Lucknow Road Accident: लखनऊ के सुल्तानपुर हाईवे पर ईंट से भरा ट्रैक्टर पलटा, नीचे दबने से 4 मजदूरों की दर्दनाक मौत
लखनऊ के गोसाईंगंज क्षेत्र में सुल्तानपुर हाईवे पर ईंट से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से चार मजदूरों की दबकर मौत हो गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से शवों को बाहर निकाला।

- गोसाईंगंज के पास बड़ा सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटी ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली, मलबे में दबकर 4 श्रमिकों ने तोड़ा दम
- लखनऊ में स्वतंत्रता दिवस की सुबह दर्दनाक हादसा: ईंट से भरा ट्रैक्टर पलटने से 4 मजदूरों की दबकर मौत, क्रेन से निकाले गए शव
- Lucknow Accident: सुल्तानपुर हाईवे पर गंगागंज के पास पलटी ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली, 4 मजदूरों की मौके पर मौत
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार तड़के एक भीषण और हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है। गोसाईंगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत सुल्तानपुर हाईवे पर गंगागंज के समीप ईंटों से लदी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दुर्घटना में वाहन पर सवार चार मजदूर ईंटों के भारी मलबे और ट्रॉली के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, अग्निशमन दल और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के राहत दल क्रेन के साथ मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से निकाले जाने तक सभी चारों मजदूरों की जान जा चुकी थी। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की वैधानिक जांच शुरू कर दी है।
लखनऊ के ग्रामीण अंचल गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह करीब पौने पांच बजे सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यह भीषण दुर्घटना घटी। ईंट भट्ठे से ईंटों की खेप लादकर निर्माण स्थल की ओर जा रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली गंगागंज के पास अचानक अपना संतुलन खो बैठी। संतुलन बिगड़ते ही पूरी ट्रॉली सड़क किनारे पलट गई।
ट्रॉली पर सवार चार मजदूर संभलने का मौका मिलने से पहले ही सैकड़ों ईंटों और भारी लोहे के ढांचे के नीचे दब गए। तड़के हुए इस हादसे की आवाज सुनकर आसपास से गुजर रहे वाहन चालक और स्थानीय ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और पुलिस को आपातकालीन सूचना दी।
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चारों मजदूर ईंटों के बड़े ढेर में पूरी तरह दब चुके थे। सूचना मिलते ही गोसाईंगंज थाना प्रभारी पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और एनएचएआई की पेट्रोलिंग यूनिट के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
सड़क पर बिखरी ईंटों और भारी ट्रॉली को हटाने के लिए एनएचएआई की भारी क्रेन की मदद ली गई। लगभग आधे घंटे तक चले सघन बचाव अभियान के बाद सभी चारों श्रमिकों को बाहर निकालकर तुरंत एंबुलेंस से निकटवर्ती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गोसाईंगंज पहुंचाया गया। वहां परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने तीन मजदूरों को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल चौथे मजदूर को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, लेकिन उसने भी अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
मृतकों की पहचान पड़ोसी जनपद बाराबंकी के कोठी थाना क्षेत्र निवासी पीतांबर रावत (35 वर्ष), संदीप रावत (25 वर्ष), पवन रावत (25 वर्ष) और बलराम रावत (40 वर्ष) के रूप में हुई है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि पीतांबर वाहन चालक था और अन्य तीन साथी ईंटों की लोडिंग-अनलोडिंग का काम करते थे।
गोसाईंगंज थाना पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि तकनीकी खराबी (हिच पिन टूटने) अथवा तेज रफ्तार के कारण वाहन से नियंत्रण खो गया और यह दुर्घटना हुई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त वाहन और ईंटों को हटाकर हाईवे पर यातायात को पूरी तरह सुचारू करा दिया गया है।
हादसे की सूचना जैसे ही बाराबंकी स्थित मृतकों के गांवों में पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शोक संतप्त परिजन बदहवास हालत में लखनऊ पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने भट्ठा संचालकों व वाहन मालिकों से सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करने की मांग की है।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर हाईवे पर व्यावसायिक माल ढुलाई के लिए कृषि वाहनों (ट्रैक्टर-ट्रॉली) के अनियंत्रित और असुरक्षित उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षमता से अधिक भारी निर्माण सामग्री लादने और उस पर श्रमिकों को बिठाने की प्रथा अक्सर ऐसे जानलेवा हादसों का कारण बनती है।
प्रशासनिक स्तर पर इस घटना के बाद हाईवे पेट्रोलिंग टीमों को भारी वाहनों और ओवरलोडेड मालवाहकों के खिलाफ चेकिंग अभियान कड़ा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सुबह और रात के समय तेज रफ्तार व ओवरलोडिंग पर सख्त अंकुश लगाए बिना ऐसे हादसों को रोकना संभव नहीं होगा। पुलिस ने चारों मृतकों के शवों का पंचनामा भरकर उन्हें विधिक पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए हैं और दुर्घटना के सटीक तकनीकी कारणों की पुष्टि के लिए वाहन का फॉरेंसिक व तकनीकी मुआयना कराया जा रहा है। नियमानुसार पीड़ितों के परिजनों को विधिक सहायता और शासकीय राहत दिलाने की प्रक्रिया भी प्रशासन द्वारा शुरू की जा रही है।
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