Supreme Court Ruling On Number Plate: नंबर प्लेट ढंकना अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की FIR और पुलिस को दी सख्त हिदायत
सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि गाड़ी की नंबर प्लेट छिपाना आपराधिक अपराध (IPC) नहीं है। अदालत ने मामले में दर्ज FIR को रद्द कर दिया।

- Supreme Court Decision: गाड़ी की नंबर प्लेट छिपाने पर IPC के तहत नहीं दर्ज हो सकती FIR, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
- क्या नंबर प्लेट छिपाना आपराधिक अपराध है? सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की FIR, जानें मोटर वाहन अधिनियम पर अदालत का अहम फैसला
- Supreme Court Verdict: वाहन की नंबर प्लेट छिपाने पर भारतीय दंड संहिता के तहत FIR दर्ज करना गलत, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया मामला
सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों की रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट से जुड़े एक बेहद अहम मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि गाड़ी की नंबर प्लेट को ढंकना या छिपाना भारतीय दंड संहिता (IPC) या भारतीय न्याय संहिता के तहत कोई आपराधिक धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) को पूरी तरह से रद्द कर दिया। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामले विशुद्ध रूप से मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के उल्लंघन के दायरे में आते हैं, जिसके लिए केवल मौद्रिक जुर्माना या यातायात नियमों के तहत चालान की व्यवस्था है। यह फैसला यातायात उल्लंघन और आपराधिक मामलों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शीर्ष अदालत के समक्ष एक याचिका दायर की गई थी जिसमें वाहन मालिक के खिलाफ पुलिस द्वारा नंबर प्लेट छिपाने के आरोप में आपराधिक धाराएं लगाई गई थीं। पुलिस ने इस कृत्य को जालसाजी और धोखाधड़ी की श्रेणी में मानते हुए भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया था। आरोपी पक्ष ने निचली अदालत और उच्च न्यायालय के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां मुख्य मुद्दा यह था कि क्या महज ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करना आपराधिक मामले का रूप ले सकता है।
मामला एक वाहन चालक से जुड़ा है, जिसकी गाड़ी पर लगी नंबर प्लेट को जानबूझकर या किसी अन्य कारण से छिपाया या ढंका गया था। गश्त के दौरान पुलिस ने वाहन को रोका और यह तर्क देते हुए चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया कि नंबर प्लेट छिपाना पुलिस को गुमराह करने और धोखाधड़ी की आपराधिक मंशा को दर्शाता है। पुलिस ने मामले में आईपीसी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की, जिससे चालक पर आपराधिक मुकदमे का खतरा मंडराने लगा।
याचिकाकर्ता ने पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से राहत न मिलने पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान पीठ ने कानून के प्रावधानों का बारीकी से विश्लेषण किया। अदालत ने पाया कि मोटर वाहन अधिनियम में वाहन के रजिस्ट्रेशन, नंबर प्लेट की बनावट और उसे सही तरीके से प्रदर्शित करने से संबंधित स्पष्ट नियम मौजूद हैं। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके लिए अधिनियम में विशिष्ट दंड और जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे मामलों में बिना किसी आपराधिक मंशा के सीधे आईपीसी की धाराएं लगा देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा प्रक्रियात्मक चूक और बिना ठोस आधार के आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि हर यातायात उल्लंघन को आपराधिक जालसाजी या धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। जब तक कि यह साबित न हो कि नंबर प्लेट का इस्तेमाल किसी गंभीर अपराध को अंजाम देने या किसी अन्य व्यक्ति को सीधा वित्तीय/शारीरिक नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया था, तब तक सामान्य रूप से नंबर प्लेट ढंकने पर केवल ट्रैफिक चालान ही काटा जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का व्यापक स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय पुलिस द्वारा नागरिकों पर बात-बात पर गैर-जरूरी आपराधिक धाराएं थोपने की परिपाटी पर अंकुश लगाएगा। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि विशेष कानूनों (जैसे मोटर वाहन अधिनियम) के तहत आने वाले मामलों को सामान्य आपराधिक कानून से अलग रखा जाना चाहिए।
इस फैसले का सीधा असर देश भर में यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली और वाहन चालकों के अधिकारों पर पड़ेगा। अब पुलिस प्रशासन केवल नंबर प्लेट ढकी होने के आधार पर किसी भी नागरिक के खिलाफ जालसाजी या धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कर सकेगा। इससे अदालतों में लंबित तुच्छ मुकदमों का बोझ कम होगा और नागरिकों को अनावश्यक कानूनी अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हालांकि, कानूनी जानकारों ने यह भी स्पष्ट किया है कि फैसले का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि नंबर प्लेट छिपाना पूरी तरह से वैध हो गया है। ऐसा करने वाले चालकों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान और जुर्माना लगाने का पुलिस का अधिकार पूरी तरह बरकरार रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस मील के पत्थर साबित होने वाले फैसले के बाद देश के विभिन्न राज्यों के गृह विभागों और पुलिस महानिदेशकों को अपनी ट्रैफिक व स्थानीय पुलिस के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इसके तहत जांच अधिकारियों को यह प्रशिक्षित किया जाएगा कि किस परिस्थिति में केवल चालान काटा जाना चाहिए और किस परिस्थिति में आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। यदि भविष्य में नंबर प्लेट का इस्तेमाल किसी चोरी, डकैती या आपराधिक गतिविधि में पाया जाता है, तभी केवल आपराधिक धाराएं लगाई जा सकेंगी।
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