ओटीटी पर छाया 'शैतान' का खौफ: 148 मिनट का सस्पेंस और रोंगटे खड़े कर देने वाला डर।
भारतीय सिनेमा में हॉरर और थ्रिलर जॉनर को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाली फिल्म 'शैतान' (Shaitaan) इन दिनों डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धूम मचा
- अजय देवगन और आर माधवन की जुगलबंदी ने मचाया तहलका, वशीकरण की कहानी देख कांप उठेंगे दर्शक
- साउथ की रीमेक होने के बावजूद ओरिजिनल जैसा रोमांच, घर में छिपे दुश्मन से बचने की अनोखी जंग
भारतीय सिनेमा में हॉरर और थ्रिलर जॉनर को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाली फिल्म 'शैतान' (Shaitaan) इन दिनों डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धूम मचा रही है। फिल्म की शुरुआत एक सुखी और संपन्न परिवार से होती है जो छुट्टियां मनाने के लिए अपने फार्म हाउस की ओर निकलता है। विकास बहल द्वारा निर्देशित यह फिल्म करीब 2 घंटे 28 मिनट (लगभग 148 मिनट) की है, जिसमें सस्पेंस का ग्राफ शुरुआत से अंत तक बढ़ता ही जाता है। फिल्म की कहानी केवल भूत-प्रेत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'वशीकरण' जैसी प्राचीन और रहस्यमयी विद्या को केंद्र में रखकर बुनी गई है, जो इसे अन्य पारंपरिक हॉरर फिल्मों से अलग बनाती है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब एक अजनबी व्यक्ति, जिसका किरदार आर माधवन ने निभाया है, मदद के बहाने इस परिवार के घर में प्रवेश करता है। वह व्यक्ति अपनी जादुई शक्तियों और सम्मोहन के जरिए घर की बड़ी बेटी को अपने वश में कर लेता है। इसके बाद जो घटनाक्रम शुरू होता है, वह दर्शकों के मन में डर और बेचैनी पैदा करने के लिए काफी है। एक पिता के रूप में अजय देवगन की बेबसी और एक क्रूर तांत्रिक के रूप में माधवन की मुस्कान फिल्म के माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना देती है। फिल्म का हर मिनट इस बात की उत्सुकता जगाता है कि क्या एक पिता अपनी बेटी को उस नरक से बाहर निकाल पाएगा या वह शैतान के बिछाए जाल में पूरी तरह फंस जाएगा।
तकनीकी तौर पर फिल्म का निर्देशन और बैकग्राउंड स्कोर इसकी सबसे बड़ी जान है। फिल्म में जिस तरह से ध्वनि प्रभाव (Sound Design) का इस्तेमाल किया गया है, वह कमरे के बंद माहौल में भी एक अनजान डर का अहसास कराता है। सिनेमाटोग्राफी में डार्क टोन और छाया का बेहतरीन उपयोग किया गया है, जो वशीकरण के दृश्यों को और भी खौफनाक बनाता है। फिल्म में कोई अनावश्यक जंपस्केयर (अचानक डराने वाले सीन) नहीं हैं, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक स्तर पर दर्शकों को डराती है। यह फिल्म बताती है कि असली डर बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि उन लोगों में छिपा हो सकता है जिन्हें हम अपनी दहलीज के भीतर जगह देते हैं।
वशीकरण और आधुनिक समाज
फिल्म 'शैतान' जिस विषय पर आधारित है, वह भारतीय लोककथाओं और तंत्र विद्या का एक हिस्सा रहा है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि आधुनिक युग में भी तकनीक और तर्क के पीछे कुछ ऐसी शक्तियां या अंधविश्वास छिपे हो सकते हैं, जिनका सामना करना किसी भी साधारण इंसान के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह अपरिचितों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के परिणामों के प्रति एक सामाजिक चेतावनी भी है।
अभिनय के मोर्चे पर आर माधवन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल चॉकलेट बॉय की भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने विलेन के रूप में जिस तरह की क्रूरता और सनक दिखाई है, वह दर्शकों को उनके किरदार से नफरत करने पर मजबूर कर देती है। वहीं अजय देवगन ने एक बेबस लेकिन हार न मानने वाले पिता की भूमिका में जान फूंक दी है। ज्योतिका और जानकी बोदीवाला ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। खासकर जानकी, जिन्होंने सम्मोहित बेटी का किरदार निभाया है, उनके हाव-भाव और शरीर की भाषा ने कई दृश्यों में दर्शकों की रूह कंपा दी है।
यह फिल्म गुजराती फिल्म 'वश' की आधिकारिक रीमेक है, लेकिन हिंदी दर्शकों के लिए इसमें कई बदलाव किए गए हैं ताकि यह अधिक प्रभावशाली लगे। फिल्म का क्लाइमैक्स इतना सस्पेंस भरा है कि अंत तक दर्शक अपनी सीट से चिपके रहते हैं। ओटीटी पर इसके ट्रेंड होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि लोग घर बैठे इस तरह के थ्रिल का अनुभव करना चाहते हैं जो उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दे। यह फिल्म उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो सस्पेंस और हॉरर के शौकीन हैं और कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो लीक से हटकर हो।
What's Your Reaction?







