उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में सरकारी कर्मचारी पर आपत्तिजनक व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर मुकदमा दर्ज।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में समाज कल्याण विभाग में तैनात कनिष्ठ सहायक ग्रेड-3 अभिषेक गिरि के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक
- समाज कल्याण विभाग के कनिष्ठ सहायक अभिषेक गिरि पर विशेष समुदाय के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का आरोप
- मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड और एडवोकेट ने शिकायत की, सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट वायरल होने से बवाल
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में समाज कल्याण विभाग में तैनात कनिष्ठ सहायक ग्रेड-3 अभिषेक गिरि के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला गुरुवार को सामने आया जब मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष मोहम्मद शहजाद और एडवोकेट अशोक सिंह विसेन ने सीओ सिटी और कोतवाली प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अभिषेक गिरि ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर एक विशेष समुदाय के प्रति आपत्तिजनक, अभद्र और भड़काऊ टिप्पणी पोस्ट की, जिसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस पोस्ट से समुदाय में आक्रोश फैला और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई गई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए अभिषेक गिरि के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह घटना सरकारी कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर सवाल खड़े करती है, क्योंकि वे सार्वजनिक पद पर होते हैं और उनकी जिम्मेदारी अधिक होती है।
अभिषेक गिरि समाज कल्याण विभाग में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत हैं, जहां उनका काम सामाजिक न्याय और कल्याण योजनाओं से जुड़ा है। आरोप के अनुसार उन्होंने व्हाट्सएप स्टेटस पर ऐसी टिप्पणी की जो समुदाय विशेष के खिलाफ अपमानजनक और घृणा फैलाने वाली थी। स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद मुस्लिम समुदाय सहित विभिन्न संगठनों में नाराजगी फैली, क्योंकि यह टिप्पणी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली मानी गई। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बताया कि ऐसी टिप्पणियां सामाजिक सद्भाव को खतरे में डालती हैं और सरकारी कर्मचारी होने के नाते अभिषेक गिरि को अधिक सतर्क रहना चाहिए था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद अभिषेक गिरि से पूछताछ शुरू की है और स्टेटस के मूल कंटेंट की जांच कर रही है। यह मामला आईटी एक्ट की धाराओं के साथ भी जुड़ सकता है, क्योंकि सोशल मीडिया पर पोस्ट करना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपराध माना जाता है।
शिकायत मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष मोहम्मद शहजाद और एडवोकेट अशोक सिंह विसेन द्वारा दी गई, जिन्होंने सीओ सिटी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि अभिषेक गिरि के खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो, विभागीय जांच शुरू की जाए और उन्हें निलंबित किया जाए। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि सरकारी कर्मचारी का यह व्यवहार अस्वीकार्य है, क्योंकि समाज कल्याण विभाग का काम सभी वर्गों के लिए समान रूप से सेवा प्रदान करना है। वायरल स्क्रीनशॉट में टिप्पणी की भाषा इतनी आक्रामक बताई गई कि इससे साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने का खतरा था। पुलिस ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की, जिसमें धाराएं जैसे 153ए (साम्प्रदायिक सद्भाव भंग करना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और अन्य शामिल हैं। जांच अधिकारी इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि स्टेटस कितने लोगों तक पहुंचा और इसका प्रभाव क्या रहा।
अभिषेक गिरि पहले भी विवादों में रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ बल्दीराय थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। उस मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, जो उनकी पिछली गतिविधियों पर सवाल उठाता है। वर्तमान मामले में विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की संभावना है, क्योंकि सरकारी सेवा नियमों के तहत कर्मचारी को सोशल मीडिया पर विवादास्पद सामग्री पोस्ट करने से बचना चाहिए। समाज कल्याण विभाग के अधिकारी इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं और जांच पूरी होने के बाद उचित निर्णय लेंगे। यह मामला सरकारी कर्मचारियों के लिए चेतावनी का काम कर सकता है कि व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट भी उनकी आधिकारिक छवि को प्रभावित करते हैं।
सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट वायरल होने से मामला तेजी से फैला और विभिन्न संगठनों ने विरोध जताया। मुस्लिम समुदाय में आक्रोश था क्योंकि टिप्पणी उनके प्रति लक्षित बताई गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और जांच को प्राथमिकता दी। अभिषेक गिरि से पूछताछ में वे अपना पक्ष रख सकते हैं, लेकिन वायरल कंटेंट के कारण बचाव मुश्किल हो सकता है। यह घटना सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर बहस छेड़ती है, जहां व्यक्तिगत राय व्यक्त करने की आजादी है लेकिन सीमाएं पार करने पर कानूनी कार्रवाई होती है। सुल्तानपुर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही पर बात कर रहे हैं।
पुलिस जांच अभी जारी है और अभिषेक गिरि को नोटिस जारी किया जा सकता है। मुकदमा दर्ज होने के बाद विभाग से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यदि आरोप सिद्ध हुए तो उन्हें निलंबन या अन्य दंड का सामना करना पड़ सकता है। यह घटना सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करती है, खासकर सरकारी पद पर बैठे व्यक्तियों के लिए। शिकायतकर्ता कार्रवाई से संतुष्ट हैं लेकिन पूर्ण न्याय की मांग कर रहे हैं। मामले की सुनवाई आगे कोर्ट में होगी जहां सबूतों के आधार पर फैसला आएगा।
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