यूएई राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का भारत दौरा: 19 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर आगमन, रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने का लक्ष्य।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 19 जनवरी 2026 को भारत का आधिकारिक दौरा करने वाले हैं। यह दौरा प्रधानमंत्री
- मध्य पूर्व की उथल-पुथल के बीच यूएई-भारत संबंध मजबूत: ईरान-अमेरिका तनाव, सऊदी-यूएई यमन विवाद और पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी रक्षा समझौते की पृष्ठभूमि में दौरा
- भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी पर फोकस: मोहम्मद बिन जायद का पांचवां दौरा, व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा, नए गठबंधनों की संभावना
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 19 जनवरी 2026 को भारत का आधिकारिक दौरा करने वाले हैं। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है। यह उनकी राष्ट्रपति पद संभालने के बाद भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है और पिछले दशक में पांचवीं। दौरा भारत-यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। दोनों देशों के बीच हाल के उच्च स्तरीय आदान-प्रदानों ने इस यात्रा के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
इसमें अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की सितंबर 2024 की यात्रा और दुबई के क्राउन प्रिंस तथा उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की अप्रैल 2025 की यात्रा शामिल है। ये यात्राएं दोनों देशों के बीच बढ़ते जुड़ाव को दर्शाती हैं। यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत-यूएई संबंध गर्मजोशी, निकटता और बहुआयामी हैं जो मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता 2022 में हुआ था जिसने व्यापार को बढ़ावा दिया है। भारत यूएई का प्रमुख निर्यात गंतव्य है और दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा काफी अधिक है। ऊर्जा सहयोग प्रमुख क्षेत्र है जिसमें दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्थाएं शामिल हैं। यूएई भारत को कच्चे तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। दोनों देश भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर भी काम कर रहे हैं।
यह दौरा पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता के समय हो रहा है। ईरान-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा है। ईरान में विरोध प्रदर्शनों और दमन के बाद अमेरिका ने सैन्य विकल्पों पर विचार किया। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी। कई देशों ने अमेरिका को हमला न करने की सलाह दी। ईरान ने हवाई क्षेत्र बंद किया जो बाद में खोला गया।
सऊदी अरब और यूएई के बीच यमन में मतभेद हैं। यमन युद्ध में दोनों ने 2015 में हूती विद्रोहियों के खिलाफ हस्तक्षेप किया लेकिन अलग-अलग गुटों का समर्थन किया। सऊदी अरब ने एकीकृत यमन पर जोर दिया जबकि यूएई ने दक्षिणी अलगाववादियों का समर्थन किया। दिसंबर 2025 में सऊदी हमलों ने यूएई शिपमेंट को निशाना बनाया जिससे तनाव बढ़ा।
सऊदी अरब और पाकिस्तान ने सितंबर 2025 में रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता किया जिसमें एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। यह समझौता सामूहिक सुरक्षा पर आधारित है। समझौते में पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का स्पष्ट उल्लेख नहीं लेकिन व्यापक रक्षा सहयोग शामिल है। जनवरी 2026 में तुर्की इस समझौते में शामिल होने की बातचीत में है।
यह संभावित त्रिपक्षीय गठबंधन तुर्की की सैन्य अनुभव और रक्षा उद्योग, पाकिस्तान की परमाणु और मिसाइल क्षमता तथा सऊदी अरब की वित्तीय ताकत से मजबूत बनेगा। यह गठबंधन अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर निर्भरता कम करने की दिशा में है। भारत और यूएई इन घटनाओं पर नजर रखे हुए हैं। दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग पर जोर देते हैं। भारत-यूएई संबंध मजबूत हैं। दोनों देशों ने ऊर्जा, व्यापार और रक्षा में सहयोग बढ़ाया है। दौरा इन संबंधों को और मजबूत करेगा। दोनों नेता व्यापार, निवेश और रक्षा पर चर्चा करेंगे। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
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