देश- विदेश: साइप्रस में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, लिमासोल में भारतीय प्रवासियों ने उत्साह के साथ की मुलाकात।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की शुरुआत 15 जून 2025 को लिमासोल में भारतीय प्रवासियों...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की शुरुआत 15 जून 2025 को लिमासोल में भारतीय प्रवासियों के गर्मजोशी भरे स्वागत के साथ की। यह यात्रा 23 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की साइप्रस की पहली यात्रा है, जो भारत और साइप्रस के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। लिमासोल के एक होटल में पहुंचने पर भारतीय प्रवासियों ने पीएम मोदी का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। कुछ ने उनके पैर छुए, कुछ ने सेल्फी ली, और कई ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए। इस मुलाकात का एक वीडियो, जिसे समाचार एजेंसी ANI ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किया, सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें पीएम मोदी प्रवासियों के साथ बातचीत करते और उनका अभिवादन करते नजर आ रहे हैं। यह यात्रा भारत के तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है, जिसमें कनाडा और क्रोएशिया भी शामिल हैं।
- साइप्रस में पीएम मोदी का आगमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जून 2025 को सुबह लारनाका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स ने उनका व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। यह विशेष स्वागत भारत और साइप्रस के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक माना गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “हमारे साइप्रस के साथ संबंध ऐतिहासिक, गर्मजोशी भरे और स्थायी हैं। हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का स्वागत राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स द्वारा किया जाना इस बात का प्रतीक है कि हमारे संबंध कितने मजबूत हैं।” लारनाका हवाई अड्डे पर औपचारिक स्वागत के बाद, पीएम मोदी लिमासोल पहुंचे, जहां भारतीय प्रवासियों ने उनका उत्साहपूर्वक स्वागत किया। लिमासोल, साइप्रस का एक प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र, भारतीय प्रवासियों का एक महत्वपूर्ण समुदाय है, जो इस अवसर पर उत्साह से भरा हुआ था। प्रवासियों ने तिरंगे झंडों, पारंपरिक गीतों और नारों के साथ पीएम मोदी का स्वागत किया। एक प्रवासी, नरेंद्र, ने ANI को बताया, “यह मेरी बेटी है। प्रधानमंत्री मोदी ने उसे आशीर्वाद दिया। हम बहुत खुश हैं। यह हमारे लिए जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है।”
- लिमासोल में भारतीय प्रवासियों के साथ मुलाकात
लिमासोल के होटल में पीएम मोदी ने भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत की, जो उनके स्वागत के लिए सुबह से ही इकट्ठा थे। वीडियो में दिखाई देता है कि पीएम मोदी ने प्रवासियों को गुलदस्ते स्वीकार किए, उनके साथ अभिवादन का आदान-प्रदान किया और उनके उत्साह की सराहना की। एक बच्चे के सिर पर 'मोदी' लिखा हुआ दिखाई दिया, जबकि कई प्रवासियों ने उनके सम्मान में कविताएं लिखी थीं। प्रवासियों ने 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए, जिससे माहौल उत्सवमय हो गया। एक प्रवासी, दीपाली, ने ANI को बताया, “हम बहुत उत्साहित हैं। हम उनसे बहुत प्रेरणा लेते हैं। हमें यहां मौका मिला, यह हमारा सौभाग्य है।” एक अन्य प्रवासी, कविता जैन, ने कहा, “मैंने उनके लिए कुछ पंक्तियां लिखी हैं। हम आपकी अगुवाई में किए गए हर ऑपरेशन पर गर्व करते हैं। हमें समझ आया है कि आपके जैसा नेता हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है।” एक अन्य प्रवासी ने कहा, “पीएम मोदी के आने से साइप्रस अब विश्व प्रसिद्ध हो जाएगा।” पीएम मोदी ने इस गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए भारतीय समुदाय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “मैं भारतीय समुदाय के स्नेह के लिए आभारी हूं। भारत आने वाले समय में साइप्रस के साथ संबंधों को और गहरा करने के लिए काम करता रहेगा।” इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
- साइप्रस यात्रा का महत्व
पीएम मोदी की यह यात्रा साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स के निमंत्रण पर हो रही है और यह 23 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली साइप्रस यात्रा है। इससे पहले, 1982 में इंदिरा गांधी और 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी ने साइप्रस का दौरा किया था। यह यात्रा भारत और साइप्रस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, विशेष रूप से व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, और सुरक्षा के क्षेत्र में। साइप्रस, जो यूरोपीय संघ का सदस्य है और 1 जनवरी 2026 से यूरोपीय संघ परिषद की घूर्णन अध्यक्षता संभालेगा, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।
लिमासोल में, पीएम मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने एक बिजनेस राउंडटेबल में भाग लिया, जिसमें दोनों देशों के उद्यमियों ने हिस्सा लिया। इस राउंडटेबल में डेटा, इनोवेशन, डिजिटल भुगतान, जहाज निर्माण, और बंदरगाहों जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “यह बिजनेस राउंडटेबल भारत-साइप्रस व्यापार साझेदारी को मजबूत करने के लिए विचारों पर चर्चा करेगा।” इसके बाद, दोनों नेताओं ने एक अनौपचारिक कार्यकारी रात्रिभोज में हिस्सा लिया। 16 जून को, पीएम मोदी निकोसिया में राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह में शामिल होंगे, जहां उन्हें साइप्रस का सर्वोच्च सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकरिओस III' प्रदान किया जाएगा। इसके बाद, दोनों नेताओं के बीच निजी मुलाकात और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों, भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी, और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
- भारत-साइप्रस संबंध
भारत और साइप्रस के बीच राजनयिक संबंध 1962 में स्थापित हुए थे, और साइप्रस ने कश्मीर, सीमा पार आतंकवाद, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दों पर भारत का लगातार समर्थन किया है। साइप्रस के पूर्व राष्ट्रपति निकोस अनास्तासियादेस ने 2017 में भारत का दौरा किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग में वृद्धि हुई। पीएम मोदी की यह यात्रा उस साझेदारी को और मजबूत करने का एक प्रयास है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जो इस यात्रा में पीएम मोदी के साथ हैं, ने लारनाका हवाई अड्डे पर अपने समकक्ष कॉन्स्टेंटिनोस कोमबोस से मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “लारनाका में साइप्रस के विदेश मंत्री @ckombos से मुलाकात करके खुशी हुई। मुझे विश्वास है कि पीएम @narendramodi की साइप्रस यात्रा हमारे दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों और भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी को गहरा करेगी।” साइप्रस के राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री @narendramodi का साइप्रस में स्वागत है! यह यूरोपीय संघ के दक्षिण-पूर्वी सीमांत और भूमध्यसागरीय प्रवेश द्वार पर एक ऐतिहासिक यात्रा है। यह भारत-साइप्रस साझेदारी में एक नया अध्याय है।”
लिमासोल में भारतीय प्रवासियों का उत्साह देखते ही बनता था। कई प्रवासियों ने पीएम मोदी के स्वागत के लिए विशेष तैयारी की थी। एक प्रवासी ने कहा, “मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमें उनके साथ समय बिताने का मौका मिला।” प्रवासियों ने पारंपरिक गीत गाए, नृत्य प्रस्तुत किए, और तिरंगे झंडों के साथ उत्सव का माहौल बनाया। एक बच्चे ने अपने सिर पर 'मोदी' लिखवाकर अपने उत्साह को व्यक्त किया। भारत के उच्चायुक्त मनीष ने कहा, “यह यात्रा कई कारणों से ऐतिहासिक है। दो दशक से अधिक समय के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का साइप्रस आना अपने आप में एक बड़ा अवसर है। मुझे लगता है कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, और निवेश में महत्वपूर्ण परिणाम होंगे।” पीएम मोदी की यह यात्रा तीन देशों के दौरे का हिस्सा है, जिसमें साइप्रस के बाद कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन (16-17 जून) और क्रोएशिया की पहली आधिकारिक यात्रा (18 जून) शामिल है। साइप्रस की यात्रा को न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि भारत की क्षेत्रीय रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह यात्रा अप्रैल 2025 में भारत के पहलगाम गांव पर हुए हमले, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' कहा गया, के बाद तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों के जवाब में एक रणनीतिक कदम के रूप में भी देखी जा रही है। साइप्रस, जो 1974 से तुर्की के कब्जे वाले उत्तरी हिस्से के मुद्दे से जूझ रहा है, ने उस हमले की निंदा की थी और इसे यूरोपीय संघ स्तर पर उठाने की बात कही थी।
Also Read- देश- विदेश- दुबई: मरीना पिनेकल टावर में भीषण आग, 3,820 लोगों की सुरक्षित निकासी, कोई हताहत नहीं।
- यात्रा का पहला दिन
लिमासोल में बिजनेस राउंडटेबल के बाद, पीएम मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने एक अनौपचारिक रात्रिभोज में हिस्सा लिया, जिसमें दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा हुई। इस दौरान डिजिटल कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। 16 जून को, पीएम मोदी निकोसिया में राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स के साथ औपचारिक वार्ता करेंगे और बिजनेस लीडर्स को संबोधित करेंगे। इस यात्रा से भारत और साइप्रस के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, विशेष रूप से डिजिटल भुगतान, जहाज निर्माण, और बंदरगाह विकास जैसे क्षेत्रों में।पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा का पहला दिन भारतीय प्रवासियों के उत्साह और दोनों देशों के नेताओं के बीच गर्मजोशी भरे स्वागत के साथ समाप्त हुआ।
What's Your Reaction?







