न्याय के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ी अनाथ युवती- प्रशासनिक बेरुखी के खिलाफ भड़का आक्रोश, करीब पचास फीट की ऊंचाई से कूदकर जान देने की दी धमकी।

उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद के अंतर्गत आने वाले महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर इलाके में गुरुवार की सुबह उस वक्त हड़कंप

May 21, 2026 - 14:36
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न्याय के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ी अनाथ युवती- प्रशासनिक बेरुखी के खिलाफ भड़का आक्रोश, करीब पचास फीट की ऊंचाई से कूदकर जान देने की दी धमकी।
न्याय के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ी अनाथ युवती- प्रशासनिक बेरुखी के खिलाफ भड़का आक्रोश, करीब पचास फीट की ऊंचाई से कूदकर जान देने की दी धमकी।
  • फतेहपुर से छह किलोमीटर पैदल चलकर कानपुर सीमा में दाखिल हुई पीड़ित बबली- दबंगों द्वारा पैतृक दो बीघा जमीन पर जबरन कब्जे और पुलिस की निष्क्रियता से थी बेहद आहत
  • चकेरी एसीपी और महाराजपुर पुलिस बल ने संभाला मोर्चा- घंटों चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासनिक आश्वासन और पैतृक भूमि की पैमाइश के वादे पर नीचे उतरी युवती

उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद के अंतर्गत आने वाले महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर इलाके में गुरुवार की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया और कूटनीतिक व प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई, जब एक तेईस वर्षीय युवती न्याय न मिलने से क्षुब्ध होकर एक ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। सुबह लगभग पांच बजे के करीब जब ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकले, तो उन्होंने टावर की अत्यधिक ऊंचाई पर एक युवती को बैठे हुए देखा, जो वहां से जोर-जोर से चिल्ला रही थी और नीचे कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की बात कह रही थी। देखते ही देखते यह खबर पूरे क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई और मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। युवती का आरोप था कि वह अपनी पैतृक संपत्ति को बचाने के लिए थानों से लेकर जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय तक के चक्कर काट चुकी है, लेकिन हर जगह से उसे केवल कोरे आश्वासन और दुत्कार ही हाथ लगी है। इस प्रशासनिक बेरुखी और व्यवस्था के कड़े रवैये से तंग आकर उसने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला किया, जिसने स्थानीय पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए।

इस पूरे दुखद और झकझोर देने वाले घटनाक्रम की जड़ें पड़ोसी जिले फतेहपुर के औंग थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मिरांई गांव से जुड़ी हुई हैं, जहां रहने वाले एक अत्यंत गरीब और अनाथ परिवार को व्यवस्था के दंश ने इस कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। पीड़ित युवती बबली उर्फ नन्हकी के पिता हीरालाल, जो पेशे से एक साधारण किसान थे, उनकी करीब पांच वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है और इस सदमे के कारण उनकी माता सुदामा भी तीन वर्ष पहले इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। माता-पिता के साये से महरूम होने के बाद इस घर में भाई रामराज और उसकी चार बहनें सुनीता, विनीता, रानी और बबली अकेले ही संघर्ष कर रहे हैं, जिनमें से तीन बहनें अभी भी अविवाहित हैं। बिना किसी मजबूत सामाजिक और आर्थिक सहारे के जी रहे इस अनाथ परिवार के पास भरण-पोषण का एकमात्र साधन उनकी दो बीघा पैतृक कृषि भूमि थी, जिस पर भी गांव के ही कुछ रसूखदार और दबंग प्रवृत्ति के लोगों ने गलत इरादों से अपनी नजरें गड़ा दी थीं।

अनाथ भाई-बहनों का प्रशासनिक दफ्तरों में लंबा संघर्ष

माता-पिता को खोने के बाद इन भाई-बहनों के लिए यह कृषि भूमि केवल आजीविका का साधन नहीं थी, बल्कि उनके अस्तित्व और बहनों के भविष्य की शादी-ब्याह की एकमात्र उम्मीद थी। प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व विभाग की लगातार अनदेखी ने इन बच्चों को समाज में पूरी तरह लाचार और असहाय महसूस कराया, जिससे तंग आकर अंततः बबली को यह आत्मघाती रास्ता चुनना पड़ा।

इस पूरे जमीनी विवाद की शुरुआत करीब तीन साल पहले हुई थी, जब बबली के सगे चाचा ने आर्थिक तंगहाली या अन्य कारणों से अपने हिस्से की पैतृक भूमि को गांव के ही एक रसूखदार खरीदार को बेच दिया था। आरोप है कि जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद उस दबंग खरीदार की नीयत खराब हो गई और उसने अपनी खरीदी गई जमीन की सीमाओं से आगे बढ़कर इस अनाथ परिवार के हिस्से की करीब दो बीघा उपजाऊ कृषि भूमि पर भी जबरन अवैध कब्जा कर लिया। पीड़ित परिवार ने जब इस अवैध कब्जे का कड़ा विरोध किया, तो उन्हें दबंगों द्वारा गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकियां दी गईं। भाई रामराज ने स्थानीय राजस्व अधिकारियों से लेकर तहसील दिवस और फतेहपुर के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक रूप से रसूखदार खरीदार के दबाव में स्थानीय लेखपाल और पुलिस प्रशासन ने पीड़ित पक्ष की एक न सुनी और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

हर स्तर पर शिकायत करने और व्यवस्था के सभी दरवाजे खटखटाने के बाद जब बबली को न्याय की कोई किरण दिखाई नहीं दी, तो मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट चुकी यह युवती गुरुवार की भोर में करीब चार बजे अपने घर से चुपचाप बिना किसी को बताए निकल भागी। अपने आत्मसम्मान और हक की लड़ाई को एक बड़ा रूप देने के इरादे से वह करीब छह किलोमीटर का लंबा रास्ता भीषण अंधेरे और एकांत में पैदल तय करते हुए फतेहपुर की सीमा पार कर कानपुर के महाराजपुर अंतर्गत पुरवामीर गांव में पहुंच गई। यहाँ आबादी के बीच स्थित एक मोबाइल टावर को देखकर वह तेजी से उस पर चढ़ने लगी और देखते ही देखते लगभग पचास फीट की खतरनाक ऊंचाई पर पहुंच गई। टावर के ऊपरी हिस्से पर सुरक्षित स्थान न होने के बावजूद उसने वहां बैठकर नीचे खड़े लोगों को अपनी आपबीती सुनाना शुरू किया और प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गई।

घटना की संवेदनशीलता और वीभत्सता को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत इस बात की सूचना चकेरी के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अभिषेक पांडेय और महाराजपुर थाना प्रभारी को दी, जिसके बाद भारी पुलिस बल और दमकल विभाग की गाड़ियां रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गईं। पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से टावर पर बैठी युवती से बातचीत शुरू की और उसे नीचे उतरने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन बबली ने साफ कह दिया कि यदि कोई भी पुलिसकर्मी या ग्रामीण जबरन ऊपर आने की कोशिश करेगा, तो वह तुरंत नीचे छलांग लगा देगी। युवती बार-बार रोते हुए कह रही थी कि अनाथ होने के कारण उसकी जमीन छीनी जा रही है और पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय उन्हें ही परेशान कर रही है। इस कड़े रुख को देखते हुए पुलिस ने अपनी रणनीति बदली और फतेहपुर के संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधकर मामले के त्वरित निस्तारण की रूपरेखा तैयार की।

घंटों चले इस बेहद तनावपूर्ण और हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कूटनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए फतेहपुर के राजस्व अधिकारियों को फोन पर लाइन पर लिया और बबली को भरोसा दिलाया कि उसके गांव की जमीन की पैमाइश तत्काल प्रभाव से कराई जाएगी। एसीपी चकेरी ने खुद जिम्मेदारी लेते हुए युवती को आश्वासन दिया कि उसके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और कानपुर पुलिस खुद फतेहपुर प्रशासन के समन्वय से उसकी जमीन को दबंगों के चंगुल से मुक्त कराएगी। इस लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद तथा भाई रामराज के मौके पर पहुंचकर गुहार लगाने पर बबली का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और वह अत्यंत सावधानी के साथ पुलिसकर्मियों की मदद से टावर से नीचे उतरी। नीचे उतरते ही डॉक्टरों की टीम ने उसका प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया, जहां अत्यधिक तनाव और भूख-प्यास के कारण उसकी स्थिति थोड़ी कमजोर पाई गई।

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