PM Modi Chintan Shivir: केंद्रीय मंत्रिपरिषद के चिंतन शिविर की शुरुआत, 'विकसित भारत 2047' और बड़े नीतिगत सुधारों पर मंथन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का चिंतन शिविर शुरू हुआ है। इसमें 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य, बड़े प्रशासनिक सुधार और 5 साल के एक्शन प्लान पर विस्तृत मंथन हो रहा है।

- PM Modi Chintan Shivir: केंद्रीय मंत्रिपरिषद के चिंतन शिविर की शुरुआत, 'विकसित भारत 2047' और बड़े नीतिगत सुधारों पर मंथन
- New Delhi News: प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रियों का चिंतन शिविर शुरू, 5 साल के एक्शन प्लान पर जोर
- विकसित भारत 2047 का रोडमैप: पीएम मोदी के चिंतन शिविर में डिलीवरी मैकेनिज्म और प्रशासनिक रिफॉर्म्स पर गहन चर्चा
- Union Council of Ministers Meeting: नीतिगत फैसलों की गति बढ़ाने और जनहित योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जुटे सभी मंत्री
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' का आयोजन शुरू हो गया है। इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और राज्य मंत्री शामिल हुए हैं। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु 'विकसित भारत 2047' के दीर्घकालिक विजन को जमीन पर उतारने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना, प्रमुख प्रशासनिक व नीतिगत सुधारों को गति देना और वर्तमान कार्यकाल के पांच वर्षीय एक्शन प्लान की समीक्षा करना है।
बैठक में सरकार की विभिन्न प्राथमिकताओं, बजटीय घोषणाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
- 'विकसित भारत 2047' के विजन को गति देने की तैयारी
चिंतन शिविर के एजेंडे में सबसे प्रमुख विषय 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र की श्रेणी में स्थापित करने का व्यापक रोडमैप है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक विकास दर को गति देने, घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाने, आधुनिक बुनियादी ढांचे के विस्तार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा रहा है।
मंत्रालयों से कहा गया है कि वे केवल वार्षिक योजनाओं तक सीमित न रहें, बल्कि ऐसे दीर्घकालिक परिणामोन्मुखी प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा तैयार करें जिनका प्रभाव आने वाले दशकों तक दिखाई दे। इसके लिए तकनीकी नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रशासनिक उपयोग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को प्रमुख आधार बनाया गया है।
- शासन और डिलीवरी मैकेनिज्म में सुधार पर जोर
इस चिंतन शिविर का एक अन्य प्रमुख पहलू प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और जन-सुलभ बनाना है। प्रधानमंत्री पूर्व में भी इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी देरी और बिचौलियों के पहुंचना चाहिए।
बैठक के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के बीच तालमेल बढ़ाने, विभागों में फाइलों के त्वरित निस्तारण, अनावश्यक नियमों को समाप्त करने और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ-साथ 'ईज ऑफ लिविंग' को सुदृढ़ करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है। विशेष रूप से नागरिक केंद्रित सेवाओं के डिजिटलीकरण और शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal) को और अधिक प्रभावी बनाने पर मंत्रियों के सुझाव लिए जा रहे हैं।
- मंत्रालयों का समूह आधारित प्रजेंटेशन
चिंतन शिविर की कार्यप्रणाली के तहत विभिन्न मंत्रालयों को उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार समूहों में विभाजित किया गया है। आर्थिक क्षेत्र, सामाजिक कल्याण, रणनीतिक व सुरक्षा तंत्र, ग्रामीण विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मंत्रालयों के समूह अपनी प्राथमिकताओं और 100 दिन से लेकर 5 वर्ष तक के लक्ष्यों पर प्रजेंटेशन दे रहे हैं।
इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग मंत्रालय अलग-थलग काम करने के बजाय एक एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें। उदाहरण के लिए, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन को गति देने के लिए रेलवे, सड़क परिवहन, नागरिक उड्डयन और पोत परिवहन मंत्रालयों के बीच समन्वय को पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म के तहत और मजबूत किया जा रहा है।
- पूंजीगत व्यय और रोजगार सृजन की प्राथमिकताओं पर मंथन
अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) के प्रभावी उपयोग और जमीनी स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने के तौर-तरीकों पर भी सत्रों में विचार हो रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सशक्त बनाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मूल्य संवर्धन करने और युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को आधुनिक उद्योग की मांग के अनुरूप ढालने पर मंत्रालयों से विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई है।
सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा सुधारों के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन और दूरदराज के क्षेत्रों तक बुनियादी जनसुविधाएं पहुंचाने के लिए समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान नीतिगत फैसलों के मूल्यांकन और भविष्य की दिशा तय करने के लिए इस प्रकार के चिंतन शिविरों का आयोजन समय-समय पर होता रहा है। यह बैठक नियमित कैबिनेट बैठकों से भिन्न होती है, जहां तात्कालिक विधायी कार्यों या प्रस्तावों की जगह समग्र विजन, आत्मनिरीक्षण और दीर्घकालिक सुधारों पर अनौपचारिक और गहन संवाद होता है।
इस दो दिवसीय मंथन के समापन पर प्रधानमंत्री मंत्रियों को संबोधित करेंगे और तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट तथा एक्शन प्लान को लागू करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश साझा करेंगे। इन निर्देशों के आधार पर सभी मंत्रालय अपनी आगामी प्राथमिकताओं को अंतिम रूप देंगे।
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