दिल्ली भाजपा में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट: वीरेंद्र सचदेवा की कुर्सी बरकरार रहेगी या किसी नए चेहरे को मिलेगी कमान?

दिल्ली के बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए पार्टी नेतृत्व अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। चर्चा है कि यदि पार्टी पंजाबी समुदाय से ही किसी नेता को चुनना चाहती है, तो वीरेंद्र सचदेवा के अलावा पूर्वी दिल्ली के सांसद और

May 8, 2026 - 07:37
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दिल्ली भाजपा में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट: वीरेंद्र सचदेवा की कुर्सी बरकरार रहेगी या किसी नए चेहरे को मिलेगी कमान?
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  • 'ट्रिपल इंजन' सरकार की उपलब्धि ने मजबूत किया सचदेवा का पक्ष, पंजाबी बनाम ओबीसी-दलित समीकरण के बीच फंसा पेच
  • चुनाव परिणामों के बाद अब संगठनात्मक फेरबदल की बारी, भाजपा हाईकमान के पाले में दिल्ली की कमान का फैसला

By Vijay Laxmi Singh(Editor- In- Chief)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों को लेकर पिछले कई महीनों से चल रही चर्चा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दिल्ली भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सुगबुगाहट पिछले वर्ष जुलाई में ही तेज हो गई थी, जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं से व्यापक रायशुमारी की थी। हालांकि, पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय नेतृत्व की व्यस्तता के कारण दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर अंतिम निर्णय बार-बार टलता रहा। अब जबकि हालिया राज्यों के चुनाव परिणाम आ चुके हैं और भाजपा ने बंगाल जैसे राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, दिल्ली इकाई की कमान को लेकर संशय के बादल जल्द छंटने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान वर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा पर ही भरोसा जताता है या दिल्ली के चुनावी रण के लिए किसी नए सेनापति की घोषणा करता है। संगठनात्मक बदलाव की यह प्रक्रिया काफी गहन और सूक्ष्म रही है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश ने पिछले वर्ष जुलाई के महीने में ही दिल्ली के सभी सात भाजपा सांसदों, दिल्ली सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं, पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से बंद कमरे में सलाह ली थी। उस समय यह योजना थी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले दिल्ली के लिए भी नया नाम तय कर लिया जाएगा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर नीतीश नबीन की ताजपोशी और फिर राज्यों के चुनावों के कारण यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब भाजपा मुख्यालय में जीत के जश्न के बीच दिल्ली के भावी संगठन को लेकर फाइलें फिर से खुल गई हैं। दिल्ली के नेता अब किसी भी दिन नए नाम की घोषणा या मौजूदा अध्यक्ष के विस्तार की उम्मीद कर रहे हैं।

वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व की बात करें तो उनका कार्यकाल भाजपा के लिए दिल्ली में उपलब्धियों भरा रहा है। उनकी अध्यक्षता में पार्टी ने दिल्ली में 27 वर्षों के लंबे वनवास को समाप्त करते हुए सत्ता में वापसी की एक नई इबारत लिखी है। सचदेवा के नाम यह अनूठा रिकॉर्ड भी जुड़ गया है कि वे ऐसे पहले अध्यक्ष बने जिनके कार्यकाल में दिल्ली में 'ट्रिपल इंजन' (केंद्र, नगर निगम और विधानसभा) की सरकार का सपना साकार हुआ। उनके नेतृत्व में भाजपा ने न केवल दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर अपना परचम लहराया, बल्कि विधानसभा और नगर निगम चुनावों में भी प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी पटकनी दी। यही कारण है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग उन्हें दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने का प्रबल पक्षधर है।

पार्टी के भीतर समीकरण

वीरेंद्र सचदेवा को दिसंबर 2022 में आदेश गुप्ता के इस्तीफे के बाद कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था और मार्च 2023 में उन्हें स्थायी जिम्मेदारी दी गई। वे पंजाबी समुदाय से आते हैं, जिसकी दिल्ली के चुनावों में निर्णायक भूमिका रहती है। भाजपा का परंपरागत मतदाता माना जाने वाला पंजाबी समुदाय सचदेवा के कार्यकाल में पार्टी के साथ और मजबूती से जुड़ा है।

हालांकि, दिल्ली के बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए पार्टी नेतृत्व अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। चर्चा है कि यदि पार्टी पंजाबी समुदाय से ही किसी नेता को चुनना चाहती है, तो वीरेंद्र सचदेवा के अलावा पूर्वी दिल्ली के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा तथा वरिष्ठ नेता राजीव बब्बर के नाम भी सूची में ऊपर हैं। हर्ष मल्होत्रा की सांगठनिक क्षमता और केंद्र सरकार में उनकी सक्रियता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है। पार्टी के भीतर यह मंथन चल रहा है कि क्या वर्तमान नेतृत्व को ही जारी रखा जाए या आगामी चुनौतियों के लिए नए चेहरे को सामने लाया जाए। संगठनात्मक बदलाव की इस चर्चा में एक नया आयाम अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) के वोटों को पूरी तरह साधने की रणनीति भी है। दिल्ली के कई क्षेत्रों में इन वर्गों की पकड़ बहुत मजबूत है और भाजपा इन्हें अपने साथ स्थायी रूप से जोड़ना चाहती है। यदि भाजपा आलाकमान ने किसी दलित चेहरे को दिल्ली की कमान सौंपने का मन बनाया, तो उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के सांसद योगेंद्र चांदोलिया का नाम सबसे आगे है। चांदोलिया का लंबा प्रशासनिक अनुभव और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें इस पद के लिए एक सक्षम उम्मीदवार के रूप में पेश करती है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि अनुसूचित जाति के नेता को अध्यक्ष बनाकर भाजपा विपक्ष के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकती है।

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