Bhopal News: बेटे के निधन के बाद ससुर ने किया विधवा बहू का कन्यादान, समाज के लिए पेश की अनूठी मिसाल
भोपाल के भौंरी में एक ससुर ने अपने दिवंगत बेटे की पत्नी (बहू) को बेटी का दर्जा देकर उसका पुनर्विवाह कराया। ससुर दिनेश बैरागी ने खुद आगे बढ़कर कन्यादान की रस्म निभाई।

- भोपाल में मानवता की मिसाल: ससुर ने पिता बनकर कराया बहू का पुनर्विवाह, खुद निभाया कन्यादान का फर्ज
- रिश्तों की नई परिभाषा: भोपाल में ससुर ने बहू को बेटी बनाकर विदा किया, नम आंखों से संपन्न हुआ पुनर्विवाह
- भोपाल में ऐतिहासिक पहल: बेटे के असमय निधन के बाद ससुर ने पिता बन किया विधवा बहू का कन्यादान
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के समीपवर्ती क्षेत्र से सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ती एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहाँ के एक स्थानीय निवासी दिनेश बैरागी ने अपने युवा बेटे के असमय निधन के बाद अपनी विधवा बहू प्रियंका को बेटी का दर्जा दिया और सोमवार रात ग्राम भौंरी में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उसका पुनर्विवाह संपन्न कराया। इस विवाह में ससुर ने स्वयं पिता का कर्तव्य निभाते हुए प्रियंका का कन्यादान किया और पूरे मान-सम्मान के साथ उसे एक नए दाम्पत्य जीवन की ओर विदा किया। इस भावुक कर देने वाले सामाजिक सुधार और मानवीय कदम की अब पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है, जो समाज को पुरानी कुरीतियों को छोड़कर आगे बढ़ने का एक बड़ा संदेश देता है।
आधुनिक दौर में भी जहाँ कई बार विधवा महिलाओं को सामाजिक उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है, वहीं भोपाल के भौंरी क्षेत्र में इसके ठीक उलट मानवता और वात्सल्य की एक अनूठी मिसाल देखी गई। एक साधारण किसान परिवार ने अपने सगे बेटे की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी (अपनी बहू) के भविष्य को अंधकार में डूबने से बचा लिया। ससुर दिनेश बैरागी ने रूढ़िवादी परंपराओं को दरकिनार करते हुए अपनी बहू प्रियंका को न सिर्फ अपनी सगी बेटी की तरह माना, बल्कि योग्य वर तलाश कर उसका विवाह भी तय किया। सोमवार रात को पूरी सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं के साथ यह पुनर्विवाह संपन्न हुआ, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के दिल को छू लिया।
यह कहानी साल 2018 में शुरू हुई थी, जब ग्राम कुलूखेड़ी निवासी रामबाबू बैरागी की बेटी प्रियंका का विवाह दिनेश बैरागी के सुपुत्र कपिल के साथ हुआ था। विवाह के समय प्रियंका अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर रही थी, जिसके कारण तत्कालीन समय में उसकी विदाई नहीं की गई थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद साल 2023 में प्रियंका अपने ससुराल भौंरी आई। अपने सरल स्वभाव और ऊंचे विचारों से उसने बहुत जल्द ही ससुराल पक्ष के हर सदस्य का दिल जीत लिया और परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गई।
इसी सुखद समय के बीच परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब कपिल को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने की पुष्टि हुई। परिवार ने कपिल के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी और लंबे समय तक अस्पतालों के चक्कर काटे। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टर कपिल को नहीं बचा सके और साल 2024 में उसका असमय निधन हो गया। युवा बेटे को खोने के गम से पूरा परिवार टूट चुका था, लेकिन इस गहरे दुख के बीच भी ससुर दिनेश बैरागी ने अपनी बहू प्रियंका के भविष्य को लेकर चिंता की। उन्होंने तय किया कि वे प्रियंका की जिंदगी को इस तरह बर्बाद नहीं होने देंगे। इसके बाद उन्होंने परिवार की सहमति से प्रियंका के लिए नया जीवनसाथी तलाशना शुरू किया। सोमवार को विदिशा जिले के ग्राम अरारी खेजड़ा निवासी गोबिंद बैरागी के साथ प्रियंका का विवाह पूरे रीति-रिवाज से संपन्न हुआ, जिसकी पूरी जिम्मेदारी दिनेश बैरागी के परिवार ने उठाई।
इस भावुक विवाह के संपन्न होने के बाद ससुर दिनेश बैरागी अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। उन्होंने भरभराई आवाज में कहा, "मैंने प्रियंका को कभी अपनी बहू के रूप में देखा ही नहीं, वह हमेशा से हमारे घर की बेटी रही है। एक पिता होने के नाते मेरा यह फर्ज था कि मैं अपनी बेटी के जीवन में दोबारा खुशियां लेकर आऊं। उसका कन्यादान करना मेरे लिए सौभाग्य और बेहद गौरव की बात है। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, जीवन को रुकना नहीं चाहिए।"
वहीं प्रियंका के जैविक पिता रामबाबू बैरागी ने समधी दिनेश बैरागी के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "बेटी को खोने के डर और उसके भविष्य की चिंता ने मुझे घेर रखा था। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रियंका के ससुराल वाले ही पिता से बढ़कर जिम्मेदारी निभाएंगे और समाज के सामने एक ऐसा उदाहरण रखेंगे जिससे हजारों लोगों को प्रेरणा मिलेगी।"
इस विवाह का प्रभाव केवल दोनों परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को एक नई दिशा दिखाने वाला साबित हो रहा है।
सामाजिक बदलाव: ग्रामीण अंचलों में आज भी विधवा विवाह को लेकर कई तरह की झिझक देखी जाती है। दिनेश बैरागी के इस कदम ने पुरानी सोच पर गहरी चोट की है।
सकारात्मक संदेश: इस घटना ने साबित किया है कि रिश्ते केवल खून के नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता के होते हैं।
युवाओं को संबल: ऐसी घटनाएं समाज में महिलाओं के अधिकारों और उनके प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती हैं।
प्रियंका अब अपने नए जीवनसाथी गोबिंद बैरागी के साथ विदिशा स्थित अपने नए घर में कदम रख चुकी हैं। दिनेश बैरागी के परिवार ने यह स्पष्ट किया है कि प्रियंका भले ही विदा हो गई है, लेकिन इस घर के दरवाजे उनके लिए हमेशा एक बेटी की तरह खुले रहेंगे। इस घटना के सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में आने के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों ने दिनेश बैरागी और उनके परिवार को सम्मानित करने का निर्णय लिया है, ताकि अन्य लोग भी अपनी सोच में ऐसा ही सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित हो सकें।
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