मुरादाबाद में यूपी एटीएस का बड़ा एक्शन: ISIS के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध आतंकी हारिश अली को किया गिरफ्तार।

उत्तर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को सोमवार, 16 मार्च 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण

Mar 17, 2026 - 12:17
Mar 17, 2026 - 12:23
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मुरादाबाद में यूपी एटीएस का बड़ा एक्शन: ISIS के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध आतंकी हारिश अली को किया गिरफ्तार।
मुरादाबाद में यूपी एटीएस का बड़ा एक्शन: ISIS के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध आतंकी हारिश अली को किया गिरफ्तार।
  • आतंक के रास्ते पर बीडीएस का छात्र: सहारनपुर निवासी हारिश अली मुरादाबाद से दबोचा गया, भारत में खिलाफत शासन स्थापित करने की थी साजिश।
  • सोशल मीडिया के जरिए जिहादी जहर फैला रहा था हारिश: ISIS हैंडलर्स के संपर्क में था संदिग्ध, एटीएस की पूछताछ में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे।

उत्तर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को सोमवार, 16 मार्च 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। एटीएस की टीम ने मुरादाबाद जनपद से एक संदिग्ध आतंकी हारिश अली को गिरफ्तार किया है, जिसके तार प्रतिबंधित वैश्विक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े हुए हैं। मूल रूप से सहारनपुर का निवासी हारिश अली मुरादाबाद में रहकर चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर रहा था और वह बीडीएस (Bachelor of Dental Surgery) द्वितीय वर्ष का छात्र है। उसकी गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की ओर सचेत कर दिया है कि किस प्रकार शिक्षित युवाओं को ऑनलाइन माध्यमों से कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है। एटीएस को लंबे समय से इसके डिजिटल फुटप्रिंट्स पर संदेह था, जिसके बाद एक सटीक ऑपरेशन चलाकर उसे हिरासत में ले लिया गया।

गिरफ्तार आरोपी हारिश अली की गतिविधियों की जांच करने पर पता चला है कि वह ISIS के अंतरराष्ट्रीय हैंडलर्स और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय अन्य मुजाहिदों के साथ निरंतर संपर्क में था। एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, हारिश अली केवल संगठन का सदस्य ही नहीं था, बल्कि वह भारत सरकार को गंभीर नुकसान पहुँचाने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने के मंसूबे भी पाल रहा था। पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया कि उसका मुख्य उद्देश्य भारत में शरिया कानून लागू करना और लोकतांत्रिक ढांचे को उखाड़कर 'खिलाफत' व्यवस्था स्थापित करना था। इसके लिए वह गुप्त संदेशवाहक ऐप्स और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहा था, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सके और अपने आकाओं के निर्देशों का पालन कर सके।

हारिश अली की कार्यप्रणाली के केंद्र में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स थे। वह विभिन्न इंटरनेट माध्यमों का उपयोग कर ISIS की हिंसक और जिहादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहा था। उसका मुख्य काम कट्टरपंथी साहित्य, वीडियो और प्रोपेगेंडा सामग्री को स्थानीय भाषाओं में डब या ट्रांसलेट करके युवा मस्तिष्क को प्रभावित करना था। सुरक्षा एजेंसियों ने उसके पास से कई डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और भड़काऊ दस्तावेज बरामद किए हैं, जो उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव की पुष्टि करते हैं। वह सोशल मीडिया पर ऐसे समूहों का हिस्सा था जहाँ दुनिया भर के कट्टरपंथी तत्व एक-दूसरे से विचार साझा करते हैं और नए रंगरूटों की भर्ती के लिए जमीन तैयार करते हैं।

विशेष खुफिया इनपुट: एटीएस की जांच में यह संकेत मिले हैं कि हारिश अली 'लोन वुल्फ' अटैक या किसी बड़े सामूहिक हमले की योजना बनाने के लिए ऑनलाइन ट्यूटोरियल के जरिए आईईडी (IED) बनाने की ट्रेनिंग लेने का प्रयास कर रहा था। उसके बैंक खातों में हुए कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उसे इस अभियान के लिए सीमा पार से कोई वित्तीय सहायता तो नहीं मिल रही थी।

हारिश अली का मुरादाबाद से पकड़ा जाना इस दृष्टि से भी गंभीर है कि वह एक छात्र के रूप में वहां रह रहा था, जिससे उस पर किसी को जल्दी संदेह न हो। वह सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के पास का रहने वाला है और अपनी पढ़ाई की आड़ में वह स्थानीय युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। एटीएस अब उन सभी लोगों की कुंडली खंगाल रही है जो पिछले कुछ महीनों में हारिश अली के संपर्क में आए थे। मुरादाबाद और सहारनपुर में उसके ठिकानों पर छापेमारी के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे लिंक मिले हैं जो प्रदेश के अन्य जनपदों में फैले ISIS के स्लीपर सेल्स की ओर इशारा करते हैं। यह गिरफ्तारी एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ इस कार्रवाई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब आतंक का चेहरा बदल रहा है और यह केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। हारिश अली जैसे युवा, जो समाज में डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे थे, उनका इस प्रकार कट्टरपंथ की ओर मुड़ना सामाजिक और सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चिंता का विषय है। एटीएस ने हारिश अली को रिमांड पर लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि उसके मोबाइल से हटाए गए डेटा को रिकवर किया जा सके। विशेषज्ञों की टीम उसके द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रॉक्सी सर्वर और डार्क वेब के लिंक्स को ट्रैक कर रही है, जिससे यह समझा जा सके कि उसे विदेशों से कौन निर्देशित कर रहा था।

मुरादाबाद के जिस इलाके से हारिश की गिरफ्तारी हुई है, वहां सघन तलाशी अभियान चलाया गया है। स्थानीय पुलिस और खुफिया इकाई को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। एटीएस का मानना है कि हारिश अली भारत के भीतर एक ऐसी 'साइबर आर्मी' तैयार करने में जुटा था जो बिना किसी हथियार के भी डिजिटल माध्यमों से देश की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे सके। उसके पास से जब्त किए गए लैपटॉप में कुछ ऐसी फाइलें मिली हैं जिनमें सरकारी भवनों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की लोकेशन सेव थी। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हारिश अली किसी बड़े हमले की रेकी या साजिश में शामिल था, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।

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