Assam Police Action: गुवाहाटी में कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका हिरासत में, 'वॉलंटियर्स मीट' से पहले कार्रवाई का दावा
असम के गुवाहाटी में कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है। पार्टी की रीजनल वॉलंटियर्स मीट से पहले यह कार्रवाई हुई।

असम की राजधानी गुवाहाटी में रविवार को उस समय राजनीतिक व प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनकी टीम के सदस्यों को स्थानीय पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि आशुतोष रांका को रविवार (27 सितंबर 2026) को गुवाहाटी में आयोजित होने वाली पार्टी की महत्वपूर्ण 'रीजनल वॉलंटियर्स मीट' से ठीक पहले पुलिस ने अपने नियंत्रण में ले लिया।
इस पूरे घटनाक्रम के तुरंत बाद आशुतोष रांका ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक संक्षिप्त वीडियो संदेश भी जारी किया। प्रसारित वीडियो में वे पुलिस वैन के अंदर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने हिरासत में लिए जाने की पुष्टि करते हुए घटनाक्रम की जानकारी दी, जिसके बाद इंटरनेट पर यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
रीजनल वॉलंटियर्स मीट से ठीक पहले हुई कार्रवाई
पार्टी सूत्रों और आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपने संगठनात्मक विस्तार और समर्थकों को जोड़ने के उद्देश्य से रविवार को गुवाहाटी में एक क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक (Regional Volunteers Meet) का आयोजन तय किया था। इस बैठक में स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं, युवाओं और सोशल मीडिया वॉलंटियर्स को आमंत्रित किया गया था।
आरोप है कि कार्यक्रम स्थल पर गतिविधियां शुरू होने से पहले ही स्थानीय पुलिस प्रशासन का एक दल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आयोजन की औपचारिक अनुमति, कार्यक्रम के स्वरूप और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए आशुतोष रांका और उनके कुछ सहयोगियों को रोका और बाद में उन्हें पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले जाया गया। पार्टी का दावा है कि यह बैठक पूरी तरह शांतिपूर्ण और संगठनात्मक चर्चा के लिए बुलाई गई थी, जिसे प्रशासनिक हस्तक्षेप के जरिए बाधित किया गया।
सोशल मीडिया वीडियो से गरमाया माहौल
हिरासत में लिए जाने के कुछ ही समय बाद आशुतोष रांका द्वारा साझा किए गए वीडियो में वे पुलिस वैन के भीतर से बोलते नजर आए। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए बताया कि उन्हें बैठक शुरू होने से ठीक पहले रोका गया और पुलिस दल उन्हें अज्ञात स्थान या संबंधित थाने ले जा रहा है।
वीडियो के सोशल मीडिया पर अपलोड होते ही पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य पदाधिकारियों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर रोक करार दिया। दीपके ने सवाल उठाया कि किसी राजनीतिक या सामाजिक संगठन द्वारा अपने स्वयंसेवकों के साथ बैठक आयोजित करने पर इस तरह की त्वरित पुलिस कार्रवाई का क्या आधार है। उन्होंने मामले में उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप करने और कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा करने की मांग की।
दूसरी ओर, प्रशासनिक और पुलिस सूत्रों का प्राथमिक स्तर पर कहना है कि किसी भी प्रकार की जनसभा, रैली या संगठनात्मक सम्मेलन के आयोजन से पहले स्थानीय नगर प्रशासन और पुलिस से विधिवत अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होता है। सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील क्षेत्रों में बिना पूर्व स्वीकृति के इस तरह के जमावड़े की अनुमति नहीं दी जाती है।
अधिकारियों का कहना है कि वे आयोजकों के पास मौजूद औपचारिक अनुमतियों, कार्यक्रम के उद्देश्य और किसी भी संभावित अव्यवस्था की आशंका की जांच कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों की ओर से हिरासत की आधिकारिक धाराओं या औपचारिक गिरफ्तारी को लेकर विस्तृत प्रेस वक्तव्य जारी होने की प्रतीक्षा की जा रही है।
फिलहाल आशुतोष रांका और उनके सहयोगियों से संबंधित थाने में पूछताछ किए जाने और उनके दस्तावेजों की पड़ताल की बात सामने आ रही है। संगठन से जुड़े विधिक प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से संपर्क साधा है ताकि मामले की वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सके और हिरासत में लिए गए पदाधिकारियों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की जा सके। गुवाहाटी में हुए इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में संगठन के विस्तार व प्रशासनिक नियमों के अनुपालन को लेकर बहस छिड़ गई है।
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