेत्र होने से किसान डीजल पर निर्भर हैं। राजस्थान में पेट्रोल 105.92 रुपये और डीजल 90.21 रुपये (जयपुर के आसपास) है जहां रेगिस्तानी इलाकों में लंबी दूरी की यात्रा आम है। ईंधन की कीमतें कैसे तय होती हैं? यह एक जटिल प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल खरीदा जाता है, फिर उसे रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है। उसके बाद एक्साइज ड्यूटी, वैट, डीलर कमीशन और अन्य टैक्स जोड़े जाते हैं। कुल मिलाकर 50 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स होता है। इसलिए छोटे बदलाव भी बड़ा असर डालते हैं। लेकिन इस बार तेल कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखकर उपभोक्ताओं को संतुलन दिया है।
इस स्थिरता का अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? परिवहन लागत स्थिर रहने से माल ढुलाई सस्ती हुई है। सब्जी-फल, दूध और अन्य जरूरी सामान की कीमतें नहीं बढ़ीं। किसानों को ट्रैक्टर चलाने में कम खर्च आ रहा है। शहरों में टैक्सी और ऑटो रिक्शा वाले अपनी कमाई बचा पा रहे हैं। मध्यम वर्ग के परिवारों को पेट्रोल पंप पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा। इससे मुद्रास्फीति भी नियंत्रित है। लेकिन अगर भविष्य में कच्चा तेल 110 डॉलर के पार चला गया तो कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार की नीतियां भी यहां महत्वपूर्ण हैं। विगत वर्षों में ईंधन की कीमतों को बाजार के अनुसार तय करने की व्यवस्था लागू की गई जिससे रोजाना अपडेट होता है। इससे काला बाजार रुका और पारदर्शिता आई। साथ ही कुछ राज्यों में वैट कम करके राहत दी जाती है। दिल्ली में कम टैक्स की वजह से कीमतें सस्ती हैं जबकि कुछ अन्य राज्यों में अधिक टैक्स से महंगाई है। आम आदमी को क्या सलाह? ईंधन बचाने के लिए कार पूलिंग करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाएं, सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करें। छोटे बदलाव जैसे एसी बंद रखना, सही टायर प्रेशर, नियमित सर्विसिंग से 10-15 प्रतिशत ईंधन बच सकता है। लंबे समय में सौर ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे विकल्प भी सामने आ रहे हैं।
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