लापता बच्चे की मौत से इलाके में कोहराम, पिता ने जताई गला घोंटकर हत्या की आशंका

पुलिस द्वारा शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शुरुआती जांच में पुलिस इस मामले को दुर्घटना और हत्या दोनों ही दृष्टिकोणों से देख रही है। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया है, जो पिता के गला घोंट

May 10, 2026 - 22:51
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लापता बच्चे की मौत से इलाके में कोहराम, पिता ने जताई गला घोंटकर हत्या की आशंका
लापता बच्चे की मौत से इलाके में कोहराम, पिता ने जताई गला घोंटकर हत्या की आशंका
  • मुरादाबाद में सनसनी: निर्माणाधीन मकान के गटर में मिला सात वर्षीय मासूम का शव
  • पुलिस जांच में उलझी गुत्थी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के दावों के बीच फंसा मामला

मुरादाबाद जनपद के मझोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक घनी आबादी वाले इलाके में उस समय हड़कंप मच गया, जब चार दिनों से लापता एक सात वर्षीय मासूम बच्चे का शव पड़ोस के ही एक निर्माणाधीन मकान के गटर (सेप्टिक टैंक) में उतराता हुआ पाया गया। मृतक की पहचान हसन के रूप में हुई है, जो पिछले कई दिनों से रहस्यमय परिस्थितियों में अपने घर के बाहर से गायब था। परिजनों ने उसे हर संभावित स्थान पर ढूंढा, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका था। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा और शव को कब्जे में लेकर छानबीन शुरू की। इस हृदयविदारक घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।

परिजनों का आरोप है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दी गई हत्या है। बच्चे के पिता ने पुलिस को दिए अपने बयान में स्पष्ट रूप से आशंका जताई है कि उनके पुत्र की गला घोंटकर हत्या की गई है और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को निर्माणाधीन मकान के गटर में फेंक दिया गया। पिता का तर्क है कि बच्चा इतना छोटा नहीं था कि वह अचानक गटर में गिर जाए और शोर न मचाए। साथ ही, उन्होंने कुछ संदिग्ध व्यक्तियों पर भी उंगली उठाई है, जिनसे उनका पूर्व में विवाद चल रहा था। पुलिस ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले की गहराई से पड़ताल शुरू कर दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि बच्चे के अंतिम समय की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

निर्माणाधीन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी

अक्सर देखा गया है कि शहरी इलाकों में निर्माणाधीन मकानों के सेप्टिक टैंक या गहरे गड्ढों को खुला छोड़ दिया जाता है। यह लापरवाही न केवल बच्चों के लिए जानलेवा साबित होती है, बल्कि असामाजिक तत्वों को भी अपराध छुपाने का सुरक्षित स्थान प्रदान करती है। स्थानीय प्रशासन को ऐसे स्थलों पर बैरिकेडिंग और उचित कवर सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश देने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

पुलिस द्वारा शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शुरुआती जांच में पुलिस इस मामले को दुर्घटना और हत्या दोनों ही दृष्टिकोणों से देख रही है। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया है, जो पिता के गला घोंटकर मारने के दावों से विपरीत प्रतीत होता है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि वे केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर ही निर्भर नहीं हैं। फॉरेंसिक टीम ने भी घटना स्थल से नमूने एकत्र किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चा खुद वहां गिरा या उसे धक्का दिया गया। पुलिस क्षेत्राधिकारी के अनुसार, सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है और यदि किसी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिजनों की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बार-बार एक ही सवाल पूछ रही है कि उसके मासूम बच्चे की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती थी। पड़ोसियों का कहना है कि हसन एक मिलनसार और चंचल बालक था, जो अक्सर घर के आसपास ही खेलता रहता था। चार दिन पहले जब वह शाम के समय घर नहीं लौटा, तभी से अनहोनी का डर सताने लगा था। पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि उसका अंत इतना दर्दनाक होगा। निर्माणाधीन मकान के मालिक से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उसने गटर को खुला रखा था और क्या वहां कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था।

इस घटना ने क्षेत्र में पुलिस की गश्त और लापता बच्चों की तलाश के लिए अपनाए जाने वाले तंत्र पर भी सवाल उठा दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुलिस ने लापता होने की रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई होती और आसपास के निर्माणाधीन परिसरों की तलाशी ली होती, तो शायद परिणाम कुछ और हो सकता था। हालांकि, पुलिस प्रशासन का दावा है कि उन्होंने तलाश अभियान चलाया था, लेकिन घनी आबादी और संकरी गलियों के कारण बाधाएं उत्पन्न हुईं। वर्तमान में, पुलिस उन मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाल रही है जो घटना के समय उस क्षेत्र में सक्रिय थे, ताकि किसी भी बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी का सुराग मिल सके। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या बच्चे को किसी लालच में वहां ले जाया गया था। घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए कुछ संदेह पैदा हो रहे हैं, क्योंकि गटर का ढक्कन भारी था और एक सात साल के बच्चे के लिए उसे हटाना या वहां तक पहुंचना सहज नहीं लग रहा है। यही कारण है कि पिता के दावों को पूरी तरह से नकारा नहीं जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि आक्रोशित भीड़ कोई हिंसक कदम न उठाए।

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