डोनाल्ड ट्रंप का नया दावा: कहा- 'ईरान ने मुझे अपना सर्वोच्च नेता बनने का ऑफर दिया, पर मैंने मना कर दिया।
रिपब्लिकन नेशनल कांग्रेस कमेटी (NRCC) के वार्षिक डिनर के दौरान बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में सुर्खियां
- वाशिंगटन से तेहरान तक मची खलबली, एनआरसीसी डिनर में ट्रंप ने ईरान के 'अनौपचारिक' प्रस्ताव का किया जिक्र
- युद्धविराम की अटकलों के बीच ट्रंप का नया शिगूफा, ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत को लेकर किया चौंकाने वाला खुलासा
रिपब्लिकन नेशनल कांग्रेस कमेटी (NRCC) के वार्षिक डिनर के दौरान बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने वहां मौजूद चंदा देने वाले समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे संपर्क किया था। ट्रंप के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने उन्हें एक ऐसा प्रस्ताव दिया जो किसी भी विदेशी नेता के लिए अकल्पनीय है। ट्रंप ने मंच से कहा कि उन्हें ईरान का 'सुप्रीम लीडर' बनने का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने अपनी बात को वजन देने के लिए यह भी जोड़ा कि दुनिया में ऐसा कोई दूसरा राष्ट्राध्यक्ष नहीं होगा जो ईरान के सर्वोच्च पद को उनसे कम चाहता हो।
ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान विस्तार से बताया कि कैसे बातचीत के दौरान यह विषय सामने आया। उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष की ओर से संदेश काफी स्पष्ट था और वे चाहते थे कि ट्रंप वहां की कमान संभालें। ट्रंप ने मजाकिया और तंजिया लहजे में अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि उन्होंने बेहद विनम्रता से "नो थैंक्यू" कहकर इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। पूर्व राष्ट्रपति का यह दावा उस पद को लेकर है जो ईरान में धार्मिक और राजनीतिक सत्ता का सर्वोच्च शिखर माना जाता है, और जिस पर वर्तमान में अयातुल्ला अली खामेनेई काबिज हैं। ट्रंप के इस बयान को वहां मौजूद भीड़ ने तालियों के साथ सराहा, लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञों ने इसे उनके चुनावी स्टंट और अतिरंजनापूर्ण दावों की श्रेणी में रखा है।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे मौजूदा तनाव को देखते हुए इस दावे की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है। ट्रंप पिछले काफी समय से सार्वजनिक मंचों पर यह कह रहे हैं कि ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम और एक नए समझौते पर बात करने के लिए बेताब है। उनका तर्क है कि उनके कार्यकाल के दौरान लगाए गए सख्त प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और अब वे किसी भी कीमत पर सुलह चाहते हैं। हालांकि, तेहरान ने हर बार आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी भी दावे को सिरे से खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति के साथ बातचीत नहीं करेंगे जिसने परमाणु समझौते (JCPOA) को एकतरफा तौर पर तोड़ा हो और उनके देश पर अमानवीय प्रतिबंध लगाए हों।
- दावों और हकीकत के बीच का कूटनीतिक फासला
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में 'सुप्रीम लीडर' का पद कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे किसी विदेशी नेता को पेश किया जा सके, विशेषकर उस देश के नेता को जिसे ईरान अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अक्सर जटिल भू-राजनीतिक स्थितियों को सरल बनाकर पेश करते हैं ताकि उनके समर्थक उन्हें एक कुशल 'डील-मेकर' के रूप में देख सकें। यह दावा कि एक इस्लामी गणतंत्र अपनी सत्ता की चाबी एक अमेरिकी राष्ट्रपति को सौंपना चाहता था, तकनीकी और वैचारिक रूप से लगभग असंभव प्रतीत होता है।
डोनाल्ड ट्रंप के इस नए शिगूफे ने विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को भी हमले का मौका दे दिया है। उनके आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की बातों में गंभीरता की कमी है और वे विदेशी नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने से बाज नहीं आते। दूसरी तरफ, ट्रंप समर्थकों का मानना है कि यह उनकी ताकतवर छवि का ही असर है कि दुश्मन देश भी उनके सामने झुकने को तैयार हैं। ट्रंप ने कार्यक्रम में आगे कहा कि उनकी नीतियां ही थीं जिन्होंने ईरान को अलग-थलग कर दिया था और यदि वे सत्ता में वापस आते हैं, तो वे बहुत कम समय में ईरान के साथ एक ऐसी डील करेंगे जो पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद होगी। फिलहाल ईरान की ओर से कोई आधिकारिक तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वहां के स्थानीय मीडिया ने इसे 'हास्यास्पद' करार दिया है। गौरतलब है कि ट्रंप के कार्यकाल में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से दोनों देशों के बीच कड़वाहट अपने चरम पर है। ऐसे में यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि ईरान का कोई भी अधिकारी इस तरह का प्रस्ताव देगा। ट्रंप का यह कहना कि "हम उनकी बात बहुत साफ तौर पर सुनते हैं," यह संकेत देता है कि शायद वे पर्दे के पीछे चल रही किसी गुप्त संचार प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं।
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