डूरंड रेखा पर फिर गरजी तोपें: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्धविराम खत्म, सीमावर्ती इलाकों में भारी गोलाबारी शुरू।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी 'ओपन वार' (खुली जंग) ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। बुधवार, 25 मार्च 2026 की रात जैसे
- मध्यस्थता की कोशिशें हुईं नाकाम: ईद की मोहलत के बाद फिर आमने-सामने आए पाक-अफगान सैनिक, कुनार और नांगरहार में भारी नुकसान
- खूनी संघर्ष का नया अध्याय: काबुल के अस्पताल पर हमले के बाद भड़की प्रतिशोध की आग, पाकिस्तान ने किया 'खुली जंग' का ऐलान
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी 'ओपन वार' (खुली जंग) ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। बुधवार, 25 मार्च 2026 की रात जैसे ही ईद-उल-फितर के उपलक्ष्य में घोषित पांच दिवसीय अस्थायी युद्धविराम की समय सीमा समाप्त हुई, दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे के ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया। अफगानिस्तान के कुनार प्रांत के अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने सरकानो और नारी जिलों में दर्जनों तोप के गोले दागे हैं, जिसमें कम से कम दो आम नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं। इसके जवाब में अफगान तालिबान की सीमा सुरक्षा टुकड़ियों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की तीन अग्रिम चौकियों को नष्ट करने का दावा किया है। युद्धविराम के टूटने से उन लाखों विस्थापित लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है जो शांति की आस में अपने घरों को लौटने की तैयारी कर रहे थे।
इस भीषण संघर्ष की शुरुआत फरवरी 2026 के अंत में हुई थी, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर तालिबान और टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के ठिकानों पर 'ऑपरेशन गज़ब-लिल-हक' शुरू किया था। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान सरकार टीटीपी के आतंकियों को शरण दे रही है, जो पाकिस्तान के भीतर आत्मघाती हमलों को अंजाम दे रहे हैं। इसके जवाब में अफगान सरकार ने 'रद्द-अल-जुल्म' अभियान शुरू किया और पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर जमीनी हमले तेज कर दिए। मार्च के मध्य तक यह संघर्ष तब चरम पर पहुँच गया जब पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने काबुल, कंधार और पक्तिया जैसे शहरों में रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
16 मार्च 2026 की रात काबुल के 'ओमिद ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर' (नशा मुक्ति केंद्र) पर हुआ हमला इस युद्ध का सबसे काला अध्याय साबित हुआ है। अफगान अधिकारियों का दावा है कि पाकिस्तानी हवाई हमले में इस 2,000 बिस्तरों वाले अस्पताल के तीन बड़े ब्लॉक पूरी तरह नष्ट हो गए, जिससे वहां उपचाराधीन लगभग 400 मरीजों की मौत हो गई। हालांकि पाकिस्तान ने इस आंकड़े को खारिज करते हुए कहा कि उसने केवल आतंकवादियों के गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और सैटेलाइट तस्वीरों ने बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों की पुष्टि की है। इस घटना ने अफगान जनता के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है और तालिबान नेतृत्व अब किसी भी समझौते से पीछे हटता नजर आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि फरवरी 2026 से अब तक इस युद्ध के कारण 1,15,000 से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। अकेले अफगानिस्तान में 289 से अधिक नागरिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। डूरंड रेखा के पास स्थित तोरखम और चमन जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते बंद होने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को हर दिन करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक अफगान तालिबान अपनी धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए रोकना सुनिश्चित नहीं करता, तब तक सैन्य दबाव कम नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान का मानना है कि टीटीपी को मिलने वाला अफगान समर्थन उसके अस्तित्व के लिए खतरा है। दूसरी ओर, काबुल में बैठी सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है। अफगान विदेश मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का ठीकरा पड़ोसी पर फोड़ रहा है। युद्धविराम समाप्त होने के बाद टीटीपी ने भी पाकिस्तान के भीतर नए सिरे से हमले शुरू करने की धमकी दी है, जिससे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है।
सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे मध्यस्थ देश इस समय एक कठिन परिस्थिति में हैं। ईद के दौरान उन्होंने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की थी, लेकिन अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान की संप्रभुता के उल्लंघन और नागरिक ठिकानों पर हमलों की निंदा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह चलता रहा, तो यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है, क्योंकि इसमें शामिल दोनों पक्षों के पास अत्याधुनिक हथियार और ड्रोन तकनीक मौजूद है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाक-अफगान सीमा पर नया युद्ध मोर्चा खुलना वैश्विक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती है।
युद्ध के मैदान से आ रही ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी लड़ाकू विमान एक बार फिर सीमावर्ती क्षेत्रों में उड़ान भर रहे हैं। अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में भी भारी सैन्य आवाजाही देखी गई है। मानवाधिकार संगठनों ने दोनों देशों से तत्काल संयम बरतने और मानवीय गलियारे खोलने की अपील की है ताकि घायल नागरिकों तक मदद पहुँचाई जा सके। फिलहाल, स्थायी युद्धविराम की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है, क्योंकि दोनों ओर से 'खुली जंग' और 'प्रतिशोध' जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। 27 मार्च 2026 की सुबह तक सीमा पर रुक-रुक कर फायरिंग जारी है और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
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