Noida Airport Connectivity: जेवर एयरपोर्ट के लिए 4000 करोड़ से बनेगा 6 लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे, दिल्ली से दूरी होगी महज एक घंटा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक तेज कनेक्टिविटी के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत से 6 लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनेगा। दिल्ली से एयरपोर्ट का सफर सवा घंटे में तय होगा।

- जेवर एयरपोर्ट तक का सफर होगा सुगम: 6 लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे परियोजना को गति, नोएडा के जाम से मिलेगी मुक्ति
- Delhi to Jewar Airport: करीब 4 हजार करोड़ की लागत से बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर, सवा घंटे में पूरा होगा सफर
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए नया एक्सप्रेसवे प्लान: एलिवेटेड रूट से सीधे जुड़ेंगे यात्री, एनसीआर कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार
ग्रेटर नोएडा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सबसे महत्वाकांक्षी ढांचागत परियोजनाओं में शुमार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक निर्बाध, तेज और सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक विशाल सड़क संपर्क परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है। राजधानी दिल्ली और एनसीआर के विभिन्न हिस्सों से जेवर स्थित हवाई अड्डे तक पहुंचने वाले यात्रियों के सफर को सुगम बनाने के उद्देश्य से लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 6 लेन का अत्याधुनिक एलिवेटेड एक्सप्रेसवे निर्मित किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य यात्रियों को स्थानीय शहरी यातायात के भारी दबाव से पूरी तरह मुक्त करते हुए एक हाई-स्पीड समर्पित कॉरिडोर उपलब्ध कराना है।
वर्तमान यातायात अनुमानों के अनुसार, इस नए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के धरातल पर उतरने और पूर्ण रूप से क्रियाशील होने के बाद दिल्ली के प्रमुख केंद्रों से जेवर एयरपोर्ट की दूरी तय करने में केवल एक घंटे से सवा घंटे के आसपास का समय लगेगा। अभी तक पीक आवर्स के दौरान कालिंदी कुंज, डीएनडी फ्लाईओवर, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और स्थानीय चौराहों पर लगने वाले भीषण जाम के कारण यात्रियों को हवाई अड्डे तक पहुंचने में भारी अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था। यह नया एलिवेटेड ढांचा यात्रियों को जमीन की सतह पर होने वाले स्थानीय ट्रैफिक से ऊपर उठाकर सीधे एयरपोर्ट टर्मिनल की अप्रोच रोड से जोड़ेगा।
- 4,000 करोड़ रुपये का निवेश और इंजीनियरिंग ढांचा
परियोजना के वित्तीय और तकनीकी प्रारूप के मुताबिक, इस 6 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण पर करीब 4,000 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों पर आधारित इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह एक्सेस-नियंत्रित (Access-Controlled) बनाया जाएगा, ताकि लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों की औसत गति किसी भी बिंदु पर बाधित न हो।
छह लेन की चौड़ाई होने के कारण दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन का समर्पित ट्रैफिक फ्लो रहेगा, जिससे भारी और हल्के यात्री वाहनों का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। इसके दोनों ओर सुरक्षा की दृष्टि से क्रैश बैरियर, उन्नत निगरानी के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (आईटीएस), हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे और स्वचालित टोलिंग की तकनीक स्थापित की जाएगी। मार्ग पर जलभराव रोकने के लिए वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम और पर्यावरण के अनुकूल एलईडी लाइटिंग व्यवस्था भी इस बुनियादी ढांचे का प्रमुख हिस्सा होगी।
- नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के दबाव को करेगा कम
वर्तमान में नोएडा से जेवर की ओर जाने वाला अधिकांश यातायात मौजूदा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और उसके बाद यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आवागमन करता है। बीते कुछ वर्षों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रिहायशी सेक्टरों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तरों और शैक्षणिक संस्थानों के तेजी से विकसित होने के कारण इस मार्ग पर स्थानीय वाहनों का अत्यधिक दबाव बन चुका है।
ऐसे में यदि भविष्य में एयरपोर्ट का नियमित यात्री और कार्गो ट्रैफिक भी इसी मार्ग से गुजरता, तो यह मार्ग पूरी तरह जाम की चपेट में आ सकता था। नया 6 लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनने से न केवल एयरपोर्ट की ओर जाने वाले यात्रियों को बाईपास का विकल्प मिलेगा, बल्कि नोएडा के भीतरी मार्गों पर चलने वाले दैनिक कामकाजी नागरिकों को भी भारी राहत पहुंचेगी। यह एलिवेटेड रूट एक समानांतर और स्वतंत्र लाइफलाइन की तरह काम करेगा।
- दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को सीधा लाभ
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित परियोजना नहीं है, बल्कि यह समूचे दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्र बन रहा है। इस एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के निर्माण से:
दिल्ली के यात्री: दक्षिण और पूर्वी दिल्ली के अलावा मध्य दिल्ली से आने वाले वाहन चालक बिना किसी स्थानीय रुकावट के सीधे जेवर पहुंच सकेंगे।
हरियाणा व फरीदाबाद: कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित ग्रीनफील्ड लिंक रोड्स के जरिए इस कॉरिडोर तक सीधी पहुंच सुनिश्चित होगी।
लॉजिस्टिक्स और कार्गो हब: जेवर एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहे मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और औद्योगिक पार्कों के मालवाहक वाहनों को भी पोर्ट और एयरपोर्ट तक तेज गति से आवाजाही की सुविधा मिलेगी।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सफलता की प्राथमिक शर्त होती है। जेवर एयरपोर्ट के आसपास यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आवासीय, व्यावसायिक, फिल्म सिटी और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी परियोजनाएं विकसित हो रही हैं।
इस 4,000 करोड़ रुपये के एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से इस पूरे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को व्यापक गति मिलेगी। रियल एस्टेट और व्यावसायिक गतिविधियों में लगे विशेषज्ञों के अनुसार, कनेक्टिविटी की स्पष्टता होने से वैश्विक कंपनियां जेवर क्षेत्र में अपने मुख्यालय और डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए आगे आएंगी। संबंधित विकास प्राधिकरणों और निर्माण एजेंसियों द्वारा जल्द ही इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अंतिम रूप देकर निविदा और भूमि संबंधी औपचारिकताओं को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
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