बच्चों की नाक का आकार जेनेटिक्स से तय: पीडियाट्रिशियन डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया, नाक को दबाकर शेप देने की कोशिश न करें। 

पीडियाट्रिशियन डॉ. संदीप गुप्ता ने बच्चों की नाक के विकास और आकार पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की नाक का आकार

Jan 19, 2026 - 13:15
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बच्चों की नाक का आकार जेनेटिक्स से तय: पीडियाट्रिशियन डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया, नाक को दबाकर शेप देने की कोशिश न करें। 
बच्चों की नाक का आकार जेनेटिक्स से तय: पीडियाट्रिशियन डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया, नाक को दबाकर शेप देने की कोशिश न करें। 
  • नवजात की चपटी नाक 5-7 साल में शार्प हो जाती है: डॉ. संदीप गुप्ता ने इंस्टाग्राम वीडियो में समझाया, कार्टिलेज सॉफ्ट होने से शुरुआत में सपाट दिखती है
  • बच्चे की नाक पर मसाज या दबाव से बचें: जेनेटिक्स और विकास प्रक्रिया से तय होता है आकार, जबरदस्ती शेप बदलने से नुकसान हो सकता है

पीडियाट्रिशियन डॉ. संदीप गुप्ता ने बच्चों की नाक के विकास और आकार पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की नाक का आकार मुख्य रूप से जेनेटिक्स से तय होता है और यह माता-पिता की नाक की शेप से प्रभावित होता है। नवजात शिशु की नाक शुरुआत में चपटी या सपाट दिखती है क्योंकि उसका कार्टिलेज बहुत सॉफ्ट और लचीला होता है। इस कारण नाक का ब्रिज कम विकसित लगता है और नाक चौड़ी या कम ऊंचाई वाली दिखाई देती है।

डॉ. संदीप गुप्ता ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में स्पष्ट किया कि नाक का विकास धीरे-धीरे होता है। जन्म के समय नाक ज्यादातर कार्टिलेज से बनी होती है जो नरम होती है। समय के साथ कार्टिलेज में सख्ती आती है और नाक का ब्रिज ऊंचा होने लगता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 5 से 7 साल की उम्र तक चलती है। इस दौरान नाक अपने आप शार्प या पॉइंटेड हो जाती है। डॉक्टर ने जोर दिया कि यह प्राकृतिक विकास है और इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

नवजात की नाक की सपाटी कई कारणों से होती है। जन्म के समय बच्चा संकरी बर्थ कैनाल से गुजरता है जिससे नाक का कार्टिलेज अस्थायी रूप से दब जाता है। इसके अलावा चेहरे की हड्डियां और कार्टिलेज अभी पूरी तरह विकसित नहीं होते। समय के साथ चेहरे की हड्डियां बढ़ती हैं और कार्टिलेज मजबूत होता है जिससे नाक का आकार बदलता है। डॉ. संदीप ने बताया कि यह बदलाव स्वाभाविक है और ज्यादातर मामलों में कोई समस्या नहीं होती।

डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि कई परिवारों में यह प्रथा है कि बच्चे की नाक को दबाकर या मसाज करके शेप देने की कोशिश की जाती है। वे कहते हैं कि ऐसा करने से बचना चाहिए। नाक का कार्टिलेज नाजुक होता है और जबरदस्ती दबाने से दर्द, सूजन या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा करने से नाक की प्राकृतिक विकास प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। डॉ. संदीप ने कहा कि नाक का आकार जेनेटिक्स से तय होता है और माता-पिता की नाक से मिलता-जुलता होता है।

नाक के विकास में जेनेटिक फैक्टर्स प्रमुख भूमिका निभाते हैं। विभिन्न जीन नाक की चौड़ाई, ऊंचाई, ब्रिज की बनावट और टिप की शेप तय करते हैं। ये जीन माता-पिता से बच्चे को मिलते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया कि नाक की विशेषताएं जैसे चौड़ी नाक, ऊंचा ब्रिज या पॉइंटेड टिप जेनेटिकली तय होती हैं। विकास के दौरान कार्टिलेज और हड्डियां बढ़ती हैं जिससे नाक का अंतिम रूप सामने आता है।

नवजात में नाक का कार्टिलेज सॉफ्ट होने के कारण यह लचीला रहता है। समय के साथ ऑसीफिकेशन होती है और कार्टिलेज में हड्डी बनती है। यह प्रक्रिया बचपन में धीरे-धीरे चलती है। डॉक्टरों के अनुसार 5-7 साल तक नाक का ब्रिज विकसित हो जाता है और नाक शार्प दिखने लगती है। इससे पहले नाक सपाट दिखना सामान्य है।

कई माता-पिता बच्चे की नाक को लेकर चिंतित होते हैं। डॉ. संदीप गुप्ता ने कहा कि अधिकांश मामलों में यह चिंता बेवजह है। नाक का विकास प्राकृतिक है और जबरदस्ती मसाज से कोई स्थायी बदलाव नहीं होता। बल्कि ऐसा करने से बच्चे को असुविधा हो सकती है। डॉक्टर ने सलाह दी कि माता-पिता बच्चे की नाक को छेड़छाड़ न करें और विकास को स्वाभाविक होने दें। नाक का विकास चेहरे के अन्य हिस्सों से जुड़ा होता है। बच्चे के चेहरे की हड्डियां बढ़ने के साथ नाक भी बदलती है। जन्म के बाद पहले कुछ महीनों में नाक का ब्रिज धीरे-धीरे उभरता है। 1-2 साल में नाक का आकार बेहतर दिखने लगता है। 5-7 साल तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है। डॉक्टर ने कहा कि अगर कोई मेडिकल समस्या जैसे ब्रीदिंग इश्यू हो तो डॉक्टर से सलाह लें।

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