US Fiscal Transparency Report: अमेरिका सख्त, पाकिस्तान की सेना और ISI के गुप्त खर्चों पर मांगा सार्वजनिक हिसाब 

US Fiscal Transparency Report 2026: अमेरिका ने पाकिस्तान से अपनी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के खर्च को संसदीय निगरानी के दायरे में लाने और सरकारी कर्ज उजागर करने को कहा।

Aug 12, 2026 - 12:05
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US Fiscal Transparency Report: अमेरिका सख्त, पाकिस्तान की सेना और ISI के गुप्त खर्चों पर मांगा सार्वजनिक हिसाब 
US Fiscal Transparency Report Pakistan Military
  • US Asks Pakistan Military Oversight: पाक सेना और ISI के बजट पर अमेरिकी नकेल, संसदीय निगरानी में लाने की सिफारिश 
  • सेना और ISI के गुप्त खर्चों का दो हिसाब! अमेरिका ने पाकिस्तान की वित्तीय पारदर्शिता पर उठाए सवाल, संसद के दायरे में लाने की मांग 
  • US Tightens Screws On Pakistan: अमेरिकी विदेश विभाग का बड़ा कदम, पाकिस्तान सेना और ISI के रक्षा बजट का मांगा लेखा-जोखा

अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी वार्षिक 'फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट 2026' में पाकिस्तान के वित्तीय प्रबंधन और बजट पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वाशिंगटन में जारी इस आधिकारिक समीक्षा में अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार से स्पष्ट सिफारिश की है कि वह अपनी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के खर्चों को संसदीय या नागरिक निगरानी के दायरे में लाए। इसके साथ ही रिपोर्ट में पाकिस्तान पर सरकारी कर्ज, प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों (SOEs) की देनदारियों और कार्यकारी बजट प्रस्तावों को समय पर सार्वजनिक न करने को लेकर चिंता जताई गई है। वैश्विक वित्तीय विश्वसनीयता हासिल करने के लिए वाशिंगटन ने इस्लामाबाद को रक्षा एवं खुफिया प्राथमिकताओं में पारदर्शिता बढ़ाने की कड़ी सलाह दी है।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा वर्ष 2026 के लिए जारी 'राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट' (Fiscal Transparency Report 2026) में दुनिया भर के देशों के बजटीय प्रबंधन की समीक्षा की गई है। इस वैश्विक मूल्यांकन में पाकिस्तान के वित्तीय तंत्र में मौजूद कई कमियों को रेखांकित किया गया। अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि पाकिस्तान में रक्षा और खुफिया एजेंसियों का बजट नागरिक या संसदीय समीक्षा से बाहर रहता है, जो पारदर्शी शासन व्यवस्था के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। वाशिंगटन ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह अपने सैन्य खर्च, सार्वजनिक ऋण और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़ी देनदारियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करे।

अमेरिकी विदेश विभाग की इस वार्षिक रिपोर्ट में 140 से अधिक देशों की वित्तीय प्रक्रियाओं, पारदर्शी बजट प्रकाशन, सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन और ऑडिट व्यवस्था का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाता है। पाकिस्तान के संदर्भ में रिपोर्ट ने यह स्वीकार किया कि देश का पारित बजट और साल के अंत की वित्तीय रिपोर्ट जनता के लिए आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हैं और वहां का सर्वोच्च लेखापरीक्षक संस्थान (SAI) अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता मानकों को पूरा करता है।

इसके बावजूद, रिपोर्ट में तीन प्रमुख खामियों पर सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया गया है। पहला, पाकिस्तानी सेना और उसकी गुप्तचर संस्था ISI के बजट पर संसद या किसी नागरिक संस्था की कोई प्रभावी जवाबदेही नहीं है। दूसरा, सरकार अपना 'एग्जीक्यूटिव बजट प्रपोजल' (कार्यकारी बजट प्रस्ताव) उचित और पर्याप्त समयसीमा के भीतर जारी करने में विफल रही है, जिससे सांसदों और नागरिक समाज को बजटीय आवंटन पर गहन बहस का अवसर नहीं मिलता। तीसरा, राज्य के स्वामित्व वाले बड़े उद्यमों (SOEs) पर मौजूद भारी वित्तीय देनदारियों और सरकारी ऋण के ब्योरे को पूरी तरह उजागर नहीं किया गया है। 

अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहायता, ऋण और द्विपक्षीय वित्तीय संबंधों के निष्पक्ष संचालन के लिए करदाताओं के पैसे की पारदर्शिता सुनिश्चित होना अनिवार्य है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि यदि पाकिस्तान वैश्विक वित्तीय संस्थानों और सहयोगियों का विश्वास मजबूत करना चाहता है, तो उसे सैन्य बजट की नागरिक समीक्षा शुरू करनी चाहिए।

फिलहाल इस्लामाबाद और पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय की ओर से इस रिपोर्ट पर आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है। हालांकि, पाकिस्तान के सुरक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सेना के खर्च को ऐतिहासिक रूप से 'संवेदनशील और रणनीतिक' मानकर गुप्त रखा जाता रहा है। रक्षा विश्लेषकों का तर्क है कि पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों से जूझ रहा है, ऐसे में अमेरिकी विदेश विभाग की यह सिफारिश पाकिस्तान की नागरिक सरकार पर और अधिक प्रशासनिक दबाव बढ़ाएगी।

पाकिस्तान में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वहां का रक्षा बजट देश के कुल राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा डकार जाता है, जबकि नागरिक कल्याण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को बहुत कम धनराशि मिलती है। अमेरिकी रिपोर्ट के बाद अब पाकिस्तानी संसद और नागरिक समाज के भीतर सैन्य खर्चों के ऑडिट की मांग को नया बल मिल सकता है।

इसके अलावा, वैश्विक वित्तीय मंचों जैसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के समक्ष भी पाकिस्तान की साख पर इसका असर पड़ेगा। विदेश से मिलने वाली वित्तीय सहायता और नए ऋणों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान पर अपने सार्वजनिक ऋण का पारदर्शी लेखा-जोखा देने का दबाव बढ़ा सकता है। अमेरिका द्वारा जारी इन सिफारिशों के बाद अब गेंद पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के पाले में है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पाकिस्तान की नागरिक सरकार सेना और आईएसआई को अपने बजट का ब्योरा संसद के सामने प्रस्तुत करने के लिए राजी कर पाती है या नहीं। यदि पाकिस्तान इन सुधारों को लागू करने में आनाकानी करता है, तो भविष्य में अमेरिका से मिलने वाली गैर-सैन्य सहायता और वित्तीय मदद की समीक्षा के दौरान यह मुद्दा एक प्रमुख शर्त के रूप में उभर सकता है।

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