शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर असामाजिक तत्वों द्वारा की गई जबरन घुसपैठ और हंगामा, लाठी-डंडों से लैस युवकों ने लगाए 'आई लव बुलडोजर बाबा' के नारे
माघ मेले के दौरान यह घटना मेला प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है। शिविर के बाहर हंगामा होने से आसपास के क्षेत्र में तनाव फैल गया। उपद्रवियों को बाहर निकालने
- माघ मेले में तनाव की नई कड़ी: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पर लाठी-डंडे और भगवा झंडों के साथ उपद्रवियों की घुसपैठ, सेवकों से हुई हाथापाई
- प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में बड़ा हंगामा: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर युवकों द्वारा की गई नारेबाजी और मारपीट की कोशिश, प्रशासन को सौंपी गई तहरीर
प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर शनिवार शाम को एक बड़ी घटना घटी। सेक्टर-4, त्रिवेणी मार्ग उत्तरी पटरी पर स्थित इस शिविर के बाहर कुछ युवक लाठी-डंडे और भगवा झंडे लिए हुए पहुंचे। इन लोगों ने जबरन शिविर में प्रवेश करने की कोशिश की, जिसके कारण वहां मौजूद सेवकों और कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई हुई। घटना के दौरान उपद्रवी युवकों ने 'आई लव बुलडोजर बाबा' के नारे भी लगाए। यह हंगामा शाम करीब 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच हुआ, जिसमें माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। शिविर में मौजूद लोगों ने स्थिति को संभालते हुए उपद्रवियों को बाहर निकाला, जिससे कोई बड़ी दुर्घटना टल गई।
घटना के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से कल्पवासी थाने में तहरीर दी गई। तहरीर में अपनी जान, शिविर और वहां मौजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा बताया गया है। आरोप लगाया गया कि लाठी-डंडों से लैस कुछ लोग शिविर के बाहर पहुंचे और आक्रामक तरीके से व्यवहार किया। उन्होंने जबरन घुसने की कोशिश की और नारेबाजी की, जिससे शिविर के आसपास का वातावरण भयावह हो गया। तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया कि उपद्रवियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से की जा सकती है। शंकराचार्य ने मेला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है तथा शिविर के आसपास स्थायी पुलिस तैनाती की आवश्यकता बताई है।
इस घटना का संबंध माघ मेले में चल रहे विवाद से जुड़ा माना जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगातार कई दिनों से अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। इसी पृष्ठभूमि में यह हंगामा हुआ, जिसमें असामाजिक तत्वों ने कथित तौर पर शिविर पर दबाव बनाने की कोशिश की। युवकों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है, जो भगवा झंडे लहराते हुए पहुंचे और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। सेवकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप हाथापाई हुई। हालांकि, कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ क्योंकि शिविर के लोगों ने शांति बनाए रखी।
तहरीर में विस्तार से बताया गया कि उपद्रवी युवक शिविर में घुसने पर आमादा थे और मारपीट करने की धमकी दे रहे थे। लाठी-डंडों के इस्तेमाल से स्थिति और गंभीर हो गई थी। भगवा झंडों के साथ आए इन लोगों ने न केवल नारेबाजी की बल्कि अभद्र व्यवहार भी किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस घटना को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों की वजह से मेला क्षेत्र में शांति भंग होने का खतरा है।
माघ मेले के दौरान यह घटना मेला प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है। शिविर के बाहर हंगामा होने से आसपास के क्षेत्र में तनाव फैल गया। उपद्रवियों को बाहर निकालने के बाद स्थिति नियंत्रण में आई, लेकिन शिविर प्रबंधन ने स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। तहरीर के आधार पर पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। इस घटना से मेला क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठे हैं।
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक काफी आक्रामक थे और उन्होंने शिविर के प्रवेश द्वार पर जोर-आजमाइश की। नारों के बीच हाथापाई हुई, लेकिन सेवकों की सतर्कता से मामला बढ़त नहीं ले सका। शंकराचार्य ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। तहरीर में स्पष्ट रूप से कहा गया कि ऐसे हमलों से श्रद्धालुओं और शिविर में मौजूद अन्य लोगों को खतरा है। प्रशासन से अपील की गई है कि आरोपियों को जल्द पहचानकर कार्रवाई की जाए।
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