डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर बार-बार दावों के बीच डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से सख्त रुख, 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की इच्छा बार-बार व्यक्त की है। उन्होंने

Jan 14, 2026 - 13:13
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डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर बार-बार दावों के बीच डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से सख्त रुख, 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा'
डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर बार-बार दावों के बीच डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से सख्त रुख, 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा'
  • डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीद या अधिग्रहण की लगातार धमकियों पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन का कड़ा जवाब 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और हम किसी भी दबाव में नहीं आएंगे'
  • ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने ट्रंप के प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा 'हम अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना चाहते और डेनमार्क के साथ एकजुट रहेंगे'
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा और रूस-चीन प्रभाव को रोकने के नाम पर ग्रीनलैंड को 'आसान या कठिन तरीके' से हासिल करने के बयान पर डेनमार्क-ग्रीनलैंड का संयुक्त विरोध 'यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की इच्छा बार-बार व्यक्त की है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक बताया है और कहा है कि ग्रीनलैंड की सामरिक स्थिति, खनिज संसाधन तथा आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी के कारण अमेरिका को इसे अपना बनाना चाहिए। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे इसे आसान तरीके से खरीदकर या यदि आवश्यक हो तो कठिन तरीके से हासिल करेंगे, जिसमें सैन्य विकल्प भी शामिल हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कुछ न कुछ करेगा, चाहे संबंधित पक्षों को पसंद हो या नहीं। यह प्रस्ताव 2019 में उनके पहले कार्यकाल में भी उठाया गया था, जब उन्होंने इसे एक बड़े रियल एस्टेट सौदे के रूप में वर्णित किया था, लेकिन तब भी इसे खारिज कर दिया गया था। 2025-2026 में ट्रंप ने इस मुद्दे को फिर से तेज किया है, विशेष रूप से वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद, और उन्होंने डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल भी उठाए हैं।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने ट्रंप के इन बयानों पर बार-बार कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और अमेरिका का कोई अधिकार नहीं है कि वह इसे जबरन अधिग्रहण करे। फ्रेडरिकसन ने जोर देकर कहा है कि ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड वासियों का है और इसका भविष्य वे खुद तय करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी सैन्य कार्रवाई से नाटो गठबंधन का अंत हो जाएगा, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन होगा। फ्रेडरिकसन ने यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई है और कहा है कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए तैयार है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नाटो पर भरोसा रखता है। उन्होंने ट्रंप से धमकियां बंद करने की अपील की है और कहा है कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड संवाद के माध्यम से सहयोग चाहते हैं, लेकिन बिक्री या अधिग्रहण पर कोई चर्चा नहीं होगी।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी ट्रंप के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना चाहता और न ही बिकाऊ है। नील्सन ने जोर दिया है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का अटूट हिस्सा है और वह नाटो गठबंधन पर पूरा भरोसा रखता है। ग्रीनलैंड की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि द्वीप का भविष्य ग्रीनलैंड वासी तय करेंगे, वे अमेरिकी नहीं बनना चाहते और न ही डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने ट्रंप की धमकियों को अस्वीकार्य बताया है और कहा है कि पर्याप्त है अब, कोई दबाव या काल्पनिक अधिग्रहण नहीं चलेगा। ग्रीनलैंड ने स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई है, लेकिन अमेरिकी नियंत्रण को स्पष्ट रूप से नकार दिया है।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड में पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पिटफिक स्पेस बेस का जिक्र करते हुए कहा है कि मौजूदा समझौते पर्याप्त नहीं हैं और अमेरिका को पूर्ण नियंत्रण चाहिए। उन्होंने डेनमार्क की रक्षा क्षमता पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि डेनमार्क अकेले ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं कर सकता। ट्रंप ने विशेष दूत नियुक्त किए हैं और कांग्रेस में संबंधित विधेयक भी पेश किए गए हैं। उन्होंने आर्थिक दबाव जैसे टैरिफ की धमकी भी दी है।

डेनमार्क ने इन धमकियों के जवाब में ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए बजट बढ़ाया है और यूरोपीय सहयोगियों से समर्थन जुटाया है। फ्रेडरिकसन ने कहा है कि यह निर्णायक क्षण है और डेनमार्क अपने मूल्यों की रक्षा करेगा। ग्रीनलैंड में जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अधिकांश निवासी अमेरिकी नियंत्रण के खिलाफ हैं, हालांकि स्वतंत्रता की इच्छा मजबूत है। ट्रंप की ये टिप्पणियां नाटो सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा रही हैं। डेनमार्क ने अमेरिकी राजदूतों को तलब किया है और यूरोपीय संघ तथा नाटो स्तर पर चर्चा की है। फ्रेडरिकसन ने कहा है कि सीमाओं को बलपूर्वक नहीं बदला जा सकता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान होना चाहिए।

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