बॉम्बे हाई कोर्ट ने LPG सप्लाई कमी पर केंद्र और प्राइवेट फर्म को नोटिस जारी किया।

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने 12 मार्च 2026 को केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और

Mar 13, 2026 - 09:45
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने LPG सप्लाई कमी पर केंद्र और प्राइवेट फर्म को नोटिस जारी किया।
  • एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने घरेलू गैस उपलब्धता बढ़ाने की मांग की, ईरान युद्ध से प्रभावित सप्लाई
  • नागपुर बेंच ने कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम को घरेलू प्राथमिकता देने का निर्देश मांगा

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने 12 मार्च 2026 को केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और प्राइवेट फर्म कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस छह LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा दायर याचिका पर जारी हुआ, जिसमें घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ईरान युद्ध से उत्पन्न ऊर्जा संकट के बावजूद कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम ने घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के बजाय निर्यात पर फोकस किया है। केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आदेश जारी कर रिफाइनरियों को घरेलू उपयोग के लिए LPG उत्पादन अधिकतम करने और निर्यात सीमित करने का निर्देश दिया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि प्राइवेट फर्म ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने मामले को गंभीर और महत्वपूर्ण बताते हुए सभी पक्षों से 17 मार्च तक जवाब मांगा है। यह याचिका नागपुर के डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा दायर की गई है, जो कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम से LPG प्राप्त करते हैं और उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं।

याचिका में बताया गया कि ईरान युद्ध से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक LPG सप्लाई चेन बाधित हुई है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और इस संकट से घरेलू उत्पादन और आयात दोनों पर दबाव पड़ा है। केंद्र ने 9 मार्च को आदेश जारी कर रिफाइनरियों को LPG यील्ड बढ़ाने और घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम ने बार-बार अनुरोध के बावजूद निर्यात जारी रखा और घरेलू सप्लाई नहीं बढ़ाई। इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स को उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने में कठिनाई हो रही है और बाजार में कमी महसूस की जा रही है। याचिका में मांग की गई कि कोर्ट कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम को निर्यात रोककर घरेलू बाजार में प्राथमिकता देने का आदेश दे और मंत्रालय को आदेशों के सख्त क्रियान्वयन के लिए निर्देशित करे।

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मुद्दा गंभीर प्रकृति का है और घरेलू उपभोक्ताओं की रसोई से जुड़ा है। बेंच ने सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। याचिका में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और अन्य प्रावधानों के तहत आदेशों के क्रियान्वयन की मांग की गई है। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने बताया कि उन्होंने कंपनी से कई बार संपर्क किया लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। कोर्ट ने मामले को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया है, जहां जवाब दाखिल होने के बाद आगे की सुनवाई होगी। यह कदम LPG संकट के दौरान डिस्ट्रीब्यूटर्स की चिंताओं को न्यायिक स्तर पर उठाता है, जहां वे खुद को बीच में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।

एलपीजी संकट मुख्य रूप से वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं जैसे होटल, रेस्तरां और बेकरी को प्रभावित कर रहा है, जहां सप्लाई लगभग रुक गई है। घरेलू उपभोक्ताओं को अभी भी सामान्य डिलीवरी मिल रही है लेकिन पैनिक बुकिंग से दबाव बढ़ा है। केंद्र ने रिफाइनरियों को उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्देश दिया है और घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी है। हालांकि, निर्यात और पेट्रोकेमिकल सेक्टर से LPG का डायवर्शन घरेलू उपलब्धता पर असर डाल रहा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि प्राइवेट फर्मों द्वारा निर्यात जारी रखने से घरेलू बाजार में कमी बनी हुई है। कोर्ट का हस्तक्षेप इस संकट को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर जब वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित है।

याचिका में मांग की गई है कि सरकार निर्यात पर रोक लगाए और घरेलू बाजार में LPG की उपलब्धता सुनिश्चित करे। कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम नागपुर आधारित कंपनी है जो LPG उत्पादन और सप्लाई में सक्रिय है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कंपनी ने केंद्र के आदेशों का पालन नहीं किया, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर्स और उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं। कोर्ट ने DGFT को भी नोटिस जारी किया है क्योंकि निर्यात नीति उसके दायरे में आती है। यह मामला LPG संकट के दौरान न्यायिक निगरानी की मिसाल पेश करता है, जहां डिस्ट्रीब्यूटर्स खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

एलपीजी संकट से प्रभावित शहरों में होटल और रेस्तरां बंद होने की स्थिति है, जहां वाणिज्यिक सिलेंडर की कमी से ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं। केंद्र ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि प्राइवेट फर्मों की ओर से सहयोग की कमी है। कोर्ट की सुनवाई से उम्मीद है कि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। यह याचिका संकट के दौरान आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को सामने लाती है।

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