Delhi SIR Voter List: आडवाणी, एस. जयशंकर और जगदीप धनखड़ को चुनाव आयोग का नोटिस, स्पेशल रिविजन में सामने आईं विसंगतियां
दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जगदीप धनखड़ समेत कई VVIPs को नोटिस जारी हुए हैं। जानिए आयोग का रुख।

- दिल्ली वोटर लिस्ट स्पेशल इंटेंसिव रिविजन: पूर्व उपप्रधानमंत्री समेत कई VVIP हस्तियों को नोटिस, आयोग ने स्पष्ट की स्थिति
- Election Commission Delhi SIR: मतदाता सूची सत्यापन में VVIP भी दायरे में, चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत दिग्गजों से मांगा विवरण
- दिल्ली मतदाता सूची में स्पेशल रिविजन का असर: जयशंकर और धनखड़ सहित कई प्रमुख नामों को नोटिस, जानिए क्या है पूरा मामला
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मतदाता सूची को पूर्णतः त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान एक चौंकाने वाला प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। इस सघन सत्यापन अभियान के तहत देश की कई अत्यंत विशिष्ट (VVIP) हस्तियों के मतदाता विवरण में तकनीकी और दस्तावेजी विसंगतियां पाई गई हैं। इसके चलते निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की ओर से पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ तथा स्वयं चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू सहित कई प्रमुख हस्तियों को औपचारिक नोटिस जारी किए गए हैं।
निर्वाचन तंत्र द्वारा उठाए गए इस कदम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण अभियान में पद या प्रभाव के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों और अधिकृत सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई किसी दुर्भावना अथवा नाम काटने के इरादे से नहीं, बल्कि नियमों के तहत प्रविष्टियों के भौतिक और दस्तावेजी मिलान की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है।
- क्या है दिल्ली का 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR)?
भारत निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों की गुणवत्ता सुधारने के लिए संक्षिप्त पुनरीक्षण (Summary Revision) चलाता है। हालांकि, जब किसी राज्य या महानगर में स्थानांतरित आबादी, आवासीय बदलाव, दोहरे पंजीकरण या पुराने रिकॉर्ड के कारण विसंगतियां अधिक हो जाती हैं, तब 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' लागू किया जाता है।
इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करते हैं। इसमें परिवार के सदस्यों के नाम, उनकी वर्तमान आवासीय स्थिति, आयु, पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से विलोपन और पहचान पत्रों के विवरण का मिलान किया जाता है। दिल्ली जैसे महानगर में, जहां केंद्रीय मंत्रालयों, लुटियंस जोन और प्रशासनिक परिसरों में पदासीन व्यक्तियों के आवास कार्यकाल के अनुसार बदलते रहते हैं, वहां पुराने पते और नए पते के बीच दोहराव या विसंगतियों की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।
- नोटिस जारी होने की मूल तकनीकी वजहें
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जिन गणमान्य व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी बिंदु सामने आए हैं:
आवासीय पते में बदलाव: संवैधानिक पदों पर आसीन होने अथवा पूर्व दायित्वों से मुक्त होने के बाद सरकारी आवासों का आवंटन बदलता है। कई मामलों में पुराने सरकारी पते पर नाम दर्ज रह जाता है, जबकि वर्तमान में व्यक्ति अन्यत्र निवास कर रहा होता है।
दोहरे पंजीकरण की जांच: नई दिल्ली या अन्य राज्यों के पैतृक विधानसभा क्षेत्रों में पहले से नाम दर्ज होने और दिल्ली में पुनः नाम जुड़वाने की स्थिति में सिस्टम में 'डुप्लीकेट' या 'डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री' (DSE) फ्लैग हो जाती है।
दस्तावेजी औपचारिकताएं: सत्यापन के दौरान हस्ताक्षरित घोषणा पत्र, पते के वैध प्रमाण या हालिया तस्वीर की अनुपलब्धता होने पर नोटिस जारी कर औपचारिक पुष्टि मांगी जाती है।
निर्वाचन नियमों के अनुसार, जब तक संबंधित मतदाता स्वयं अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से इस नोटिस का उत्तर देकर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता, तब तक सूची में सुधार की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती।
- चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: मानक संचालन प्रक्रिया का हिस्सा
मामला सार्वजनिक चर्चा में आने के बाद निर्वाचन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं है और न ही इसका अर्थ यह है कि संबंधित नागरिकों के नाम मतदाता सूची से सीधे हटा दिए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, सॉफ्टवेयर आधारित डेटा विश्लेषण और जमीनी सत्यापन के दौरान यदि किसी भी मतदाता के रिकॉर्ड में विसंगति दिखाई देती है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया (SOP) है। चाहे कोई सामान्य नागरिक हो या देश का शीर्ष नीति-निर्माता, नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। नोटिस का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने मताधिकार विवरण को दुरुस्त कराने का अवसर देना है।
- नई दिल्ली क्षेत्र में विशेष सतर्कता
लुटियंस दिल्ली और नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र में सांसदों, मंत्रियों, विदेशी दूतावासों के समीप रहने वाले राजनयिकों और वरिष्ठ नौकरशाहों का बड़ा जमावड़ा रहता है। प्रशासनिक अधिकारियों का स्थानांतरण अथवा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यदि मतदाता सूची समय पर अपडेट न हो, तो चुनावी प्रक्रियाओं में मतदान प्रतिशत और वास्तविक मतदाताओं की गणना प्रभावित होती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन विशिष्ट नागरिकों को नोटिस भेजे गए हैं, उनके कार्यालयों अथवा प्रतिनिधियों से संपर्क साधा जा रहा है ताकि निर्धारित समयावधि के भीतर सत्यापन कार्य पूरा किया जा सके। सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्राप्त होने के उपरांत निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा अंतिम मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन दर्ज कर दिए जाएंगे।
What's Your Reaction?

