बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा के बीच हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक शेख हसीना की पूर्व संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा की स्थिति में एक हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक आगामी राष्ट्रीय चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा की स्थिति में एक हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक आगामी राष्ट्रीय चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की गोपालगंज-3 (कोटालीपाड़ा-तुंगीपाड़ा) सीट से जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत के केंद्रीय समिति के महासचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वे 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव में इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। यह सीट लंबे समय तक शेख हसीना के पास रही थी और अब यह चुनाव उनके निर्वासन के बाद हो रहा है। यह चुनाव बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा। शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है और वह चुनाव में भाग नहीं ले सकेगी। अंतरिम सरकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में है और चुनाव आयोग ने 12 फरवरी 2026 की तारीख घोषित की है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 29 दिसंबर 2025 है और नामांकनों की जांच 30 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक होगी। नाम वापसी की अंतिम तिथि 20 जनवरी 2026 है।
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने नामांकन पत्र جمع किए हैं और वे खुद को तटस्थ व्यक्ति बताते हैं। उन्होंने कहा है कि उनके किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वे कभी दलगत राजनीति में शामिल नहीं रहे। वे यह भी कहते हैं कि राजनीतिक दलों से चुने गए सांसद अक्सर दल की अनुशासन के कारण आम लोगों की समस्याएं नहीं उठा पाते। वे इस सीमा को पार करना चाहते हैं और लोगों की ओर से बोलना चाहते हैं। गोपालगंज-3 सीट से अन्य उम्मीदवारों में बीएनपी से नामित एसएम जिलानी, नेशनल सिटिजन पार्टी से अरिफुल दरिया, जमात-ए-इस्लामी से एमएम रेजाउल करीम, गोणो अधिकार परिषद से अबुल बशर, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश से मारुफ शेख, नेशनल पीपुल्स पार्टी से शेख सलाउद्दीन, खेलाफत मजलिस से ओली अहमद और निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद हबीबुर रहमान तथा मोहम्मद अनवर हुसैन शामिल हैं।
बांग्लादेश में 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। अगस्त 2024 से लेकर अब तक हजारों घटनाएं दर्ज की गई हैं जिनमें घरों, व्यवसायों और पूजा स्थलों पर हमले शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में अगस्त 2024 के शुरुआती दिनों में ही सैकड़ों हमलों का जिक्र है। हाल की घटनाओं में माइमेंसिंह में एक युवा हिंदू व्यक्ति दीपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या शामिल है जिसके बाद अल्पसंख्यक संगठनों ने प्रदर्शन किए और अंतरिम सरकार पर समुदायों की सुरक्षा न करने का आरोप लगाया। इसके अलावा सूफी श्राइन, अहमदिया मुस्लिम और ईसाई समुदायों पर भी हमले हुए हैं। यह चुनाव अंतरिम सरकार के तहत हो रहा है और इसमें जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह भी साथ में होगा। चुनाव आयोग ने 42,761 मतदान केंद्र और 2,44,739 बूथ तैयार किए हैं जहां करीब 12.76 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे। मतदान सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेगा। प्रवासी बांग्लादेशी ऑनलाइन पोस्टल बैलट के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। चुनाव में मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है। अवामी लीग के प्रतिबंध के कारण उसके समर्थक चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं।
गोपालगंज-3 सीट तुंगीपाड़ा क्षेत्र में आती है जो शेख हसीना का गढ़ रही है। शेख हसीना ने इस सीट से कई बार चुनाव जीता था लेकिन अब वे भारत में निर्वासन में हैं। अंतरिम सरकार ने अल्पसंख्यकों पर हमलों के लिए कई गिरफ्तारियां की हैं लेकिन हिंसा की घटनाएं जारी हैं। हाल की घटनाओं में चटगांव में एक हिंदू परिवार के घर में आग लगाना और धमकी भरा नोट छोड़ना शामिल है। अल्पसंख्यक संगठनों ने जांच की कमी और न्याय न मिलने से डर और अविश्वास की स्थिति बताई है। यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। अंतरिम सरकार ने चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने का वादा किया है लेकिन मीडिया पर हमले और छिटपुट हिंसा चिंता का कारण बने हुए हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक की उम्मीदवारी अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक प्रतिनिधित्व की कोशिश है। वे बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत के महासचिव के रूप में लंबे समय से सक्रिय हैं और अल्पसंख्यक मुद्दों पर काम कर रहे हैं। चुनाव की तैयारी में सभी उम्मीदवार नामांकन प्रक्रिया में जुटे हैं। गोपालगंज-3 सीट पर कई दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी से मुकाबला रोचक होगा। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति चुनाव के प्रमुख मुद्दों में से एक है। 2024 के बाद से दर्ज घटनाओं में मंदिरों, घरों और संपत्तियों पर हमले प्रमुख हैं। कुछ घटनाओं में हत्याएं और यौन उत्पीड़न भी शामिल हैं। अंतरिम सरकार ने कई मामलों में कार्रवाई की लेकिन समुदायों में सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।
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