IIT Madras Zanzibar: जिस संस्थान से ली बीटेक की डिग्री, उसी के पहले विदेशी कैंपस की डायरेक्टर बनीं प्रीति अघलायम

आईआईटी मद्रास की पूर्व छात्रा प्रोफेसर प्रीति अघलायम ने तंजानिया के जांजीबार में खुले पहले विदेशी कैंपस की डायरेक्टर बनकर इतिहास रच दिया है। जानिए उनकी इस प्रेरक यात्रा के बारे में।

Sep 29, 2026 - 13:01
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IIT Madras Zanzibar: जिस संस्थान से ली बीटेक की डिग्री, उसी के पहले विदेशी कैंपस की डायरेक्टर बनीं प्रीति अघलायम
  • Preeti Aghalayam IIT: आईआईटी की पहली महिला डायरेक्टर बनकर रचा इतिहास, जांजीबार में संभाल रही हैं भारतीय शिक्षा की वैश्विक कमान
  • प्रेरणादायक सफर: आईआईटी मद्रास की पूर्व छात्रा से जांजीबार कैंपस की प्रमुख तक, जानें कौन हैं प्रोफेसर प्रीति अघलायम
  • Higher Education Milestone: विदेशी धरती पर लहराया भारत का परचम, तंजानिया में आईआईटी के वैश्विक विस्तार का चेहरा बनीं प्रीति अघलायम

चेन्नई / नई दिल्ली: भारतीय उच्च शिक्षा और प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) वैश्विक स्तर पर अपनी गुणवत्ता और उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। इस प्रतिष्ठित संस्थान के छह दशक से अधिक लंबे इतिहास में जब पहले अंतरराष्ट्रीय परिसर की स्थापना का अध्याय लिखा गया, तो उसका नेतृत्व एक ऐसी महिला वैज्ञानिक को सौंपा गया, जिसकी खुद की शैक्षणिक यात्रा की नींव इसी संस्थान में पड़ी थी। प्रोफेसर प्रीति अघलायम (Preeti Aghalayam) तंजानिया के जांजीबार में स्थापित 'आईआईटी मद्रास जांजीबार कैंपस' की डायरेक्टर-इन-चार्ज (निदेशक) के रूप में वैश्विक पटल पर भारत और अपने मातृ संस्थान का नाम रोशन कर रही हैं।

किसी भी आईआईटी संस्थान के इतिहास में शीर्ष निदेशक पद की कमान संभालने वाली वे पहली महिला अकादमिक नेता भी हैं। उनकी यह उपलब्धि सोशल मीडिया और शैक्षणिक हलकों में व्यापक रूप से सराही जा रही है। एक पूर्व छात्रा के रूप में जिस संस्थान के गलियारों में उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग की बारीकियां सीखीं, दशकों बाद उसी संस्थान की वैश्विक पहुंच को साकार करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होना भारतीय नारी शक्ति और अकादमिक समर्पण की अप्रतिम मिसाल है।

  • आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की शुरुआत

प्रोफेसर प्रीति अघलायम का आईआईटी से संबंध अत्यंत पुराना और आत्मीय रहा है। उन्होंने वर्ष 1995 में प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) से केमिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech) की डिग्री पूर्ण की थी। संस्थान के अकादमिक अनुशासन और शोध परिवेश ने उनकी वैज्ञानिक सोच को नई दिशा दी।

आईआईटी मद्रास से स्नातक करने के उपरांत वे उच्च शिक्षा और परास्नातक अनुसंधान के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं। वहां उन्होंने रोचेस्टर विश्वविद्यालय (University of Rochester) से केमिकल इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस (M.S.) की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय (University of Massachusetts Amherst) से इसी विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि हासिल की। पीएच.डी. पूरी करने के बाद उन्होंने एमआईटी (Massachusetts Institute of Technology - MIT) में पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता के रूप में भी गहन तकनीकी अनुसंधान किया।

  • स्वदेश वापसी और आईआईटी में प्राध्यापक के रूप में योगदान

विदेश में अत्याधुनिक शोध अनुभव अर्जित करने के बाद प्रोफेसर प्रीति ने स्वदेश लौटकर भारतीय युवाओं को शिक्षित और प्रशिक्षित करने का मार्ग चुना। उन्होंने अपने अध्यापन करियर की शुरुआत आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) से की, जहां उन्होंने कई वर्षों तक केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में विद्यार्थियों को पढ़ाया और तकनीकी शोध परियोजनाओं का मार्गदर्शन किया।

वर्ष 2010 में वे पुनः अपने मातृ संस्थान आईआईटी मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में संकाय सदस्य (Faculty) के रूप में शामिल हुईं। यहां उन्होंने भूमिगत कोयला गैसीकरण (Underground Coal Gasification), ऑटोमोटिव एग्जॉस्ट कैटेलिसिस, रिएक्टिंग फ्लो और सतह प्रतिक्रियाओं (Surface Reactions) के गणितीय मॉडलिंग पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य किए। अकादमिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने संस्थान के प्रशासनिक और वैश्विक सहयोग प्रकोष्ठों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

  • जांजीबार कैंपस: भारत के उच्च शिक्षा कूटनीति का मील का पत्थर

भारत सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में आईआईटी मद्रास जांजीबार परिसर पहला ऐतिहासिक कदम बना। भारत के शिक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और जांजीबार (तंजानिया) की सरकार के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के आधार पर इस कैंपस की स्थापना की गई।

जब इस पहले विदेशी परिसर के नेतृत्व के लिए योग्य नेतृत्वकर्ता की तलाश हुई, तो प्रोफेसर प्रीति अघलायम की प्रशासनिक क्षमता, अकादमिक साख और वैश्विक दृष्टिकोण को देखते हुए उन्हें इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी के लिए चुना गया। उनके नेतृत्व में जांजीबार कैंपस में डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक और रोजगारपरक विषयों में स्नातक (BS) और स्नातकोत्तर (M.Tech) पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें अफ्रीका और भारत सहित कई देशों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

  • लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ती एक प्रेरक यात्रा

आईआईटी प्रणाली में लंबे समय तक शीर्ष प्रशासनिक पदों पर पुरुषों का वर्चस्व देखा जाता रहा था। प्रोफेसर प्रीति अघलायम ने इस मिथक और कांच की छत (Glass Ceiling) को तोड़कर देश भर की छात्राओं और शोधकर्ताओं के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त किया है। वे न केवल एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक हैं, बल्कि मैराथन धाविका भी हैं, जो निरंतर जीवन में अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और मानसिक संतुलन को प्राथमिकता देती हैं।

वे अक्सर अपने संस्मरणों में साझा करती हैं कि जब उन्होंने 1990 के दशक में केमिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया था, तब कक्षाओं में छात्राओं की संख्या बेहद सीमित होती थी। लेकिन आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में भारतीय महिलाओं का बढ़ता प्रभाव देश के विकासशील स्वरूप को प्रदर्शित करता है। जांजीबार में उनकी अगुवाई में संचालित हो रहा परिसर वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग का नया प्रतीक बन चुका है।

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