भारत-इटली कूटनीति का नया अध्याय: रोम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी ने मिलकर रोपा दोस्ती का पौधा, तस्वीरें आईं सामने।
रोम में भारत और इटली के कूटनीतिक संबंध एक ऐतिहासिक और बेहद खास मोड़ पर पहुंच गए हैं, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का वैश्विक विस्तार: रोम के ऐतिहासिक विला डोरिया पमफिली में लगाया गया 'कृष्णा तूत' का अनूठा पौधा
- विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदला भारत और इटली का रिश्ता: द्विपक्षीय व्यापार, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बनी ऐतिहासिक सहमति
रोम में भारत और इटली के कूटनीतिक संबंध एक ऐतिहासिक और बेहद खास मोड़ पर पहुंच गए हैं, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक साथ मिलकर एक पौधा लगाया। यह आयोजन केवल एक सामान्य पौधरोपण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह दोनों देशों के बीच लगातार प्रगाढ़ होते और गहरे होते संबंधों का एक जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। इस खास अवसर की जो तस्वीरें सोशल मीडिया और विभिन्न वैश्विक मंचों पर सामने आई हैं, उनमें दोनों नेताओं के बीच की गजब की गर्मजोशी, आपसी तालमेल और एक मजबूत कूटनीतिक सामंजस्य साफ तौर पर देखा जा सकता है। इस कूटनीतिक यात्रा के दौरान रोम का माहौल दोनों देशों की मित्रता की नई कहानी बयां कर रहा था, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति वैश्विक जिम्मेदारी और द्विपक्षीय हितों को एक साथ जोड़ने का अनूठा प्रयास साफ नजर आया। इस दृश्य ने न केवल दोनों देशों के नागरिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत और इटली की इस बढ़ती नजदीकी को एक बड़े और सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
इस बेहद महत्वपूर्ण और भव्य आयोजन के दौरान दोनों वैश्विक नेताओं ने रोम के ऐतिहासिक और बेहद खूबसूरत विला डोरिया पमफिली परिसर में ब्लैक मलबरी यानी काले शहतूत का एक पौधा रोपा, जिसे भारतीय संस्कृति और परंपरा में 'कृष्णा तूत' के नाम से भी जाना जाता है। इस विशिष्ट पौधे का चयन बेहद सोच-समझकर किया गया था, क्योंकि शहतूत का पेड़ अपने औषधीय गुणों, बेहतरीन स्वाद और सांस्कृतिक महत्व के लिए भारत और इटली दोनों ही देशों के इतिहास और जनजीवन में एक बहुत ही खास स्थान रखता है। यह संयुक्त पौधरोपण भारत में बड़े पैमाने पर चल रहे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का एक वैश्विक विस्तार भी है, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरी दुनिया में पर्यावरण के प्रति चेतना जगाना, प्रकृति का सम्मान करना और सतत जीवन शैली को बढ़ावा देना है। मिट्टी में पौधे को लगाने से लेकर उसे पानी देने तक, दोनों प्रधानमंत्रियों के चेहरों पर तैरती मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि दोनों राष्ट्र अपने संबंधों की इस नई पौध को बहुत ही सहेजकर और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
एक पेड़ मां के नाम अभियान का वैश्विक संदेश
भारत की धरती से शुरू हुआ पर्यावरण संरक्षण का यह महाअभियान अब रोम की ऐतिहासिक धरती तक पहुंच चुका है। ब्लैक मलबरी या कृष्णा तूत का यह पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत और इटली की अटूट दोस्ती और साझा वैश्विक पर्यावरण लक्ष्यों का एक अमर प्रतीक बनकर विला डोरिया पमफिली में हमेशा लहराता रहेगा।
इस ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच केवल पर्यावरण और संस्कृति के स्तर पर ही बात नहीं हुई, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी एक बहुत बड़ा फैसला लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने दोनों देशों के आपसी संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को अब एक नए और ऊंचे स्तर पर ले जाते हुए 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' में बदलने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इस नए कूटनीतिक दर्जे के तहत दोनों देशों के बीच विभिन्न बहुपक्षीय मंचों और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के इतर हर साल राष्ट्राध्यक्षों के स्तर पर वार्षिक बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व को लगातार संवाद बनाए रखने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच नियमित रूप से मंत्रालयों और विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थागत स्तरों पर भी समीक्षा बैठकें आयोजित करने पर पूरी सहमति बनी है, ताकि दोनों देशों के बीच होने वाले तमाम समझौतों और साझा योजनाओं को बिना किसी देरी के धरातल पर उतारा जा सके।
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और महत्वपूर्ण तकनीकों सहित सांस्कृतिक और जन-जन के बीच जुड़ाव जैसे तमाम महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर बेहद व्यापक और गंभीर चर्चा की। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 के तहत अब तक हुई प्रगति की विस्तार से समीक्षा की और इस बात पर गहरी संतुष्टि जताई कि दोनों देश सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस पूरी कार्य योजना की प्रगति की लगातार और समयबद्ध निगरानी करने के लिए दोनों देशों ने मिलकर विदेश मंत्री स्तर का एक बिल्कुल नया तंत्र स्थापित करने का फैसला किया है, जो समय-समय पर इस रणनीतिक कार्य योजना के तहत हो रहे विकास कार्यों की बारीकी से समीक्षा करेगा। इस नए तंत्र के बनने से दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे प्रोजेक्ट्स को और अधिक गति मिलेगी और नौकरशाही की वजह से होने वाली किसी भी संभावित देरी को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकेगा।
दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए वाणिज्यिक मोर्चे पर भी इस बैठक के दौरान कई अभूतपूर्व कदम उठाए गए, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के उद्यमियों को बड़े अवसर मिलेंगे। भारत और इटली ने मिलकर साल 2029 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का एक बहुत ही बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे पूरा करने के लिए दोनों पक्ष हर संभव प्रयास करने को तैयार हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया और इसके जल्द से जल्द क्रियान्वयन की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और गति देने के लिए रक्षा, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा परिवर्तन, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख और उभरते हुए क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत और इटली के चुनिंदा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ भी एक विशेष बैठक आयोजित की गई, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाया जा सके।
बदलते वैश्विक परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में आ रहे गहरे बदलावों के बीच भारत और इटली की इस मजबूत होती जुगलबंदी को दुनिया भर के नीति नियंताओं द्वारा बहुत ही बारीकी से देखा जा रहा है। दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे समय में भारत और इटली जैसी दो बड़ी आर्थिक ताकतों और लोकतांत्रिक समाजों का एक साथ आना बेहद आवश्यक है। इटली का आर्थिक लचीलापन, उसकी रचनात्मकता और भारत की असीम आर्थिक गतिशीलता, युवा ऊर्जा और विशाल बाजार मिलकर एक ऐसा अनूठा तालमेल बना रहे हैं, जो न केवल इन दोनों देशों के विकास के लिए फायदेमंद है बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए भी बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी यह साझेदारी केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह दो प्राचीन सभ्यताओं के साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।
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