परमाणु समझौते की दिशा में ट्रंप के बढ़े कदम: ईरान के साथ 'सकारात्मक बातचीत' और मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद

एक तरफ जहां ट्रंप समझौते की उम्मीद जगा रहे हैं, वहीं तेहरान से आ रही खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्रालय ने किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत की खबरों को "फर्जी

Mar 24, 2026 - 11:48
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परमाणु समझौते की दिशा में ट्रंप के बढ़े कदम: ईरान के साथ 'सकारात्मक बातचीत' और मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद
परमाणु समझौते की दिशा में ट्रंप के बढ़े कदम: ईरान के साथ 'सकारात्मक बातचीत' और मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद

  • इजरायल और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर नई डील की तैयारी, ट्रंप ने पांच दिनों के लिए टाले सैन्य हमले
  • 'ईरान परमाणु हथियार नहीं रखेगा': ट्रंप के दावे और तेहरान के इनकार के बीच फंसी कूटनीतिक गुत्थी, क्या खत्म होगा युद्ध?

मध्य पूर्व में चल रहे भीषण तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला और उम्मीद जगाने वाला बयान दिया है। फ्लोरिडा के पाम बीच पर मीडिया से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने दावा किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से "बेहद अच्छी और सार्थक" बातचीत चल रही है। राष्ट्रपति के अनुसार, यह संवाद रविवार रात से शुरू हुआ और इसके सकारात्मक परिणाम मिलने की पूरी संभावना है। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान अब शांति का इच्छुक दिख रहा है और वह इस महत्वपूर्ण शर्त पर सहमत हो गया है कि भविष्य में उसके पास कोई भी परमाणु हथियार नहीं होगा। इस कूटनीतिक प्रगति को देखते हुए ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बिजली संयंत्रों पर होने वाले संभावित अमेरिकी हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए स्थगित करने का आदेश दिया है।

ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति और तेल बाजारों में हलचल मचा दी है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है, जिनमें परमाणु हथियारों का पूर्ण त्याग और भविष्य में युद्ध न करने की प्रतिबद्धता शामिल है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह बातचीत सीधे सर्वोच्च नेतृत्व के बजाय तेहरान के कुछ "प्रतिष्ठित" और प्रभावशाली नेताओं के साथ हो रही है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने खुद संपर्क साधा है, जिसका अर्थ है कि उन पर डाले गए आर्थिक और सैन्य दबाव का असर हो रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति ने यह भी जोड़ा कि वे स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं और "हम देखेंगे कि क्या होता है," जो यह दर्शाता है कि वे अभी भी पूरी तरह से ईरान पर भरोसा करने के मूड में नहीं हैं।

इस संभावित समझौते में इजरायल की भूमिका को ट्रंप ने अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने इजरायल को इस पूरी लड़ाई में एक "बेहतरीन और अडिग पार्टनर" करार देते हुए कहा कि कोई भी नई डील ऐसी होगी जो मध्य पूर्व के सभी साथियों के हितों की रक्षा करेगी। ट्रंप का मानना है कि इजरायल जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर ही क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे केवल एक ऐसी डील पर हस्ताक्षर करेंगे जो "हम सभी के लिए अच्छी हो।" इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पुष्टि की है कि उनकी ट्रंप से इस विषय पर विस्तार से बात हुई है, जहां सैन्य उपलब्धियों को कूटनीतिक जीत में बदलने की रणनीति पर चर्चा की गई। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि उनके मध्य पूर्व विशेष दूत स्टीव विटकोफ और उनके दामाद जारेड कुशनर इस बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं। रविवार शाम से शुरू हुई इन गुप्त बैठकों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से समाप्त करने और उसके संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अमेरिका द्वारा अपने नियंत्रण में लेने जैसे कड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही है।

एक तरफ जहां ट्रंप समझौते की उम्मीद जगा रहे हैं, वहीं तेहरान से आ रही खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्रालय ने किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत की खबरों को "फर्जी खबर" करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका केवल समय हासिल करने और तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस तरह के दावे कर रहा है। ईरान का रुख अभी भी कड़ा बना हुआ है, और वहां के नेतृत्व का कहना है कि वे किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। कूटनीतिक हल्कों में इस विरोधाभास को 'माइंड गेम' के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

परमाणु हथियारों के मुद्दे पर ट्रंप का रुख बेहद सख्त और स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा, वे इस बात पर सहमत हैं।" ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि समझौते के तहत अमेरिका ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार (जिसे उन्होंने 'न्यूक्लियर डस्ट' कहा) को अपने कब्जे में ले सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है, तो पांच दिनों के ठहराव के बाद सैन्य विकल्प फिर से सक्रिय हो जाएंगे। ट्रंप ने कहा, "अगर डील नहीं हुई, तो हम बमबारी जारी रखेंगे।" यह 'कैरेट एंड स्टिक' (लालच और दंड) की नीति ट्रंप के कार्यकाल की पहचान रही है, जिसमें वे एक तरफ शांति का प्रस्ताव देते हैं और दूसरी तरफ सैन्य विनाश की चेतावनी भी बनाए रखते हैं।

मध्य पूर्व के अन्य देशों जैसे मिस्र और तुर्की की भूमिका भी इस संकट को सुलझाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, ये देश मध्यस्थ के रूप में अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए जल्द ही खोला जा सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित होगा। ट्रंप ने विश्वास जताया कि एक सफल डील से तेल की कीमतें "चट्टान की तरह नीचे गिरेंगी," जिससे दुनिया भर में महंगाई से राहत मिलेगी। हालांकि, जब तक कागजों पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते और जमीन पर हथियारों की गूंज शांत नहीं हो जाती, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी।

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