'ख्वाब देखना बंद करो...': मसूद पेजेशकियन का ट्रंप और नेतन्याहू को कड़ा संदेश, कहा- दबाव के आगे कभी सरेंडर नहीं करेगा ईरान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम नेतन्याहू की आत्मसमर्पण की मांग को खारिज करते हुए कड़ा जवाब दिया है।

Aug 8, 2026 - 12:28
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'ख्वाब देखना बंद करो...': मसूद पेजेशकियन का ट्रंप और नेतन्याहू को कड़ा संदेश, कहा- दबाव के आगे कभी सरेंडर नहीं करेगा ईरान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन मीडिया को संबोधित करते हुए, पृष्ठभूमि में ईरानी ध्वज।
  • सरेंडर का ख्वाब देखना बंद करो': ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की ट्रंप और नेतन्याहू को सख्त चेतावनी 
  • Iran US Israel Conflict: मसूद पेजेशकियन बोले- सैन्य दबाव से नहीं टूटेगा ईरान, ट्रंप-नेतन्याहू को दिया दोटूक जवाब 
  • "ख्वाब देखना बंद करो...": अमेरिकी दबाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का बड़ा बयान, जानिए क्या कहा 
  • ईरानी राष्ट्रपति की ट्रंप और नेतन्याहू को सीधी चेतावनी: 'ईरान के सरेंडर करने का सपना कब्र में ले जाएंगे विरोधी'

पश्चिमी एशिया में जारी भारी तनाव और भू-राजनीतिक खींचतान के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। तेहरान में एक उच्चस्तरीय संबोधन के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक सैन्य और आर्थिक दबाव के बावजूद ईरान किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उन्होंने वाशिंगटन और तेल अवीव की मंशा पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि ईरान के टूटने या सरेंडर करने की उम्मीद लगाने वाले विरोधियों को अपना यह ख्वाब छोड़ देना चाहिए। ईरानी राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि उनका देश बाहरी दबावों के सामने और अधिक एकजुट तथा मजबूत होकर खड़ा हुआ है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए एक बेहद सख्त बयान जारी किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की पृष्ठभूमि में, पेजेशकियन ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोधियों को सरेंडर की उम्मीद पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए।

ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां, प्रतिबंध और कूटनीतिक गतिरोध अपने चरम पर हैं। पेजेशकियन ने देश की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त किया कि ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष और सैन्य हमलों के बाद अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में तेहरान से पूर्ण सैन्य और परमाणु गतिविधियों को रोकते हुए आत्मसमर्पण करने की बात कही थी, जिसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सैन्य अभियानों को और तीव्र करने का संकेत दिया था।

इन बयानों के जवाब में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तेहरान में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने देश के सरकारी टेलीविजन और मीडिया माध्यमों के जरिए सीधा संदेश देते हुए कहा कि जो लोग सैन्य दबाव और चौतरफा घेराबंदी के जरिए ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर करने की सोच रहे हैं, वे पूरी तरह गलतफहमी में हैं।

पेजेशकियन ने कहा कि विरोधियों ने यह गणित लगाया था कि भयंकर सैन्य और आर्थिक हमलों के बाद ईरान अंदरूनी तौर पर बिखर जाएगा और देश का प्रशासनिक ढांचा ढह जाएगा। हालांकि, वास्तविक धरातल पर इसका उल्टा असर हुआ है और देश की जनता तथा सशस्त्र बल इस संकट के समय में पहले से कहीं ज्यादा एकजुट होकर उभरे हैं।

ईरानी राष्ट्रपति का मुख्य संदेश:

"ईरान के बिना शर्त सरेंडर करने की उम्मीद रखने वाले अपने इस ख्वाब को अपने साथ कब्र में ले जाएंगे। भारी दबाव और हमलों के बावजूद हमारा देश पहले से ज्यादा मजबूती से खड़ा है।"

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। ईरान के रक्षा विशेषज्ञों और वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकारों ने राष्ट्रपति के रुख का समर्थन करते हुए दोहराया है कि देश अपनी रक्षात्मक क्षमताओं और मिसाइल कार्यक्रमों पर किसी भी बाहरी शक्ति के निर्देश को स्वीकार नहीं करेगा।

वहीं, वाशिंगटन में ह्वाइट हाउस और इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया मिलने की संभावना है। अमेरिकी कूटनीतिज्ञों का मानना है कि ईरान पर जब तक अधिकतम दबाव की नीति लागू नहीं रहेगी, तब तक क्षेत्र में शांति स्थापना कठिन है। इजरायली नेतृत्व ने भी पहले ही स्पष्ट किया है कि वह अपनी सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए किसी भी खतरे से निपटने के लिए सैन्य विकल्पों का इस्तेमाल जारी रखेगा। 

ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से आए इस कड़े रुख से मध्य पूर्व में चल रहे क्षेत्रीय तनाव के और अधिक गहराने के आसार जताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति पेजेशकियन के सख्त लहजे से यह स्पष्ट हो गया है कि कूटनीतिक वार्ताओं या संघर्ष विराम के लिए तेहरान आसानी से अपनी शर्तें नहीं बदलेगा।  इस बयान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका से वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के दामों में अस्थिरता आ सकती है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा और अधिक संवेदनशील हो गया है, जिससे पड़ोसी खाड़ी देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

आने वाले दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के इस कड़े रुख के जवाब में अपनी सैन्य रणनीति या प्रतिबंधों में बदलाव किए जाने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ देश दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं ताकि पूर्णकालिक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति से बचा जा सके। तमाम कूटनीतिक गतिरोध के बावजूद, यह देखने योग्य होगा कि क्या दोनों पक्ष पर्दे के पीछे किसी मध्यस्थ देश के जरिए बातचीत की मेज पर लौटते हैं या फिर बयानों का यह तीखा युद्ध और अधिक सैन्य टकराव का रूप लेता है। फिलहाल, ईरानी नेतृत्व ने अपने रुख से साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव रणनीति के आगे झुकने को तैयार नहीं है।

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