Bladder Cancer Symptoms: 60 की उम्र के बाद पुरुषों में ब्लैडर कैंसर का खतरा, यूरिन में खून आना मुख्य लक्षण, जानें बचाव
Bladder Cancer Symptoms: 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में ब्लैडर कैंसर अधिक देखा जा रहा है। यूरिन में खून आना इसका मुख्य लक्षण है। जानें इसके कारण और बचाव।

- Bladder Cancer in Elderly Men: यूरिन में ब्लड दिखना ब्लैडर कैंसर का शुरुआती संकेत, 60 से अधिक उम्र के पुरुष रहें सावधान
- 60 पार पुरुषों में तेजी से बढ़ रहा है ब्लैडर कैंसर! पेशाब में खून दिखे तो न करें अनदेखा, जानें इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय
- Health Alert: 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में ब्लैडर कैंसर का जोखिम अधिक, यूरिन में खून आने पर तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और ऑन्कोलॉजिस्ट्स ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों के स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। चिकित्सा अध्ययनों के अनुसार, ब्लैडर कैंसर (मूत्राशय का कैंसर) बुजुर्ग पुरुषों में तेजी से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी बनती जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी का सबसे प्राथमिक और स्पष्ट लक्षण पेशाब में खून आना (हेमाटूरिया) है, जिसे अक्सर लोग साधारण संक्रमण या पथरी समझकर अनदेखा कर देते हैं। समय पर जांच और सही पहचान न होने के कारण यह कैंसर गंभीर रूप ले लेता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती चरण में ही इस लक्षण को पहचान लिया जाए, तो आधुनिक तकनीकों और उपचार से मरीज को पूरी तरह स्वस्थ किया जा सकता है।
ब्लैडर कैंसर शरीर के मूत्राशय (यूरिनरी ब्लैडर) की अंदरूनी परत में कोशिकाओं के असामान्य और अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। मूत्राशय हमारे शरीर का वह अंग है जो गुर्दे (किडनी) द्वारा छाने गए मूत्र को जमा करने का कार्य करता है। जब इसकी अंदरूनी दीवार की कोशिकाएं विकृत होने लगती हैं, तो वे गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यह कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 60 साल से अधिक आयु के पुरुषों में इसकी दर सबसे अधिक देखी जाती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इस बीमारी के विकसित होने का जोखिम लगभग तीन से चार गुना अधिक होता है।
वरिष्ठ यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट्स के अनुसार, ब्लैडर कैंसर का सबसे पहला और मुख्य लक्षण पेशाब के साथ खून का आना है, जिसे मेडिकल भाषा में हेमाटूरिया कहा जाता है। कई मामलों में पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या गहरा भूरा दिखाई देता है, जबकि कुछ मामलों में खून की मात्रा इतनी सूक्ष्म होती है कि वह केवल लैब टेस्ट (माइक्रोस्कोपिक टेस्ट) में ही पकड़ी जाती है।
पेशाब में खून आने के अलावा, कुछ अन्य शुरुआती और द्वितीयक लक्षण भी मरीजों में देखे जाते हैं। इनमें बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना, पेशाब करते समय जलन या तेज दर्द महसूस होना, पेशाब की धार का कमजोर होना और बिना किसी कारण के मूत्राशय के निचले हिस्से या कमर में दर्द रहना शामिल है।
अक्सर वरिष्ठ नागरिक इन लक्षणों को प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या गुर्दे की पथरी का लक्षण मानकर घरेलू उपचार या सामान्य दवाएं लेते रहते हैं। इस देरी के कारण कैंसर मूत्राशय की गहराई तक फैल जाता है, जिससे बाद में उपचार अधिक जटिल हो जाता है।
देश के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञों और यूरोलॉजी सोसायटियों का कहना है कि ब्लैडर कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई जीवनशैली और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हैं। डॉक्टरों के अनुसार, धूम्रपान (सिगरेट, बीड़ी या हुक्का) इसका सबसे बड़ा कारण है। तंबाकू में मौजूद हानिकारक रसायन फेफड़ों से रक्त में पहुंचते हैं और अंततः गुर्दों द्वारा छाने जाकर मूत्राशय में जमा होते हैं, जो मूत्राशय की अंदरूनी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
इसके अतिरिक्त, औद्योगिक रसायनों (जैसे डाई, पेंट, रबर और टेक्सटाइल उद्योग में प्रयुक्त केमिकल्स) के लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों में भी इसका जोखिम अधिक देखा गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को पेशाब में खून दिखने पर तुरंत यूरोलॉजिस्ट से मिलकर सिस्टोस्कोपी और यूरिन टेस्ट कराना चाहिए।
बुजुर्गों में ब्लैडर कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देर से निदान होने के कारण कई मरीजों को मूत्राशय निकालने जैसी जटिल सर्जरी (सिस्टेक्टॉमी) या लंबी केमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से गुजरना पड़ता है। इससे न केवल मरीज के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि परिवार पर भी भारी वित्तीय और भावनात्मक बोझ आता है।
स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों के माध्यम से यदि बुजुर्गों और उनके परिजनों को इस बात के प्रति जागरूक किया जाए कि पेशाब में दर्द रहित खून आना भी कैंसर का संकेत हो सकता है, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। समय पर पहचान होने पर 'ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन' (TURBT) जैसी न्यूनतम आक्रामक प्रक्रियाओं से कैंसर को शुरुआती चरण में ही हटाया जा सकता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और स्वास्थ्य संगठनों द्वारा कैंसर नियंत्रण कार्यक्रमों के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता शिविर आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है।
चिकित्सकों की सलाह है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष अपनी जीवनशैली में सुधार करें। धूम्रपान पूरी तरह छोड़ें, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें ताकि शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते रहें, और रसायनों के सीधे संपर्क में आने से बचें। अगर यूरिन में किसी भी तरह का बदलाव दिखे, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।
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