वैशाली में लोकतंत्र की मिसाल बनीं बुजुर्ग महिला, परिवार ने गोद में उठाकर पोलिंग बूथ तक पहुंचाया, वोट डालकर लौटीं खुश।
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 6 नवंबर 2025 को वैशाली जिले में एक हृदयस्पर्शी दृश्य देखने को मिला। जिले के नौबतपुर क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला अपने मताधिकार
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 6 नवंबर 2025 को वैशाली जिले में एक हृदयस्पर्शी दृश्य देखने को मिला। जिले के नौबतपुर क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए इतनी उत्सुक थीं कि परिवार के सदस्यों ने उन्हें गोद में उठाकर पोलिंग बूथ तक पहुंचाया। यह महिला करीब 85 साल की हैं और उनका नाम रामदुलारी देवी है। वे चलने फिरने में असमर्थ हैं लेकिन वोट डालने की जिद पर अड़ी रहीं। परिवार ने उनकी इच्छा पूरी की और सुबह करीब आठ बजे उन्हें घर से उठाकर बूथ तक ले गए। वहां वोट डालने के बाद वे मुस्कुराती हुईं वापस लौटीं। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने इसे लोकतंत्र की सच्ची ताकत बताया।
घटना वैशाली के महुआ प्रखंड के एक गांव की है। रामदुलारी देवी का परिवार खेती किसानी करता है। उनके पोते संजय कुमार ने बताया कि दादी हमेशा कहती थीं कि वोट डालना हमारा हक है। इस बार वे कमजोर हैं लेकिन जिद की कि जाना है। हम चार लोग मिलकर उन्हें गोद में उठाए और बूथ तक ले गए। रास्ते में लोग रुक रुककर तारीफ कर रहे थे। बूथ पर चुनाव कर्मियों ने भी मदद की। व्हीलचेयर की व्यवस्था थी लेकिन दादी ने कहा कि पोते ले आएं तो ठीक है। उन्होंने ईवीएम पर बटन दबाया और स्याही लगी उंगली दिखाई। संजय ने कहा कि दादी ने कहा कि वोट दिया क्योंकि सुशासन अच्छा है। लेकिन वोट गुप्त है इसलिए वे खुश हैं कि अपना फर्ज निभाया।
यह तस्वीर सबसे पहले स्थानीय पत्रकार ने कैद की और एक्स पर पोस्ट की। इसके बाद न्यूज चैनल्स जैसे आज तक बिहार और न्यूज18 बिहार ने इसे दिखाया। बिहार चुनाव आयोग के आधिकारिक हैंडल ने भी इसे शेयर करके लिखा कि लोकतंत्र में हर वोट मायने रखता है। बुजुर्गों का उत्साह प्रेरणा देता है। वैशाली के डीएम यशपाल मीणा ने बताया कि जिले में बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था है। व्हीलचेयर होम वोटिंग और पिकअप सुविधा उपलब्ध है। इस बार हजारों बुजुर्गों ने वोट डाला। रामदुलारी देवी जैसी महिलाएं मिसाल हैं।
वैशाली जिला पहले चरण में मतदान वाले 18 जिलों में शामिल है। यहां 21 विधानसभा सीटें हैं जिन पर सुबह सात बजे से वोटिंग शुरू हुई। जिले में करीब पचास लाख मतदाता हैं। सुबह नौ बजे तक पंद्रह प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हो चुकी थी। रामदुलारी देवी का बूथ महुआ के एक स्कूल में था। वहां लंबी कतारें लगी थीं। महिलाओं की अलग लाइन थी। परिवार ने उन्हें गोद में उठाकर लाइन में खड़ा किया। अन्य मतदाताओं ने जगह दी और तालियां बजाईं। एक युवा मतदाता ने कहा कि दादी ने हमें सिखाया कि उम्र कोई बाधा नहीं। हम युवा भी पूरी जिम्मेदारी से वोट डालें।
रामदुलारी देवी के परिवार में आठ सदस्य हैं। उनके पति का देहांत हो चुका है। वे तीन बेटों और बहूओं के साथ रहती हैं। पोते पोतियां स्कूल जाते हैं। संजय ने बताया कि दादी हर चुनाव में वोट डालती आई हैं। 1952 से बिहार में चुनाव हो रहे हैं और दादी ने ज्यादातर में हिस्सा लिया। पहले पैदल जाती थीं अब कमजोर हैं लेकिन हिम्मत नहीं हारी। परिवार ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि दादी की इच्छा पूरी की। बूथ से लौटकर दादी ने सबको आशीर्वाद दिया और कहा कि बिहार अच्छा बने।
यह घटना बिहार चुनाव में मतदाता उत्साह की मिसाल बनी। वैशाली में कई जगह बुजुर्गों को परिवार लेकर आया। कुछ जगहों पर बैलगाड़ी से पहुंचे। चुनाव आयोग ने 85 साल से ऊपर के लिए होम वोटिंग की सुविधा दी लेकिन कई बुजुर्ग बूथ पर आना पसंद करते हैं। डीएम ने कहा कि हमने हर बूथ पर रैंप व्हीलचेयर और पानी की व्यवस्था की। महिलाओं और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जाती है। वैशाली में इस बार महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है।
सोशल मीडिया पर यह तस्वीर हजारों बार शेयर हुई। लोग लिख रहे हैं कि यह लोकतंत्र की जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपील की कि बुजुर्ग और युवा दोनों वोट डालें। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मतदाता ही असली हीरो हैं। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने भी बुजुर्गों की तारीफ की। वैशाली के एसपी राकेश कुमार ने बताया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। कोई शिकायत नहीं आई।
रामदुलारी देवी जैसी महिलाएं ग्रामीण बिहार की ताकत हैं। वे घर संभालती हैं परिवार चलाती हैं और लोकतंत्र में हिस्सा लेती हैं। उनकी हिम्मत युवाओं को प्रेरित करती है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि दादी ने हमें सिखाया कि वोट की कीमत समझो। यह सिर्फ एक बटन दबाना नहीं देश की दिशा तय करना है। बूथ पर मौजूद चुनाव अधिकारी ने कहा कि ऐसे दृश्य देखकर अच्छा लगता है। हमारी मेहनत सफल होती है।
वैशाली ऐतिहासिक जगह है। यहां विश्व की पहली गणतंत्र थी। आज भी लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हैं। रामदुलारी देवी का गोद में उठाकर ले जाना परिवारिक एकता भी दिखाता है। पोते ने कहा कि दादी हमारी प्रेरणा हैं। हमने उन्हें कंधे पर उठाया जैसे वे हमें बचपन में उठाती थीं। यह पल हम कभी नहीं भूलेंगे।
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