कर्नाटक में दर्दनाक हादसा- कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ आधुनिक खेती अपनाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर की आकाशीय बिजली गिरने से मौत
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के शिकार हुए होसोकलू रोशन बालकृष्ण मूल रूप से कोडागु जिले के रहने वाले थे, लेकिन उनका परिवार बेंगलुरु के जलाहल्ली स्थित एक बहुमंजिला अपार्टमेंट में निवास करता है। रोशन एक जानी-मानी आईटी कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत थे, लेकिन उ
- मजबूत करियर को अलविदा कहकर खेतों में तकनीक का नया सवेरा लाने की कोशिश कर रहे युवा की जिंदगी का दुखद अंत
- प्रकृति का कहर: मैसूर के पास खेत का निरीक्षण करने गए टेक इंजीनियर पर गिरी बिजली, मौके पर ही थमी सांसें
कर्नाटक के मैसूर जिले से एक बेहद ही हृदयविदारक और स्तब्ध कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। बेंगलुरु में सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र के एक बड़े पद पर काम करने वाले 43 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर होसोकलू रोशन बालकृष्ण की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से असमय मौत हो गई है। यह दुखद हादसा मैसूर के बाहरी इलाके में स्थित येलवाल के पास तब हुआ जब वे अपने परिवार के साथ एक कृषि भूमि का निरीक्षण करने के लिए गए हुए थे। अपनी मेहनत और लगन से कॉर्पोरेट जगत में एक मुकाम हासिल करने के बाद भी मिट्टी से जुड़ाव रखने वाले इस युवा का इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को गहरे सदमे में डाल गया है। प्रकृति के इस भयावह रूप ने एक ही झटके में हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के शिकार हुए होसोकलू रोशन बालकृष्ण मूल रूप से कोडागु जिले के रहने वाले थे, लेकिन उनका परिवार बेंगलुरु के जलाहल्ली स्थित एक बहुमंजिला अपार्टमेंट में निवास करता है। रोशन एक जानी-मानी आईटी कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत थे, लेकिन उनका मन हमेशा से अपनी पारंपरिक जमीन और खेती-किसानी में रमता था। इसी वजह से वे हाइब्रिड वर्क मॉडल के तहत बेंगलुरु में अपनी आईटी की नौकरी को संभालने के साथ-साथ कोडागु में अपने परिवार के कॉफी बागान का प्रबंधन भी बहुत ही कुशलता से देख रहे थे। वे लगातार इस कोशिश में जुटे थे कि किस तरह आधुनिक तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल करके खेती को और अधिक उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाया जा सके। खेती को लेकर उनका यही समर्पण उन्हें मैसूर के पास स्थित खेत तक खींच लाया था।
घटना वाले दिन शाम को करीब 5 बजे से 5 बजकर 30 मिनट के बीच रोशन अपने परिवार के साथ मैसूर-मडिकेरी मार्ग पर स्थित येलवाल के पास रुके थे, जहां सड़क के किनारे ही उनकी अपनी एक कृषि भूमि मौजूद है। रोशन अपने परिजनों के साथ इसी धान के खेत और जमीन का मुआयना करने के लिए वहां गए हुए थे। निरीक्षण का काम पूरा करने के बाद जब वे खेत के पास ही खड़े एक आम के पेड़ के पास गए, तभी अचानक मौसम ने बहुत तेजी से करवट ली। आसमान में घने काले बादल छा गए और बिना संभलने का मौका दिए एक बेहद तेज गर्जना के साथ सीधे रोशन के कंधे पर आकाशीय बिजली आ गिरी। बिजली का झटका इतना जोरदार था कि रोशन उसी वक्त बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े, जबकि उनके साथ मौजूद एक अन्य साथी को भी मामूली झटका लगा लेकिन वे बाल-बाल बच गए। जब भी आसमान में आंधी-तूफान या भारी बारिश के आसार हों, तो कभी भी खुले खेतों में या किसी ऊंचे पेड़ के नीचे शरण नहीं लेनी चाहिए। ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में ऊंचे पेड़ और पानी के स्रोत बिजली को अपनी तरफ तेजी से आकर्षित करते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और बदहवास परिवार के सदस्यों ने बिना एक पल गंवाए स्थानीय लोगों की मदद से रोशन को नजदीकी एनजी अस्पताल पहुंचाया। वहां प्राथमिक जांच के दौरान डॉक्टरों को उनके शरीर में जीवन के कोई लक्षण नजर नहीं आए, जिसके बाद उन्हें तुरंत मैसूर स्थित श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च अस्पताल ले जाया गया। वहां गहन जांच करने के बाद डॉक्टरों ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट कर दिया कि रोशन को अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। इस खबर को सुनते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पुलिस ने इस पूरे मामले में कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए केआर अस्पताल भेज दिया और इस संबंध में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
रोशन के पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो वे एक बेहद सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखते थे, उनके दिवंगत पिता आबकारी विभाग में एक सेवानिवृत्त अधिकारी थे जिनका 2 साल पहले ही देहांत हुआ था, जबकि उनकी मां एक सेवानिवृत्त नर्सिंग सुपरवाइजर हैं। रोशन अपने पीछे अपनी पत्नी और कक्षा 9 में पढ़ने वाले एक इकलौते बेटे को छोड़ गए हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। रोशन अपनी मुख्य कॉर्पोरेट नौकरी के साथ-साथ आधुनिक कृषि उपकरणों को बढ़ावा देने और उनकी मार्केटिंग करने के काम में भी सक्रिय रूप से दिलचस्पी ले रहे थे ताकि स्थानीय किसानों को इसका लाभ मिल सके। उनका अंतिम संस्कार कोडागु के हेरावानडु गांव में किया गया, जहां उनका पुश्तैनी कॉफी का बागान स्थित है। एक होनहार इंजीनियर और नई सोच वाले प्रगतिशील किसान का इस तरह चले जाना समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है।
सरकारी और पर्यावरण संबंधी आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक के मैसूर, मांड्या और चामराजनगर जैसे जिलों में पिछले कुछ सालों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2011 से लेकर साल 2023 के बीच केवल इसी क्षेत्र में लगभग 40 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जिसमें से अकेले मैसूर जिले में 16 मौतें दर्ज की गई हैं। साल 2026 में ही मई महीने तक मैसूर में बिजली गिरने से मौत का यह तीसरा बड़ा मामला सामने आया है। पूरे कर्नाटक राज्य की स्थिति को देखें तो इसी समयावधि के दौरान 946 लोगों की मौत बिजली गिरने के कारण हुई है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोग और खेतों में काम करने वाले किसान इस प्राकृतिक आपदा के सबसे आसान शिकार बनते हैं क्योंकि वे मौसम खराब होने पर अक्सर पेड़ों का सहारा ले लेते हैं।
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