केदारनाथ पैदल मार्ग पर भारी बारिश और भूस्खलन, एक यात्री की मौत, सोनप्रयाग से यात्रा अगले आदेश तक स्थगित।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा को भारी बारिश और भूस्खलन के कारण अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। गौरीकुंड ...
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा को भारी बारिश और भूस्खलन के कारण अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक 19 किलोमीटर के पैदल मार्ग पर जंगलचट्टी के पास मूसलाधार बारिश के कारण गदेरे में मलबा और पत्थर आने से मार्ग अवरुद्ध हो गया। इस हादसे में एक यात्री की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। रुद्रप्रयाग पुलिस और प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम की यात्रा पर रोक लगा दी है। राहत और बचाव दल मार्ग को साफ करने और फंसे यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। मौसम विभाग ने क्षेत्र में पूरे सप्ताह भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। 15 जून 2025 को सुबह से रुद्रप्रयाग जिले में मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने केदारनाथ घाटी के हालात को और जटिल बना दिया।
जंगलचट्टी के पास एक बरसाती गदेरा उफान पर आ गया, जिसके साथ भारी मात्रा में मलबा और पत्थर पैदल मार्ग पर जमा हो गए। रुद्रप्रयाग पुलिस के अनुसार, इस मलबे और पत्थरों की चपेट में आने से एक यात्री की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य यात्री घायल हो गए। घायलों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, और पुलिस इसकी जांच कर रही है।हादसे का एक वीडियो, जो NDTV इंडिया द्वारा अपने एक्स हैंडल पर साझा किया गया, सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में जंगलचट्टी क्षेत्र में मलबे से अवरुद्ध पैदल मार्ग और तेज बारिश के कारण बिगड़े हालात साफ दिखाई दे रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के समय कई यात्री पैदल मार्ग पर थे, और अचानक मलबा आने से अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्रियों ने भागकर अपनी जान बचाई, जबकि कुछ मलबे की चपेट में आ गए।
- केदारनाथ यात्रा पर रोक
हादसे के बाद, रुद्रप्रयाग प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया। रुद्रप्रयाग पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक बयान जारी कर कहा, “जंगलचट्टी के पास गदेरे में मलबा और पत्थर आने से केदारनाथ धाम जाने वाला पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा अग्रिम आदेश तक स्थगित कर दी गई है।” पुलिस ने यात्रियों से अपील की कि वे जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें और नजदीकी होटलों या लॉज में ठहरें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। जंगलचट्टी सहित पैदल मार्ग के कई हिस्से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में आते हैं, और लगातार बारिश के कारण इन क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। पुलिस ने उन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए टीमें तैनात की हैं, जो हादसे से पहले केदारनाथ के लिए रवाना हो चुके थे। इनमें से कई यात्रियों को पुलिस सुरक्षा में जंगलचट्टी से नीचे सुरक्षित स्थानों पर लाया जा रहा है।
- मौसम की स्थिति और अलर्ट
मौसम विभाग ने रुद्रप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों के लिए 15 जून से पूरे सप्ताह के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और मानसून की सक्रियता के कारण उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। रुद्रप्रयाग जिले में पिछले 48 घंटों से लगातार बारिश हो रही है, जिसने नदियों और गदेरों के जलस्तर को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। मौसम विभाग के इस अलर्ट के बाद, प्रशासन ने यात्रियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि बारिश के कारण पैदल मार्ग के कई हिस्सों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है, खासकर जंगलचट्टी, चीरबासा, और लिनचोली जैसे क्षेत्रों में। प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम से मौसम की जानकारी लें और निर्देशों का पालन करें। हादसे की सूचना मिलते ही रुद्रप्रयाग प्रशासन, पुलिस, और आपदा प्रबंधन टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मलबे को हटाने और मार्ग को बहाल करने में जुटी हैं। हालांकि, लगातार बारिश के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। पुलिस ने बताया कि जंगलचट्टी क्षेत्र में फंसे यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। जिला प्रशासन ने सोनप्रयाग और गौरीकुंड में अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां रुके हुए यात्रियों को भोजन, पानी, और आश्रय प्रदान किया जा रहा है। प्रशासन ने स्थानीय होटल और लॉज संचालकों से भी सहयोग मांगा है ताकि यात्रियों को ठहरने में कोई असुविधा न हो। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है, और मौसम साफ होने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
- केदारनाथ यात्रा का महत्व और प्रभाव
केदारनाथ धाम, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस वर्ष 10 मई 2025 को कपाट खुलने के बाद से अब तक लगभग 7 लाख यात्री केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। गौरीकुंड से केदारनाथ तक का 19 किलोमीटर का पैदल मार्ग चुनौतीपूर्ण है, और मानसून के दौरान भूस्खलन और मलबे की घटनाएं आम हैं। जंगलचट्टी, जो इस मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, अक्सर भूस्खलन से प्रभावित होता है। इस हादसे के कारण हजारों यात्री सोनप्रयाग, गौरीकुंड, और गुप्तकाशी में रुके हुए हैं। कई यात्रियों ने बताया कि वे बाबा केदार के दर्शन के लिए लंबी दूरी तय करके आए थे, लेकिन अब उन्हें अनिश्चितकालीन इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन ने यात्रियों से धैर्य बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन और मलबे की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। 16-17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई थी, आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। उस आपदा के बाद प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा उपायों को बढ़ाया, जिसमें भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज सिस्टम, और चेतावनी बोर्ड लगाना शामिल है। इसके बावजूद, मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। 21 जुलाई 2024 को चीरबासा के पास मलबा गिरने से तीन यात्रियों की मौत और पांच के घायल होने की घटना भी हाल की है। इस घटना के बाद प्रशासन ने यात्रियों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए और मौसम की जानकारी लेने की सलाह दी थी। जंगलचट्टी और चीरबासा जैसे क्षेत्रों में पत्थर गिरने की संभावना बनी रहती है, जिसके लिए प्रशासन ने नियमित निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था की है। रुद्रप्रयाग पुलिस ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। पुलिस ने पैदल मार्ग पर तैनात चौकियों को अलर्ट पर रखा है और यात्रियों की निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग शुरू किया है। सोनप्रयाग में यात्रियों के लिए अस्थायी चिकित्सा सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं। पुलिस ने अपने एक्स हैंडल पर अपडेट साझा करते हुए कहा, “केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं से अपील है कि वे जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें और निकटवर्ती होटलों में ठहरें।”
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मलबे को हटाने का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन बारिश के कारण इसमें देरी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा को दोबारा शुरू करने का निर्णय मौसम की स्थिति और मार्ग की सुरक्षा का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा। प्रशासन ने यात्रियों के लिए हेल्पलाइन नंबर 01364-233989 और 7579253456 जारी किए हैं, जिन पर मौसम और यात्रा की जानकारी ली जा सकती है। हादसे में घायल दो यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद रुद्रप्रयाग के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों ने बताया कि दोनों की हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है। मृतक का शव मलबे से निकाला गया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने मृतक के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश शुरू कर दी है। 15 जून 2025 की देर शाम तक जंगलचट्टी क्षेत्र में बारिश का सिलसिला जारी था, जिसके कारण बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सोनप्रयाग में रुके हुए यात्रियों को प्रशासन द्वारा भोजन और आश्रय प्रदान किया जा रहा है। NDRF और SDRF की टीमें रातभर मार्ग को साफ करने और फंसे यात्रियों को निकालने में जुटी रहीं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मौसम साफ होने और मार्ग की मरम्मत के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।
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