IRFC Share Price: ₹4,200 करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग करार से संभला IRFC, 52-वीक लो से शेयर में लौटी खरीदारी

रेलवे क्षेत्र की प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी IRFC के शेयर में ₹4,200 करोड़ की बड़ी डील के बाद जोरदार रिकवरी देखने को मिली है। एक साल के निचले स्तर से संभलकर शेयर में तेजी दर्ज की गई।

Sep 29, 2026 - 13:05
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IRFC Share Price: ₹4,200 करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग करार से संभला IRFC, 52-वीक लो से शेयर में लौटी खरीदारी
  • Railway Stock Recovery: रेलवे पीएसयू IRFC को मिला ₹4200 करोड़ की बड़ी डील का बूस्ट, निचले स्तरों से आई तेज रिकवरी
  • IRFC Share News: एक साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचे शेयर में अचानक आई तेजी, क्या निवेशकों के लिए बन रहा है नया मौका?
  • Stock Market Today: ₹4200 करोड़ की डील से चमका रेलवे फाइनेंसर IRFC, लगातार गिरावट के बाद संभले शेयर के भाव

नई दिल्ली / मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में रेल क्षेत्र की प्रमुख सार्वजनिक वित्तीय कंपनी 'इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन' (IRFC) के शेयरों में पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर आखिरकार ब्रेक लग गया है। कंपनी द्वारा लगभग ₹4,200 करोड़ के बड़े वित्तीय पोषण (प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग) और वाणिज्यिक करार से जुड़ी सकारात्मक खबर सामने आने के बाद निवेशकों का भरोसा लौटा है। इस बड़ी डील के दम पर आईआरएफसी का शेयर अपने एक साल के न्यूनतम स्तर (52-वीक लो) से संभलकर हरे निशान में कारोबार करता नजर आया।

हाल के हफ्तों में सरकारी कंपनियों (पीएसयू बास्केट) और विशेषकर रेलवे से जुड़े शेयरों में लगातार मुनाफावसूली का दबाव देखा जा रहा था। इस बिकवाली के चलते आईआरएफसी के शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई थी और यह अपने पिछले उच्च स्तरों से काफी नीचे फिसलकर साल के सबसे निचले दायरे में पहुंच गया था। हालांकि, ₹4,200 करोड़ के नए वित्तीय समझौते की पुष्टि ने बाजार के रुख को बदल दिया और निचले स्तरों पर संस्थागत व खुदरा निवेशकों की ताजा लिवाली देखने को मिली।

  • 52-सप्ताह के निचले स्तर से क्यों लौटी तेजी?

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, किसी भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के लिए नए ऋण अनुबंधों का विस्तार उसकी भविष्य की ब्याज आय (Net Interest Income) और मार्जिन को सीधे तौर पर मजबूती प्रदान करता है। आईआरएफसी भारतीय रेल के रोलिंग स्टॉक (इंजन, कोच, वैगन) और अवसंरचना विकास के लिए प्राथमिक वित्तीय संबल प्रदान करने वाली नोडल एजेंसी है।

₹4,200 करोड़ के इस नए प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग करार से कंपनी के कुल ऋण बहीखाते (Loan Book) में इजाफा होगा। लंबी अवधि की इस डील से मिलने वाला नियमित नकदी प्रवाह कंपनी के बहीखाते को मजबूती देगा। जैसे ही एक्सचेंज फाइलिंग और बाजार सूत्रों से इस करार की पुष्टि हुई, घरेलू म्यूचुअल फंड्स और खुदरा निवेशकों ने निचले स्तरों पर शेयरों में वैल्यू बाइंग शुरू कर दी, जिससे शेयर में तेज उछाल दर्ज किया गया।

  • रेलवे अवसंरचना विस्तार में आईआरएफसी की केंद्रीय भूमिका

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय रेल योजना और पीएम गतिशक्ति मिशन के तहत रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर अभूतपूर्व पूंजीगत व्यय (Capex) किया जा रहा है। इसमें नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, पटरियों का दोहरीकरण, वंदे भारत और नमो भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों के निर्माण और प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के विशाल प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।

इन सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आवश्यक भारी-भरकम पूंजी की व्यवस्था में आईआरएफसी रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करता है। कंपनी का एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) ऐतिहासिक रूप से शून्य या नगण्य स्तर पर रहता है, क्योंकि इसका अधिकांश कर्ज सीधे रेल मंत्रालय और सरकारी संस्थाओं को सुरक्षित संपत्तियों के आधार पर दिया जाता है। ₹4,200 करोड़ का ताजा करार यह सिद्ध करता है कि बड़े पूंजीगत प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी आवंटन की गति लगातार जारी है।

  • तकनीकी चार्ट और बाजार विश्लेषकों का नजरिया

शेयर बाजार के तकनीकी जानकारों के अनुसार, आईआरएफसी का शेयर लगातार बिकवाली के बाद ओवरसोल्ड (Oversold) जोन में पहुंच चुका था। जब कोई मजबूत फंडामेंटल वाला पीएसयू शेयर अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल्स को छूता है और उसी समय कोई बड़ी सकारात्मक कॉरपोरेट घोषणा सामने आती है, तो तेज पुलबैक (शॉर्ट कवरिंग) की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो शेयर ने अपने हालिया सपोर्ट स्तर को सफलतापूर्वक बचाया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेयर इस रिकवरी के बाद अपने अहम मूविंग एवरेजेस से ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो इसमें आने वाले दिनों में और मजबूती देखी जा सकती है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों ने आगाह भी किया है कि समग्र बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय व्यवस्थित तरीके से और जोखिम क्षमता का आकलन करके ही कदम उठाना चाहिए।

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो आईआरएफसी लगातार स्थिर लाभांश (Dividend) देने वाली कंपनियों में शुमार रही है। वित्तीय परिणामों में कंपनी ने निरंतर स्वस्थ ब्याज आय और परिचालन लाभ प्रदर्शित किया है। आगामी तिमाहियों में नए स्वीकृत प्रोजेक्ट्स से प्राप्त होने वाली आय कंपनी की वित्तीय स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगी। रेलवे क्षेत्र के बढ़ते आधुनिकीकरण के दौर में पूंजी की मांग बनी रहने वाली है, जिसका सीधा और दीर्घकालिक लाभ आईआरएफसी को मिलने की पूरी संभावना है।

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