वैश्विक सनसनी: ईरान की IRGC के निशाने पर डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका, हत्या की बड़ी साजिश का अमेरिकी एजेंसियों ने किया पर्दाफाश।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति के गलियारों से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य
- सुलेमानी की मौत का बदला लेने का खौफनाक प्लान: फ्लोरिडा स्थित इवांका ट्रंप के घर का ब्लूप्रिंट लेकर घूम रहा था विदेशी आतंकी
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबोचा गया मोहम्मद अल-सादी, अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार पर हमले की साजिश नाकाम होने से मची खलबली
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति के गलियारों से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिसमें उनकी बेटी इवांका ट्रंप को सीधे तौर पर निशाना बनाने की एक बेहद खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। खुफिया सुरक्षा रिपोर्टों और जांच एजेंसियों से मिल रही जानकारियों के अनुसार, ईरान की सबसे शक्तिशाली और विशिष्ट सैन्य शाखा 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से प्रशिक्षित और समर्थित एक आतंकवादी ने इवांका ट्रंप की हत्या करने की पूरी योजना तैयार की थी। इस वैश्विक साजिश का खुलासा तब हुआ जब संबंधित संदिग्ध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए गए एक गुप्त अभियान के दौरान दबोच लिया गया। इस घटना ने न केवल अमेरिका के भीतर सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है, बल्कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से ही जारी भू-राजनीतिक तनाव को एक बेहद खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुरक्षा जांच से जुड़े आधिकारिक सूत्रों और अदालती दस्तावेजों के माध्यम से जो विवरण सामने आए हैं, उनके मुताबिक इस बेहद संवेदनशील और खतरनाक साजिश को अंजाम देने की जिम्मेदारी 32 वर्षीय एक इराकी नागरिक मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी (जिसे मोहम्मद अल-सादी के नाम से भी जाना जाता है) को सौंपी गई थी। अल-सादी के बारे में बताया जा रहा है कि वह ईरान समर्थित आतंकवादी संगठन 'कतैब हिजबुल्लाह' और एक नए बने प्रॉक्सी समूह 'हरकत अशाब अल-यामीन अल-इस्लामिया' (HIYA) से गहराई से जुड़ा हुआ था। जांचकर्ताओं को इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि इस संदिग्ध ने सीधे तौर पर इवांका ट्रंप को जान से मारने की 'शपथ' ली थी और वह काफी समय से अमेरिका के भीतर उनके ठिकानों और दैनिक गतिविधियों की टोह ले रहा था। सुरक्षा एजेंसियों ने इस आतंकी को तुर्की में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे तुरंत अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया है।
इस पूरी साजिश के पीछे की मुख्य वजह साल 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर इराक के बगदाद में किए गए एक अमेरिकी ड्रोन हमले को माना जा रहा है। उस ड्रोन हमले में ईरान के सबसे ताकतवर और शीर्ष सैन्य कमांडर, कुड्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। सुलेमानी की मौत के बाद से ही ईरान और उससे जुड़े तमाम उग्रवादी संगठन लगातार अमेरिकी नेतृत्व और विशेष रूप से ट्रंप परिवार से बदला लेने की कसमें खा रहे थे। गिरफ्तार संदिग्ध अल-सादी के पास से न केवल इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित आलीशान आवास का विस्तृत नक्शा और ब्लूप्रिंट बरामद हुआ है, बल्कि उसने सोशल मीडिया पर भी खुलेआम धमकियां पोस्ट की थीं कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस या उनके आलीशान महल भी उन्हें इस प्रतिशोध की आग से नहीं बचा पाएंगे। अमेरिकी न्याय विभाग ने संदिग्ध मोहम्मद अल-सादी पर यूरोप और उत्तरी अमेरिका में फैले लगभग 18 अलग-अलग हमलों और हमलों के प्रयासों के समन्वय का आरोप लगाया है। इनमें अमेरिकी राजनयिक केंद्रों और यहूदी धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना भी शामिल था।
संघीय जांचकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, अल-सादी का पालन-पोषण उसकी इराकी मां द्वारा बगदाद में किया गया था, लेकिन बाद में उसे विशेष सैन्य और खुफिया प्रशिक्षण के लिए ईरान की राजधानी तेहरान भेज दिया गया था। वहां उसे IRGC के शीर्ष कमांडरों की देखरेख में हथियारों के संचालन, जासूसी और वीआईपी टारगेट को ट्रैक करने की कठोर ट्रेनिंग दी गई थी। इस संदिग्ध के सोशल मीडिया अकाउंट्स और जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों से ऐसी कई तस्वीरें और दस्तावेज मिले हैं, जिनमें वह सीधे तौर पर कासिम सुलेमानी और उसके उत्तराधिकारी इस्माइल कनी के साथ सैन्य ठिकानों पर रणनीतिक चर्चा करता और नक्शों का विश्लेषण करता हुआ दिखाई दे रहा है। यह बात स्पष्ट रूप से प्रमाणित करती है कि इवांका ट्रंप की हत्या की यह साजिश किसी एक सिरफिरे व्यक्ति का काम नहीं थी, बल्कि इसे एक बेहद संगठित और उच्च स्तरीय राज्य-समर्थित नेटवर्क द्वारा संचालित किया जा रहा था।
इस सुरक्षा खतरे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि संदिग्ध ने फ्लोरिडा के उस विशिष्ट इलाके की सैटेलाइट तस्वीरें और सुरक्षा घेरे का विवरण भी अपने आकाओं के साथ साझा किया था, जहां इवांका ट्रंप अपने पति जारेड कुशनर और बच्चों के साथ निवास करती हैं। अल-सादी ने अपने संदेशों में लिखा था कि वे वर्तमान में केवल निगरानी और विश्लेषण के चरण में हैं और उनका बदला केवल समय की बात है। इवांका ट्रंप, जिन्होंने शादी से पहले रूढ़िवादी यहूदी धर्म अपना लिया था, को इस नेटवर्क द्वारा एक रणनीतिक और वैचारिक टारगेट के रूप में देखा जा रहा था। इस खुलासे के बाद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और राष्ट्रपति परिवार की सुरक्षा में लगी अन्य विशिष्ट एजेंसियों ने इवांका और उनके पूरे परिवार के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार कर दिया है, और उनके यात्रा रूटों की री-प्रोटॉलिंग की जा रही है।
वर्तमान में अमेरिकी न्याय विभाग और खुफिया एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या अल-सादी को अमेरिका के भीतर किसी स्थानीय स्लीपर सेल या जासूसी नेटवर्क से कोई रसद या भौतिक सहायता मिल रही थी। चूंकि उसने हाल के महीनों में लंदन में यहूदी नागरिकों पर हुए हमलों, एम्स्टर्डम में एक अमेरिकी वित्तीय संस्थान की इमारत पर बमबारी और टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास हुई गोलीबारी जैसी हिंसक घटनाओं में भी परोक्ष या अपरोक्ष भूमिका निभाई थी, इसलिए इसे एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय टेरर मॉड्यूल का हिस्सा माना जा रहा है। संदिग्ध को फिलहाल न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बेहद सख्त सुरक्षा और पूरी तरह से एकांत कारावास (सॉलिटरी कन्फाइनमेंट) में रखा गया है, जहां उससे देश की शीर्ष आतंकवाद विरोधी टीमें लगातार पूछताछ कर रही हैं।
इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही जारी भू-राजनीतिक खींचतान को और अधिक तीव्र कर दिया है, और अमेरिकी प्रशासन इस मामले को सीधे तौर पर अपनी संप्रभुता और शीर्ष नेतृत्व पर एक विदेशी हमले की साजिश के रूप में देख रहा है। हालांकि इस पूरे मामले पर ईरानी सरकार या उनकी मुख्य सेना की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन वाशिंगटन के राजनीतिक हलकों में ईरान के खिलाफ और अधिक कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने और उनकी परमाणु व सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस तरह के हाई-प्रोफाइल टारगेट मैपिंग के खुलासे के बाद दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों और अमेरिकी नागरिकों के लिए भी सुरक्षा अलर्ट को अपग्रेड कर दिया गया है।
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