Banking & Tax Changes: 1 अक्टूबर से वित्तीय नियमों में बड़े फेरबदल, जानिए 9 प्रमुख बदलावों की पूरी डिटेल
1 अक्टूबर से बैंकिंग, इनकम टैक्स, एलपीजी सब्सिडी और यूपीआई चार्जेस समेत 9 बड़े वित्तीय नियम बदल गए हैं। एसबीआई एटीएम लिमिट और टैक्स डेडलाइन के नए प्रावधानों की पूरी जानकारी।

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देश भर में 1 अक्टूबर से वित्तीय, बैंकिंग, कराधान और घरेलू बजट से जुड़े कई अहम नियमों में संशोधन प्रभावी हो गए हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा एटीएम से मुफ्त निकासी की सीमा में कटौती करने से लेकर आयकर विभाग द्वारा ऑडिट व रिटर्न संबंधित समयसीमा बढ़ाने तक, इन बदलावों का व्यापक असर वेतनभोगी वर्ग, व्यापारियों और सामान्य उपभोक्ताओं पर दिखने वाला है। इसके साथ ही रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े मर्चेंट शुल्क संरचना और अनिवासी भारतीयों (NRI) से अचल संपत्ति खरीदने से जुड़े टीडीएस प्रावधानों में भी महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक संशोधन लागू किए गए हैं।
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इन बदलावों में से कुछ जहां नागरिकों को अनुपालन के स्तर पर राहत देंगे, वहीं कुछ अन्य बदलाव रोजमर्रा के बैंकिंग लेनदेन और घरेलू खर्चों को प्रभावित कर सकते हैं। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि 1 अक्टूबर से लागू हुए 9 प्रमुख बदलाव क्या हैं और इनका आपकी वित्तीय योजना पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
1. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मुफ्त एटीएम ट्रांजैक्शन में बदलाव
देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक, भारतीय स्टेट बैंक ने अपने बचत खाताधारकों के लिए गैर-गृह (Non-Home) और मेट्रो शहरों के एटीएम पर मिलने वाले मुफ्त मासिक वित्तीय व गैर-वित्तीय लेनदेन की संख्या में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत न्यूनतम मासिक औसत शेष (MAB) के आधार पर मिलने वाली अतिरिक्त मुफ्त सीमा को युक्तिसंगत बनाया गया है। निर्धारित सीमा समाप्त होने के बाद प्रति वित्तीय लेनदेन ₹20 से ₹25 (प्लस जीएसटी) का शुल्क देय होगा, जबकि गैर-वित्तीय पूछताछ पर भी अतिरिक्त सेवा शुल्क लागू होगा। बैंक का उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देना तथा एटीएम रखरखाव लागत को संतुलित करना है।
2. इनकम टैक्स ऑडिट व अनुपालन डेडलाइन में विस्तार
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने करदाताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कॉरपोरेट निकायों को राहत देते हुए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की निर्धारित समयसीमा में विस्तार प्रदान किया है। तकनीकी पोर्टल अद्यतनीकरण और विभिन्न कारोबारी संगठनों के ज्ञापनों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय को अधिसूचित किया गया है। समयसीमा बढ़ने से उन फर्मों और व्यवसायियों को दंडात्मक ब्याज और जुर्माने से सुरक्षा मिलेगी, जो ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने के अंतिम चरण में थे।
3. घरेलू रसोई गैस (LPG) सब्सिडी वितरण प्रक्रिया में सख्ती
रसोई गैस सिलेंडरों के वितरण और सब्सिडी हस्तांतरण को लेकर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नए दिशा-निर्देश प्रभावी हो गए हैं। उज्ज्वला योजना और सामान्य श्रेणी के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBTL) लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी सत्यापन को अनिवार्य किया गया है। जिन उपभोक्ताओं ने वितरक स्तर पर बायोमेट्रिक या डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है, उनकी सब्सिडी राशि अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है। इसके अलावा 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर और 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडरों की मासिक दरों की भी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा समीक्षा की गई है।
4. UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन और वॉलेट इंटरऑपरेबिलिटी चार्जेस
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के फ्रेमवर्क के अनुरूप प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) यानी वॉलेट्स के जरिए बड़े मर्चेंट क्यूआर कोड पर किए जाने वाले भुगतानों पर इंटरचेंज फीस की व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित किया गया है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह शुल्क केवल विशिष्ट श्रेणियों के बड़े व्यापारियों और वॉलेट-टू-बैंक मर्चेंट लेनदेन पर लागू होता है; सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और बैंक खाते से सीधे बैंक खाते में होने वाले व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन पूरी तरह से निःशुल्क बने रहेंगे।
5. अनिवासी भारतीयों (NRI) से संपत्ति खरीद पर TDS नियम
आयकर अधिनियम की धारा 195 के तहत अनिवासी भारतीयों (NRI) से भारत में अचल संपत्ति खरीदने वाले भारतीय खरीदारों के लिए स्रोत पर कर कटौती (TDS) की प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और सख्त बनाया गया है। पूर्व में कम टीडीएस प्रमाण पत्र (Lower TDS Certificate) प्राप्त करने में लगने वाले लंबे समय को घटाने के लिए नई स्वचालित व्यवस्था शुरू की गई है। खरीदारों को अब निर्धारित अवधि के भीतर चालान-सह-विवरण ऑनलाइन जमा करना होगा, जिससे संपत्ति पंजीकरण में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी।
6. स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स (लघु बचत योजनाएं) पर ब्याज दरें
वित्त मंत्रालय द्वारा तिमाही आधार पर की जाने वाली समीक्षा के तहत पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) की ब्याज दरों का नया ढांचा प्रभावी हो गया है। सरकारी प्रतिभूतियों के यील्ड को आधार मानकर तय की जाने वाली इन दरों में स्थिरता बनाए रखने के साथ ही कुछ चयनित मध्यम-अवधि जमा योजनाओं में मामूली समायोजन किया गया है।
7. क्रेडिट कार्ड बिलिंग और लेट पेमेंट चार्ज नियम
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मास्टर डायरेक्शन के अनुसार क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को बिलिंग चक्र और शुल्क संरचना में पारदर्शिता लाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। अब बिलिंग चक्र की गणना और भुगतान देय तिथि के बाद लगने वाले अतिरिक्त ब्याज/विलंब शुल्क की सूचना ग्राहकों को अनिवार्य रूप से एसएमएस और ईमेल द्वारा स्पष्ट रूप से देनी होगी। इसके अलावा रिवॉर्ड पॉइंट्स की रिडेम्पशन फीस से जुड़े नियमों को भी ग्राहकों के अनुकूल बनाया गया है।
8. आधार-पैन लिंकिंग और निष्क्रिय दस्तावेजों पर वित्तीय प्रतिबंध
वित्तीय धोखाधड़ी रोकने और कर अनुपालन मजबूत करने के उद्देश्य से बैंकों ने उन खातों पर परिचालन सीमाएं लागू करना शुरू कर दिया है जहां पैन-आधार सत्यापन अद्यतन नहीं है। ऐसे खातों में अधिक मूल्य के नकद लेनदेन, विदेशी मुद्रा प्रेषण (LRS) और म्यूचुअल फंड निवेश की नई एसआईपी शुरू करने पर तकनीकी रोक का सामना करना पड़ सकता है।
9. शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड नॉमिनेशन प्रावधान
पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) के निर्देशों के तहत डीमैट खातों, ट्रेडिंग खातों और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनेशन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के साथ ही गैर-नामांकित फोलियो पर कड़े कदम लागू किए गए हैं। जिन निवेशकों ने अब तक 'नॉमिनेशन फॉर्म' या औपचारिक 'ऑप्ट-आउट' विकल्प दर्ज नहीं कराया है, उनके फोलियो से यूनिट्स के हस्तांतरण और निकासी पर सीमित प्रतिबंध प्रभावी हो गए हैं।
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