हापुड़: ऑटो रिक्शा के अंदर अजगर छिपा मिलने से यात्री घबरा गए, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक ऑटो रिक्शा के अंदर अचानक अजगर निकल आने से यात्री और चालक में हड़कंप मच गया। यह हादसा हापुड़
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक ऑटो रिक्शा के अंदर अचानक अजगर निकल आने से यात्री और चालक में हड़कंप मच गया। यह हादसा हापुड़ शहर के गढ़ क्षेत्र में हुआ, जहां एक यात्री ऑटो में सवार होकर घर लौट रहा था। अचानक सीट के नीचे से लहराते हुए अजगर को देखते ही चालक ने वाहन रोका और चीखना शुरू कर दिया। आसपास के लोग दौड़ पड़े, लेकिन कोई आगे नहीं आया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 8 फुट लंबे अजगर को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद अजगर को जंगल में छोड़ दिया गया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जहां लोग वन्यजीवों के शहरी इलाकों में घुसने पर चिंता जता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के बाद सरीसृप शुष्क जगह तलाशते हैं, जिससे ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
घटना 10 अक्टूबर 2025 की शाम करीब 6 बजे घटी। हापुड़ जिला मेरठ मंडल का हिस्सा है और यहां की आबादी तेजी से बढ़ रही है। गढ़ क्षेत्र एक व्यस्त बाजार इलाका है, जहां ऑटो रिक्शा मुख्य यातायात साधन हैं। चालक का नाम राजेश कुमार है, जो पिछले 10 साल से इस रूट पर चलाता है। उस दिन वह एक यात्री को लेकर गढ़ बाजार से गरहा रोड की ओर जा रहा था। यात्री, जिनका नाम गोपनीय रखा गया है, सीट पर बैठे हुए थे। अचानक उन्हें कुछ हिलता महसूस हुआ। नीचे झांकते ही अजगर का सिर दिखा, जो सीट के नीचे कुंडल मारकर लेटा था। यात्री ने चिल्लाकर चालक को बताया, तो ऑटो सड़क किनारे रुक गया। राजेश ने दरवाजा खोला और भागने की कोशिश की, लेकिन अजगर बाहर निकल आया। आसपास के दुकानदारों ने दूर से देखा, लेकिन डर के मारे कोई पास नहीं आया। एक स्थानीय ने वीडियो बनाया, जो बाद में वायरल हुआ। वीडियो में अजगर सड़क पर लहरा रहा है, जबकि लोग पीछे हटे हुए हैं।
राजेश ने तुरंत 112 नंबर पर कॉल की। हापुड़ वन विभाग की रेस्क्यू टीम, जो सरीसृप विशेषज्ञों से लैस है, 20 मिनट में पहुंच गई। टीम लीडर ने बताया कि अजगर भारतीय चट्टानी अजगर प्रजाति का था, जो गैर-विषैला होता है। इसकी लंबाई 8 फुट और वजन करीब 10 किलो था। अजगर ऑटो के इंजन या बैटरी कंपार्टमेंट में छिपा था, शायद गर्मी की तलाश में। मानसून के बाद सरीसृप शुष्क और गर्म जगह ढूंढते हैं, और वाहनों के अंदर ऐसी जगहें मिल जाती हैं। टीम ने विशेष हुक और कंबल का इस्तेमाल कर अजगर को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ा। रेस्क्यू के दौरान यात्री और चालक को हल्का सदमा लगा, लेकिन कोई चोट नहीं आई। अजगर को एक बोरे में डाला गया और हापुड़ के पास दुधवा जंगल में छोड़ दिया गया, जहां यह सुरक्षित रहेगा। वन अधिकारी ने कहा कि अजगर को किसी खतरे में नहीं डाला गया, क्योंकि यह पर्यावरण के लिए उपयोगी है। यह कीटों और छोटे जानवरों को खाकर संतुलन बनाए रखता है।
यह घटना हापुड़ में वन्यजीव-मानव संघर्ष का एक उदाहरण है। जिला गंगा नदी के किनारे बसा है, जहां जंगल और खेत सटे हुए हैं। शहरीकरण बढ़ने से जानवर शहरों में घुस आते हैं। पिछले साल हापुड़ में 50 से ज्यादा सरीसृप रेस्क्यू केस दर्ज हुए। जून में एक स्कूल में कोबरा मिला था, जिसे टीम ने पकड़ा। सितंबर में एक घर में रैट स्नेक निकला। विशेषज्ञों का कहना है कि अजगर मुख्य रूप से चूहों का शिकार करता है, इसलिए खेतों के पास ज्यादा पाया जाता है। लेकिन वाहनों में घुसना नया ट्रेंड है। ऑटो चालकों ने बताया कि वे रात में वाहन कवर करते हैं, लेकिन दिन में पार्किंग में छोड़ देते हैं। राजेश ने कहा कि अब वह ऑटो की जांच रोज करेगा। स्थानीय प्रशासन ने जागरूकता कैंप लगाने का ऐलान किया, जहां लोगों को सरीसृपों से डरने की बजाय वन विभाग को कॉल करने की सलाह दी जाएगी।
सोशल मीडिया पर वीडियो को हजारों बार शेयर किया गया। लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि शहरों में जंगल आ गया है। एक यूजर ने कहा कि विकास के नाम पर जानवरों का घर छीन लिया। दूसरे ने वन विभाग की तारीफ की। हापुड़ के एसपी ने कहा कि ऐसी घटनाओं में तुरंत हेल्पलाइन पर कॉल करें। वन विभाग ने 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। यह घटना पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बनी। लखनऊ से लेकर मेरठ तक न्यूज चैनलों ने इसे दिखाया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि सर्दी शुरू होने पर सरीसृप और सक्रिय हो जाएंगे। घरों और वाहनों में साफ-सफाई रखें। अगर कोई सरीसृप दिखे, तो खुद न पकड़ें, क्योंकि कुछ विषैले होते हैं। हापुड़ जिला वन्यजीव प्रोटेक्शन सोसाइटी ने मीटिंग बुलाई, जहां रेस्क्यू ट्रेनिंग दी गई। स्थानीय लोग अब सतर्क हैं।
राजेश और यात्री अब ठीक हैं। राजेश ने कहा कि डर तो लगा, लेकिन जान बच गई। यात्री ने परिवार को बताया, तो वे चिंतित हो गए। घटना के बाद ऑटो चालक संघ ने मीटिंग की और वाहनों की पार्किंग प्लेस पर नेट लगाने का सुझाव दिया। वन विभाग ने अजगर को ट्रैकिंग चिप लगाने पर विचार किया, लेकिन अभी लागू नहीं। यह प्रजाति संरक्षित है, इसलिए रेस्क्यू जरूरी। हापुड़ में गंगा के किनारे सरीसृपों की संख्या बढ़ रही है। बाढ़ के बाद वे ऊंचे स्थानों पर चढ़ आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से पैटर्न बदल रहा है। पहले अजगर जंगलों तक सीमित थे, अब शहरों में। सरकार ने वन्यजीव कॉरिडोर बनाने का प्लान बनाया है, ताकि जानवर शहर न घुसें। लेकिन अमल धीमा है।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है। विकास के साथ प्रकृति का संरक्षण कैसे करें? हापुड़ जैसे छोटे शहरों में संसाधन कम हैं, लेकिन जागरूकता बढ़ रही है। वन विभाग की टीम ने 100 से ज्यादा रेस्क्यू किए हैं इस साल। अगर लोग सहयोग करें, तो हादसे कम होंगे। राजेश अब अपने ऑटो को 'अजगर फ्री' कहकर मजाक करता है। यात्री ने कहा कि अब वह पैदल चलेगा। लेकिन गंभीरता से, ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश में हर साल सैकड़ों सरीसृप रेस्क्यू होते हैं। लखनऊ चिड़ियाघर ने जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया। हापुड़ प्रशासन ने स्कूलों में लेक्चर दिए। आशा है कि अगली बार कोई हादसा न हो। अजगर जंगल में सुरक्षित है, और लोग सतर्क। यह कहानी खतरे से सीख का प्रतीक है।
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